नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने जारी किया NEET-UG 2026 का रिजल्ट, क्या हैं इसके ताज़ा अपडेट?
नीट के जरिए 11.21 लाख स्टूडेंट मेडिकल, डेंटल, AYUSH और अन्य मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए क्वालिफाई हुए हैं। 10 लाख स्टूडेंट 213 नंबर (कटऑफ) भी नहीं ला पाए। इस बार कटऑफ में 69 नंबर की बढ़ोतरी हुई है।….

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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LIVEदो भाइयों ने एक साथ क्लियर किया NEET:जयपुर के उपलक्ष्य की तीसरी रैंक, बोले- खुद को रिफ्रेश करने के लिए कॉमेडी शो देखता था
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नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने गुरुवार रात NEET-UG 2026 का रिजल्ट जारी किया। जयपुर के उपलक्ष्य गोयल ने देशभर में तीसरी रैंक और अलवर के गौरव सिंह ने 9वीं रैंक हासिल की। अलवर के दो भाई यशवर्धन (146वीं) और चिराग यादव (1096वीं) ने एक साथ नीट क्लियर किया है।
पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल ने 720 में से 715 अंक हासिल कर ऑल इंडिया टॉप किया। कोटा में रहकर कोचिंग करने वाले बिहार के आयुष बालोटिया की चौथी रैंक है। रिजल्ट के बाद स्टूडेंट्स ने डांस कर और पटाखे चलाकर सफलता का जश्न मनाया।
नीट के जरिए 11.21 लाख स्टूडेंट मेडिकल, डेंटल, AYUSH और अन्य मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए क्वालिफाई हुए हैं। 10 लाख स्टूडेंट 213 नंबर (कटऑफ) भी नहीं ला पाए। इस बार कटऑफ में 69 नंबर की बढ़ोतरी हुई है।
मेहरानगढ़ भगदड़ में हुई पिता की मौत, बेटे ने किया क्वालिफाई
कोटा में रहकर नीट की तैयारी करने वाले पटना (बिहार) के रणवीर ने 39वीं रैंक हासिल की। उनकी मां एग्जाम से 2 दिन पहले सेंटर देखने जा रही थी तभी टेम्पो पलटने से उनके सिर में चोट लग गई। इसके बावजूद एग्जाम के दिन वे बेटे को सेंटर पर छोड़ने गई।
जोधपुर के मोहित अग्रवाल की 335वीं रैंक आई है। मोहित के पिता का साल 2008 में मेहरानगढ़ किले के चामुंडा माता मंदिर में हुई भगदड़ में निधन हो गया था। पिता की मौत के 14 दिन बाद मोहित का जन्म हुआ था।
कटऑफ में 69 नंबर की बढ़ोतरी
एजुकेशन एक्सपर्ट देव शर्मा ने बताया- इस बार पेपर टफ रहा। इसके बाद भी स्टूडेंट्स का प्रदर्शन शानदार रहा है। हालांकि इस बार कोई भी स्टूडेंट 720 का परफेक्ट स्कोर हासिल नहीं कर सका है।
इस बार हाइएस्ट स्कोर 715 रहा। वहीं क्वालिफाइंग कटऑफ में 69 नंबर की बढ़ोतरी हुई है। साल 2024 कटऑफ 162, 2025 में 144 और 2026 में 213 नंबर रही है।
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नीट रिजल्ट से जुड़ी शहरों की खबरें पढ़ें…
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नीट रिजल्ट के पल-पल के अपडेट के लिए ब्लॉग पढ़िए…
लाइव अपडेट्स
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ऑल इंडिया 76वीं रैंक हासिल करने वाले आदित्य शर्मा ने बताया- पढ़ाई के दौरान जब भी मेरा मन खराब होता या फिर मुझे कुछ भी अजीब लगता था, तो मैं अपने टैब या फिर कंप्यूटर पर गेम खेलने लगता था। आदित्य ने बताया कि मुझे गेम खेलना इतना पसंद था कि पहले मैंने यूट्यूब पर खुद का गेमिंग चैनल भी शुरू कर दिया था। लेकिन फिलहाल मैं वहां वीडियो अपलोड नहीं कर रहा हूं, पर अब भी मैं गेम खेल कर खुद को रिलैक्स करता हूं।
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पाली के सोजत के बुटेलाव गांव के आदित्य वैष्णव साल 2024 में जोधपुर में ननिहाल में निर्माणाधीन दो मंजिला छत से नीचे गिर गए थे। हादसे में उनके शरीर का निचला हिस्सा, पैर और रीढ़ की हड्डी टूट गई। सर्जरी के बाद आदित्य के शरीर के निचले हिस्से ने काम करना बंद कर दिया। आदित्य ने पिछले एक साल में सेल्फ स्टडी कर नीट की तैयारी की और सफलता हासिल की।
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ऑल इंडिया 76वीं रैंक हासिल करने वाले आदित्य शर्मा ने बताया कि 12वीं के बाद यह मेरा पहला प्रयास था। अब दिल्ली एम्स में एडमिशन लेकर आम लोगों की मदद करना मेरा टारगेट है।
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चित्तौड़गढ़ के गांव मेघ निवास निवासी साक्षी धाकड़ ने ऑल इंडिया में 3038 और ओबीसी वर्ग में 1146वीं रैंक हासिल की है। साक्षी के पिता राधेश्याम धाकड़ रोडवेज में कंडक्टर है और माता कंचन देवी खेती करती हैं।
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अजमेर के फायसागर निवासी प्रिया सोनी ने 630 अंक हासिल किए। उन्हें ऑल इंडिया रैंक (AIR) 3531 और ओबीसी कैटेगरी में 1270वीं रैंक मिली है। प्रिया के पिता राजेश सोनी सरकारी स्कूल में वाइस प्रिंसिपल और मां मीनाक्षी सोनी हाउस वाइफ हैं।
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हनुमानगढ़ के दैविक मिड्ढा ने देशभर में 47वीं रैंक हासिल की। पहले ही प्रयास में यह उपलब्धि प्राप्त की। दैविक ने 720 में से 695 अंक प्राप्त किए। दैविक ने राजस्थान में सातवीं रैंक हासिल की है। दैविक के पिता डॉ. पवन मिड्ढा डेंटिस्ट हैं।
दैविक ने इससे पहले 12वीं में 93.6 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। एक खास बात यह भी है कि मैथ्स विषय नहीं होने के बावजूद दैविक ने जनवरी में जेईई मेन्स की परीक्षा में 99.78 पर्सेंटाइल हासिल की थी।
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पाली के सुभाष नगर की रहने वाली शैली गहलोत की ऑल इंडिया 3806 रैंक और ओबीसी में 1492 रैंक आई। पिता देवराज जयपुर में एक फॉर्मा कंपनी में मैनेजर है। मां सोनू गहलोत हाउस वाइफ है।
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धौलपुर के कोडपुरा सैंपऊ गांव के किसान जगदीश बघेल के बेटे प्रेमशंकर बघेल ने सेल्फ स्टडी से पहली बार में 2385वीं रैंक हासिल की है।
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धौलपुर के मरैना गांव के किसान देवी सिंह की बेटी गुंजन कुमारी ने तीन बार के प्रयास में घर से ही पढ़ाई करके 818वीं रैंक हासिल की है।
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पाली के नारलाई की अर्पिता ने 1500वीं रैंक हासिल की है। पिता देसूरी में पंचायत समिति सदस्य हैं। मां आशा चौधरी जयपुर में प्राइवेट टीचर हैं।
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अलवर के दो भाई यशवर्धन और चिराग यादव ने एक साथ नीट क्लियर किया है। यशवर्धन ने 146वीं और चिराग ने 1096वीं रैंक हासिल की।
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जालोर के रिद्धम मेहता ने 1079वीं रैंक हासिल की है। वह दो साल से गुजरात के अहमदाबाद में रहकर तैयारी कर रहे थे।
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श्रीगंगानगर के सूर्यांश मल्होत्रा की 465वीं रैंक आई है। सूर्यांश के पिता ऋषिराज मल्होत्रा सेशन कोर्ट में एलडीसी हैं। मां पूनम मल्होत्रा श्रीगंगानगर कोर्ट में एडवोकेट हैं।
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जयपुर में नीट में सफल हुए स्टूडेंट्स ने पटाखे चलाकर और डांस कर खुशी का इजहार किया।
इस दौरान स्टूडेंट्स के साथ उनके पैरेंट्स और टीचर्स भी शामिल हुए।
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सीकर में कोचिंग करने वाले दैविक मिधा ने 47वीं रैंक हासिल की है।
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बीकानेर के दिवाकर पुरोहित ने 868वीं रैंक हासिल की है।
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जयपुर के उपलक्ष्य गोयल की तीसरी रैंक आई है। उपलक्ष्य ने बताया कि मैंने 10th के बाद तैयारी शुरू कर दी थी। हर दिन 10 से 12 घंटे पढ़ाई करता था। इस दौरान जब भी डिमोटिवेट या परेशान होता था, तब मम्मी से बात कर खुद को संभालने की कोशिश करता था।
उपलक्ष्य ने बताया- तैयारी के दौरान मैंने मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बना रखी थी। खुद को रिफ्रेश करने के लिए खाना खाते वक्त टीवी पर ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ या फिर कॉमेडी शो देखता था।
मैं अब एम्स नई दिल्ली जाना चाहता हूं। फिलहाल फील्ड मैंने डिसाइड नहीं की है। लेकिन प्रिपरेशन के दौरान जो भी सब्जेक्ट मुझे सही लगेगा, मैं उसी में आगे जाने के बारे में सोचूंगा।
तैयारी के दौरान तनाव में न आएं उपलक्ष्य ने कहा कि काफी लोग तैयारी के दौरान परेशान होकर गलत फैसले लेते हैं, लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए। उन्हें हमेशा अपने माता-पिता से बात करनी चाहिए, क्योंकि माता-पिता ही उन्हें सही सलाह देंगे और अगर वे उनके फैसलों और सलाह के आधार पर चलेंगे तो उन्हें कभी कोई परेशानी नहीं होगी।
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श्रीगंगानगर की जिया मित्तल की 1851वीं रैंक आई है।
वहीं राघव सोएन ने 1074वीं रैंक हासिल की है।
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नागौर के आलाय गांव निवासी निकिता जांगू की 24 हजार रैंक आई है।
निकिता के पिता भागीरथ राम किसान हैं, जबकि मां गृहिणी हैं।
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153वीं रैंक हासिल करने वाले जयपुर के देवेश सिंह गुर्जर ने बताया कि आज से 26 साल पहले मेरे दादा का सपना पूरा करने के लिए पिता डॉक्टर बनना चाहते थे।
किसी कारणवश वह सफल नहीं हो पाए थे, इसलिए दादा और पिता का सपना पूरा करने के लिए मैंने डॉक्टर बनने की तैयारी की।
आज मुझे खुशी है कि मैं 153वीं रैंक हासिल कर पाया हूं। अब मैं एक अच्छा डॉक्टर बन आम लोगों की मदद करना चाहता हूं।
सर्जरी स्पेशलिस्ट बनना चाहते
144वीं रैंक हासिल करने वाले अजय चौधरी ने बताया कि मैं सर्जरी स्पेशलिस्ट बनना चाहता हूं। इसमें ही मास्टर्स करूंगा।
टेस्ट सीरीज से तैयारी की
154वीं रैंक हासिल करने वाले दक्ष खंडेलवाल ने बताया कि तैयारी के दौरान लगातार टेस्ट सीरीज दे रहा था।
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सवाई माधोपुर के मानटाउन थाने में कार्यरत हेड कॉन्स्टेबल दयाराम के छोटे बेटे सुनील कुमार ने 1144वीं रैंक प्राप्त की है।
इससे पहले दयाराम के बड़े बेटे विकास कुमार भी NEET पास कर चुके हैं। वर्तमान में विकास मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के छात्र हैं।
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जोधपुर की हिमांशी सिंह ने 512वीं रैंक हासिल की है।
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भरतपुर में जिरौली गांव निवासी प्रगति फौजदार ने 3352वीं रैंक हासिल की है।
इंस्टीट्यूट में टीचर्स ने प्रगति को बुलाकर उसकी उपलब्धि का जश्न मनाया और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
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अजमेर के रामगंज में रहने वाली श्रेया सेन ने पहली बार में एग्जाम क्लियर किया है। श्रेया ने 4916वीं रैंक हासिल की है।
श्रेया के पिता मुकेश और मां सविता, दोनों गवर्नमेंट लेक्चरर हैं।
श्रेया ने बताया- मैं इस एग्जाम को क्लियर करने के लिए करीब डेढ़ साल तक घर से बाहर नहीं निकली थी।
मोबाइल का भी उपयोग सिर्फ पढ़ाई के लिए किया था। AI की हेल्प लेकर अपने कई सवालों को क्लियर किया था।
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सीकर में कोचिंग करने वाले कृतिक जैन की 18वीं रैंक आई है। उन्होंने बताया कि वे 5 से 6 घंटे पढ़ाई करते थे। कोचिंग में टेस्ट के दौरान भी हर तरह का पेपर टफ, मीडियम देते थे।
3 मई को परीक्षा रद्द होने के बाद दुख हुआ था। जैसे ही री-नीट का पता चला, वापस तैयारी करना शुरू कर दिया था। पढ़ाई के दौरान सोशल मीडिया से दूर रहे। 12th के साथ ही नीट की तैयारी करने लगा था।
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जयपुर के उपलक्ष गोयल की तीसरी रैंक आई है। उन्होंने बताया कि मैं पिछले एक साल से नीट की तैयारी कर रहा था। मेरा पहला टारगेट सिलेक्ट होना था। अब थर्ड रैंक आई है, तो मुझे काफी खुशी है।
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जोधपुर के कनिष्क जाखड़ ने 758वीं रैंक हासिल की है।
कनिष्क ने बताया- मैंने 8 से 10 घंटे पढ़ाई की है। स्ट्रेस को दूर करने के लिए एक घंटे वॉक और योगा करते थे। कनिष्क के पिता सरकारी नौकरी में हैं। मां गृहिणी हैं।
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बीकानेर की क्षिरिन गोदारा ने 1950वीं रैंक हासिल की है। मूल रूप से रासीसर गांव की रहने वाली क्षिरिन ने बीकानेर शहर में रहकर पढ़ाई की। उसने 12वीं में 97.50 प्रतिशत अंक हासिल किए थे।
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चूरू के सुजानगढ़ के वार्ड नंबर 56 की मीरा कालेर और वार्ड नंबर 7 के मो. तनवीर पंवार ने भी नीट में सफलता हासिल की है।
मीरा की रैंक 27 हजार है। यह उनका दूसरा प्रयास था। मीरा के पिता अशोक कालेर मेडिकल व्यवसायी हैं। मीरा ने सीकर से कोचिंग की थी। मीरा ने बताया कि पढ़ाई के दौरान मोबाइल फोन से दूरी बनाए रखी।
उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय दादी, मां और पिता को दिया। सफलता पर परिजनों ने मुंह मीठा करवाकर और माला पहनाकर मीरा का स्वागत किया।
वहीं, तनवीर को पहले प्रयास में 8002 रैंक मिली है। तनवीर के पिता आसिफ पंवार तिरपाल व्यवसायी हैं। तनवीर ने कोचिंग के साथ रोजाना 7 से 8 घंटे पढ़ाई की।
तनवीर की सफलता पर मदरसा जामिया हाशमिया अहले सुन्नत सुजानगढ़ में स्वागत किया गया।
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सवाई माधोपुर निवासी सौरभ अग्रवाल ने 87वीं रैंक हासिल की है। सौरभ 11वीं क्लास से ही सीकर में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं।
उनके पिता संजय अग्रवाल सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल हैं।
सौरभ अग्रवाल का कहना है कि नीट में इस उपलब्धि को हासिल करने में सबसे बड़ा योगदान NCERT बेस्ड स्टडी मटेरियल का है।
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जोधपुर के मोहित अग्रवाल की 335वीं रैंक आई है। मोहित ने बताया कि परिवार का भी सपना है कि मैं डॉक्टर बनूं। नीट की तैयारी के लिए रोजाना 10 से 12 घंटे पढ़ाई करता था।
जब री-नीट की खबर आई तो मुझे डिप्रेसिंग लगा। फिर मैंने तैयारी शुरू कर दी और अच्छे मार्क्स हासिल किए।
मोहित के पिता का साल 2008 में मेहरानगढ़ किले के चामुंडा माता मंदिर में हुई भगदड़ में निधन हो गया था। पिता की मौत के 14 दिन बाद मोहित का जन्म हुआ था। मोहित की परवरिश मां तरुणा अग्रवाल ने की। वे सरकारी नौकरी में हैं।
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उदयपुर के हर्षिल गुप्ता ने 22वीं रैंक हासिल की है। हर्षिल के 720 में से 700 नंबर आए हैं। हर्षिल ने बताया- मैंने 2 साल तक नियमित रूप से अनुशासन के साथ हर दिन 6-7 घंटे पढ़ाई की।
खुद को मेंटली और फिजिकली फिट रखने के लिए रोज एक घंटा आउटडोर स्पोट्र्स भी खेलता था।
हर्षिल ने तैयारी के दौरान दो साल तक मोबाइल यूज नहीं किया और पूरी तरह ऑफलाइन तरीके से पढ़ाई की।
रिजल्ट आने के बाद उनके टीचर्स ने उनके घर पहुंचकर स्वागत-सम्मान किया।
हर्षिल के पिता पंकज गुप्ता और मां कल्पना गुप्ता दोनों ही डॉक्टर हैं।
हर्षिल ने बताया कि पेरेंट्स की प्रेरणा और शिक्षकों के मार्गदर्शन से यह मुकाम हासिल किया है।
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पटना (बिहार) के रहने वाले रणवीर ने कोटा में रहकर नीट की कोचिंग की थी। उनकी 39वीं रैंक आई है।
रणवीर की मां निशि सिंह ने बताया- एग्जाम से दो दिन पहले बच्चे का सेंटर देखने जा रही थी। तब टेम्पो पलटने से मेरे सिर में चोट लग गई थी।
इसके बाद भी बेटे का हौसला बढ़ाने के लिए एग्जाम के दिन उसे सेंटर पर छोड़ने गई थी। बेटे ने बहुत मेहनत की है, जिसकी बदौलत उसे ये सफलता मिली है।
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अलवर के रहने वाले गौरव ने 9th रैंक हासिल की है। उन्होंने कोटा में 4 साल तक नीट की तैयारी की थी। एग्जाम के बाद घर लौट गए थे। अब रिजल्ट आने के बाद फिर कोटा पहुंचे हैं।
गौरव ने बताया कि कई बार पढ़ाई करते-करते बोर हो जाता था। तब लगता था कि कड़ी मेहनत के बाद सफलता मिलेगी और वापस पढ़ाई में लग जाता था। खुद को थोड़ा रिलेक्स करने के लिए क्रिकेट खेलता था।
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कोटा के कोचिंग इंस्टीट्यूट में नीट रिजल्ट आने के बाद शुक्रवार को जश्न का माहौल है।
स्टूडेंट्स, उनके माता-पिता और फैकल्टी डांस कर रहे हैं।
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सीकर में कोचिंग करने वाले स्टूडेंट अभिलाष ने 11वीं रैंक हासिल की है। उनके पिता जयप्रकाश पेशे से किसान हैं। अभिलाष ने 720 में से 705 नंबर हासिल किए हैं।
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पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल ने 720 में से 715 अंक हासिल कर ऑल इंडिया टॉप किया।
वहीं आर्यन कोटा कोचिंग से डिस्टेंस लर्निंग से जुड़े थे, तो पांशुल ने कोटा कोचिंग के दिल्ली सेंटर पर रेगुलर क्लासरूम स्टूडेंट के रूप में दो साल पढ़ाई की है।
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कोटा में नीट रिजल्ट को लेकर उत्साह का माहौल है। कोचिंग संस्थानों के बाहर स्टूडेंट्स इकट्ठा हो रहे हैं और जश्न की तैयारी है।
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नवादा (बिहार) के वरीसालीगंज गांव के रहने वाले आयुष बालोटिया की चौथी रैंक आई है। आयुष ने कोटा में रहकर नीट की तैयारी की है। पिता सुनील कुमार का बिजनेस है। आयुष के 10वीं में 96.2% और 12वीं में 93.8 प्रतिशत नंबर आए थे। आयुष के परिवार और पूरे गांव में खुशी का माहौल है।
आयुष ने बताया कि बचपन से ही मेरा सपना डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करने का था। नियमित पढ़ाई, नीट की गहन तैयारी, लगातार रिवीजन और रेगुलर टेस्ट मेरी सफलता की सबसे बड़ी वजह रहे।
हर टेस्ट के बाद अपनी गलतियों का विश्लेषण करना और उन्हें सुधारना बेहद जरूरी है। मैं 6 से 7 घंटे सेल्फ स्टडी करता थे। सुबह के समय पढ़ाई को ज्यादा समय दिया। खुद को रिलेक्स करने के लिए मोबाइल भी चलाता था।
मोबाइल पर यूटयूब शॉट्र्स (वीडियो) देखना पंसद है। आयुष ने बताया कि जब नीट रद्द हुई, उस समय स्कोर 695 बन रहा था। इस बार नंबर और बढ़ गए। पेपर रद्द हुआ तो टेंशन नहीं थी, क्योंकि तैयारी पूरी थी।
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अलवर के रहने वाले गौरव सिंह ने नौवीं रैंक हासिल की है। गौरव के पिता राजेश कुमार आर्मी में हैं। कोटा में रेगुलर क्लासरूम स्टूडेंट गौरव ने बताया कि मां सीमा देवी मेरे और बहन के साथ कोटा में रहकर हमारी पढ़ाई का पूरा ध्यान रखती थीं।
उन्होंने हर परिस्थिति में हमारा हौसला बढ़ाया। नीट की तैयारी के दौरान मैंने डेली क्लास अटेंड की। एनसीईआरटी की बुक्स को कई बार पढ़ा। कंटीन्यू रिवीजन किया और टेस्ट को पूरी गंभीरता से दिया। स्मार्टफोन यूज करता था, लेकिन उसका मिसयूज नहीं करता था। क्लासरूम के अलावा 7-8 घंटे सेल्फ स्टडी करता था। टीचर्स ने जो बताया, जो गाइड किया मैंने वैसे ही किया।
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कोटा के रहने वाले कार्तिक ने ऑल इंडिया 16वीं रैंक हासिल की है। कार्तिक ने बताया कि मैं रात को पढ़ाई को प्राथमिकता देता था। सेल्फ स्टडी के लिए रात 9:30-10 बजे से सुबह चार से पांच बजे पढ़ता था।
दोपहर में कोचिंग के बाद शाम को पावर नेप (ब्रेक) लेता और फिर रात को पढ़ाई का वही शेडयूल रहता। मेरे पिता इंजीनियर हैं। उन्होंने भी कोटा में ही इंजीनियरिंग की तैयारी और पढ़ाई की थी।
मैं खुद को रिलेक्स करने के लिए फुटबॉल खेलता था।
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पेपर लीक के बाद सरकार ने NEET में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। 2027 से NEET-UG कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) यानी ऑनलाइन मोड में आयोजित की जाएगी। फिलहाल परीक्षा ऑफलाइन (पेन-एंड-पेपर) मोड में होती है।
नई व्यवस्था में स्टूडेंट्स कंप्यूटर पर सवाल हल करेंगे। हालांकि, सिलेबस, प्रश्नों की संख्या, विषय और मार्किंग स्कीम में कोई बदलाव नहीं होगा। स्टूडेंट्स को ऑनलाइन परीक्षा के लिए पहले से मॉक टेस्ट और डेमो की सुविधा भी दी जाएगी, ताकि वे नए सिस्टम के अनुसार तैयारी कर सकें।
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पेपर लीक के आरोपों के कारण 3 मई को हुई NEET-UG 2026 रद्द हो गई थी। इसके बाद NTA ने 21 जून को दोबारा परीक्षा कराई। परीक्षा ऑफलाइन (पेन-एंड-पेपर) मोड में आयोजित की गई थी। परीक्षा 13 भाषाओं में हुई, जिसमें देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ विदेशों के स्टूडेंट्स ने भी हिस्सा लिया।
इस साल परीक्षा देश और विदेश के 551 शहरों में बने 5,440 परीक्षा केंद्रों पर कराई गई। राजस्थान के 25 शहरों में इस परीक्षा का आयोजन किया गया था। 577 केंद्रों पर परीक्षा का आयोजन किया गया था।
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