राजस्थान में मातृ स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल, 19 प्रसूताओं की मौत, जांच समितियों की निष्क्रियता का खुलासा
राजस्थान में गर्भवती महिलाओं की स्थिति बिगड़ने के मामले सामने आने के बाद चिकित्सा विभाग में हड़कंप मच गया है. कोटा, बीकानेर, जोधपुर, भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में संक्रमण, किडनी फेलियर, रक्तस्राव और अन्य जटिलताओं से कम से कम 19 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है. सरकारी अस्पतालों में मरीजों के इलाज की कमी और जांच समितियों की धीमी प्रतिक्रिया के कारण मातृ स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं.

सौजन्य से:- ETV Bharat
Maternal Death : कोटा से भीलवाड़ा तक 19 मौतें, मंत्री बोले- आखिर हमारे पास इलाज करवाने क्यों आते हैं ?
राजस्थान में पिछले कुछ महीनों के दौरान सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौतों ने मातृ स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
Published : July 13, 2026 at 3:13 PM IST
जयपुर: कोटा, बीकानेर, जोधपुर, भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में सामने आए मामलों में अब तक 19 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है. सभी मामलों में चिकित्सा विभाग ने जांच समितियां गठित की, लेकिन जांच रिपोर्ट आज तक किसी मामले की सामने नहीं आई. सिर्फ कुछ चिकित्सकों और अन्य अस्पताल स्टाफ पर कार्रवाई कर विभाग ने इतिश्री कर ली. सबसे बड़ा मामला कोटा का रहा, जहां संक्रमण और किडनी फेलियर के बाद कई प्रसूताओं की मौत हुई.
वहीं, भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में कुछ ही दिनों के भीतर एक के बाद एक मौतों ने स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े कर दिए. बीकानेर में सिजेरियन डिलीवरी के बाद पांच महिलाओं की किडनी प्रभावित होने का मामला सामने आया है, जबकि जोधपुर में प्रसव के बाद रक्तस्राव और अन्य जटिलताओं से दो महिलाओं की मौत हुई है.
कोटा में सबसे गंभीर मामला, 12 संक्रमित महिलाओं में 5 की मौत : कोटा के जेके लोन और न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मई महीने में सिजेरियन प्रसव के बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया था. कुल 12 महिलाओं को संक्रमित माना गया, जिनमें चार प्रसूताओं और एक गर्भवती महिला की मौत हो चुकी है. मृतकों में पायल, ज्योति, प्रिया, पिंकी महावर और शिरीन शामिल हैं.
इस मामले में सरकार ने कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की, जिसमें डॉ. श्रद्धा उपाध्याय बर्खास्त, डॉ. नवनीत शर्मा निलंबित, नर्सिंगकर्मी गुरजीत कौर और निमेष वर्मा निलंबित, डॉ. बीएल पाटीदार और डॉ. नेहरा सीहरा को नोटिस, डॉ. बद्रीलाल और डॉ. खुशबू मीणा निलंबित,नर्सिंग अधिकारी पिंकी खींची और मीनाक्षी मीणा निलंबित, जेके लोन अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा और न्यू मेडिकल कॉलेज अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. प्रमुख स्वास्थ्य सचिव गायत्री राठौड़ ने स्वयं कोटा पहुंच कर पूरे मामले की समीक्षा की थी. चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने भी अस्पताल का दौरा किया था.
बीकानेर में 3 मौतें : संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद पांच प्रसूताओं की किडनी प्रभावित होने का मामला सामने आने से चिकित्सा विभाग में हड़कंप मच गया. सभी महिलाओं की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया. मरीजों की स्थिति को देखते हुए कई महिलाओं का डायलिसिस भी शुरू किया गया, लेकिन इलाज के दौरान तीन प्रसूताओं ने दम तोड़ दिया. मामले की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सा विभाग ने जांच शुरू की, आखिर प्रसव के बाद एक साथ कई महिलाओं की किडनी प्रभावित होने के क्या कारण रहे.
जोधपुर प्रसव के बाद दो महिलाओं की मौत : जोधपुर के पावटा अस्पताल में प्रसव के बाद आठ प्रसुताओं का स्वास्थ्य बिगड़ने का मामला सामने आया. हांलाकि, इस दौरान किसी भी प्रसूता की मौत नहीं हुई और कुछ समय बाद सभी प्रसूताओं की तबियत में सुधार आने लगा, लेकिन इसी बीच जोधपुर जिले के राजकीय उपजिला अस्पताल भोपालगढ़ में प्रसव के लिए आई पांच दिन में दो प्रसूताओं की मौत होने का मामला सामने आने के बाद चिकित्सा विभाग में हड़कंप मच गया. दोनों की हालत बिगड़ने के बाद उन्हें उम्मेद अस्पताल रेफर किया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया. इस घटना के बाद हरकत में आए चिकित्सा विभाग ने कार्रवाई करते हुए एक महिला चिकित्सक और एक नर्सिंग अधिकारी को एपीओ कर दिया है. साथ ही दो गायनेकोलॉजिस्ट को शामिल करते हुए एक जांच कमेटी भी गठित की गई.
भीलवाड़ा में छह दिन में पांच प्रसूताओं की मौत : भीलवाड़ा जिले के महात्मा गांधी अस्पताल के मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में 5 जुलाई से 10 जुलाई के बीच 6 दिनों में पांच प्रसूताओं की मौत का मामला सामने आया, जिसके बाद चिकित्सा विभाग ने मामले की जांच के आदेश दिए, चिकित्सा एंव स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने कहा कि ऑपरेशन थिएटर (ओटी) से नमूने एकत्र करने के बाद ही हम यह बता पाएंगे कि किसी प्रकार का संक्रमण था या नहीं.
साथ ही उपकरणों, पूरे ओटी प्रोटोकॉल और इस्तेमाल की गई दवाओं का भी आकलन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि कोटा में भी हमने प्रत्येक प्रसूता के मामले का विस्तृत विश्लेषण किया था, ताकि उनकी केस हिस्ट्री को समझा जा सके. उन्होंने कहा कि आमतौर पर जहां बड़े टर्शियरी चिकित्सा केंद्र होते हैं वहां हाई-रिस्क वाली प्रसूताओं की संख्या अधिक होती है. ऐसे मामलों में प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव, बहुत अधिक रक्तचाप या गंभीर एनीमिया जैसी जटिलताओं की आशंका रहती है.
बांसवाड़ा चार दिन में चार मौतें : जिले के सबसे बड़े महात्मा गांधी अस्पताल के मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र में चार दिनों के भीतर चार प्रसूताओं की मौत होने से चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए. जिला प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के लिए पांच वरिष्ठ डॉक्टरों की विशेष समिति गठित कर दी. वहीं, जयपुर से भी विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम को जांच के लिए भेजा गया. प्रशासन का कहना है कि चार मौतों के अलग-अलग मामलों की विस्तृत जांच कराई जा रही है. जानकारी के अनुसार दो मरीज पहले से ही गंभीर स्थिति में थीं, जबकि दो मामलों में ऑपरेशन के बाद अचानक स्वास्थ्य बिगड़ गया.
प्रदेशभर में एक जैसी तस्वीर :
- अधिकांश मौतें प्रसव या सिजेरियन के बाद हुईं.
- कई मामलों में अचानक किडनी फेलियर, संक्रमण, अत्यधिक रक्तस्राव या अन्य गंभीर जटिलताएं सामने आईं.
- लगभग हर जिले में जांच समितियां गठित की गई हैं.
- कई चिकित्सकों और नर्सिंग अधिकारियों पर कार्रवाई हुई हैं.
- राज्य सरकार विशेषज्ञ टीमों के माध्यम से प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच करा रही है.
जांच रिपोर्ट का इंतजार : कोटा में प्रसूताओं की मौत के मामलों की जांच के लिए गठित हाईलेवल कमेटी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर को सौंप दी है, लेकिन विभाग ने आज तक रिपोर्ट साझा नहीं की कि आखिर कोटा में प्रसूताओं की मौत के क्या कारण रहे. उस समय चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा था कि रिपोर्ट को लेकर चिकित्सा विशेषज्ञों से चर्चा की जाएगी. मंत्री ने यह भी कहा था कि कोटा और बीकानेर की घटना अलग है. सभी मौतों का कोई एक समान कारण नहीं था, बल्कि प्रत्येक मामले में अलग-अलग चिकित्सकीय परिस्थितियां और जटिलताएं सामने आई. रिपोर्ट को कोटा, एसएमएस मेडिकल कॉलेज तथा एम्स की जांच कमेटियों से प्राप्त तथ्यों के आधार पर तैयार किया गया था.
ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन अमानक : कोटा में प्रसूताओं की मौत के मामले के बाद जांच के लिए उठाए गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के सैंपल अमानक पाए गए थे. खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण आयुक्तालय ने इस संबंध में अलर्ट नोटिस जारी किया था और प्रदेशभर के अस्पतालों, मेडिकल स्टोर्स और दवा वितरकों को संबंधित बैच की बिक्री और उपयोग तत्काल रोकने के निर्देश दिए थे. लैब जांच में खुलासा हुआ कि ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन बाजार में बेचा जा रहा था. उसमें ऑक्सीटोसिन तत्व ही मौजूद नहीं था. यह इंजेक्शन अमृतसर स्थित M/S जैक्शन लैबोरेट्रीज द्वारा निर्मित किया जा रहा था, जिसके बाद इस निर्माता कम्पनी का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया था.
हमारे पास इलाज के लिए क्यों आते हैं ? : पूरे मामले पर प्रदेश के चिकित्सा और स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर का कहना है कि आखिर लोग हमारे पास इलाज के लिए क्यों आते हैं, क्योंकि जब निजी अस्पताल हाथ खड़े कर देते हैं, तब लोग सरकारी अस्पताल में आते है और प्रसूताओं की मौत के मामले में अधिकतर केस काफी गंभीर थे. खींवसर ने कहा कि राज्य सरकार मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है. वर्तमान सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में मातृ मृत्यु दर (MMR) में कमी दर्ज की गई है.
संस्थागत प्रसव का प्रतिशत बढ़कर 94.1 प्रतिशत तक पहुँच गया है, जो राष्ट्रीय औसत से लगभग 4 प्रतिशत अधिक है. उन्होंने कहा कि भीलवाड़ा एवं बांसवाड़ा में हाल ही में हुई प्रसूताओं की मृत्यु के मामलों को निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुरूप जांच एवं समीक्षा कराई जा रही है. अब तक की जांच एवं उपलब्ध तथ्यों में चिकित्सकीय लापरवाही का कोई स्पष्ट तथ्य सामने नहीं आया है. यदि किसी स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही अथवा प्रोटोकॉल के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी.
पढ़ें : Bikaner PBM Hospital : सिजेरियन प्रसव के बाद प्रसूता की मौत, पहले ही हो चुकी थी नवजात की मृत्यु
उन्होंने कहा कि सिजेरियन प्रसव सहित प्रत्येक जटिल प्रसूति मामले में चिकित्सक स्थापित चिकित्सा मानकों एवं प्रोटोकॉल के अनुरूप निर्णय लेते हैं. मरीज एवं नवजात दोनों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है और चिकित्सा दल प्रत्येक मामले में सर्वोत्तम संभव उपचार उपलब्ध कराने का प्रयास करता है.
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