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राजस्थानी लोकसंगीत के प्रहरी 'राजस्थान रत्न' केसी मालू नहीं रहे, संस्कृति जगत को अपूरणीय क्षति

राजस्थानी लोकसंगीत के प्रहरी 'राजस्थान रत्न' केसी मालू नहीं रहे, संस्कृति जगत को अपूरणीय क्षति राजस्थानी संगीत को नए आयाम देने वाले के. सी. मालू दुनिया को अलविदा कह गए. Published : July 14, 2026 at 3:53 PM IST जयपुर : रा…

ETV Bharat के अनुसार14 जुलाई 2026 को 11:03 am बजे
राजस्थानी लोकसंगीत के प्रहरी 'राजस्थान रत्न' केसी मालू नहीं रहे, संस्कृति जगत को अपूरणीय क्षति

सौजन्य से:- ETV Bharat

राजस्थानी लोकसंगीत के प्रहरी 'राजस्थान रत्न' केसी मालू नहीं रहे, संस्कृति जगत को अपूरणीय क्षति

राजस्थानी संगीत को नए आयाम देने वाले के. सी. मालू दुनिया को अलविदा कह गए.

Published : July 14, 2026 at 3:53 PM IST

जयपुर : राजस्थानी लोकसंगीत को देश-दुनिया तक पहुंचाने वाले प्रसिद्ध उद्योगपति, वीणा कैसेट्स के संस्थापक और 'राजस्थान रत्न' से सम्मानित केसरी चंद (केसी) मालू का सोमवार देर रात हृदय गति रुकने से निधन हो गया. उनके निधन से राजस्थान के कला, संस्कृति और लोकसंगीत जगत में शोक की लहर है. वे 80 वर्ष के थे. उनकी अंतिम यात्रा पुरानी चुंगी, अजमेर रोड स्थित उनके निवास से रवाना हुई. उनके निधन पर सीएम भजनलाल शर्मा, डिप्टी सीएम दीया कुमारी, पूर्व सीएम अशोक गहलोत सहित कई नेताओं और मंत्रियों ने शोक व्यक्त किया है.

केसी मालू का निधन केवल एक सफल उद्यमी का जाना नहीं है, बल्कि उस व्यक्तित्व का अवसान है, जिसने राजस्थानी लोकधुनों, लोकगाथाओं और लोक कलाकारों को नई पहचान दिलाने का ऐतिहासिक कार्य किया. राजस्थान की सांस्कृतिक स्मृति को संरक्षित करने और उसे आधुनिक तकनीक के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने में उनका योगदान अविस्मरणीय माना जाता है.

राजस्थानी लोक संगीत और संस्कृति को नई पहचान दिलाने में अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित करने वाले, वीणा कैसेट्स के संस्थापक एवं 'राजस्थान रत्न' से सम्मानित आदरणीय श्री केसरी चंद मालू जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है।

— Bhajanlal Sharma (@BhajanlalBjp) July 14, 2026

राजस्थान की समृद्ध लोक परंपराओं, गीत-संगीत और सांस्कृतिक विरासत…

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गांव की चौपाल से दुनिया तक पहुंचाया लोक संगीत : जब राजस्थानी लोकगीत गांवों की चौपालों, खेत-खलिहानों, विवाह समारोहों और मेलों तक सीमित थे, तब केसी मालू ने वीणा कैसेट्स के माध्यम से उन्हें रिकॉर्ड कर घर-घर और देश-विदेश तक पहुंचाया. उस दौर में कैसेट संस्कृति ने राजस्थान के लोकसंगीत को नई पहचान दी. बन्ना-बन्नी के विवाह गीत, पनिहारी गीत, मांड, तेजाजी, पाबूजी, रामदेवजी की लोक गाथाएं और मरुधरा की सांस्कृतिक धरोहर पहली बार बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंची.

राजस्थानी लोकसंगीत को देश-विदेश तक पहुंचाने में अतुलनीय योगदान देने वाले, प्रसिद्ध उद्योगपति, वीणा कैसेट्स के संस्थापक तथा 'राजस्थान रत्न' से सम्मानित आदरणीय श्री केसरी चंद मालू जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है।

— Diya Kumari (@KumariDiya) July 14, 2026

मालू जी ने अपने अथक प्रयासों से राजस्थानी लोकगीतों को एक नई… pic.twitter.com/U4encDzbIf

केसी मालू ने अपने जीवन में हजारों लोकगीतों, भजनों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की रिकॉर्डिंग करवाई. उन्होंने अनेक ऐसे लोक कलाकारों को अवसर दिया, जिनकी प्रतिभा गांवों और कस्बों तक सीमित थी. वीणा कैसेट्स के माध्यम से इन कलाकारों की आवाज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंची. लोकसंगीत को उन्होंने केवल व्यावसायिक उत्पाद नहीं बनाया, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर के रूप में संरक्षित और लोकप्रिय बनाया.

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तकनीक को बनाया संस्कृति संरक्षण का माध्यम : केसी मालू उस पीढ़ी के प्रतिनिधि थे, जिसने तकनीक को केवल व्यापार का जरिया नहीं, बल्कि संस्कृति के संरक्षण का सशक्त साधन बनाया. चुंबकीय कैसेटों में राजस्थान की लोक परंपराओं, गीतों और संगीत को सहेजकर उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य सांस्कृतिक विरासत तैयार की. उनकी सोच ने यह साबित किया कि आधुनिक तकनीक का उपयोग लोकसंस्कृति को जीवित रखने के लिए भी किया जा सकता है.

वीणा कैसेट्स के संस्थापक, ‘राजस्थान रत्न’ से सम्मानित श्री केसरी चंद मालू जी के परलोक गमन की सूचना पाकर गहरा दुख हुआ। राजस्थानी लोक संगीत के संरक्षण और संवर्धन में उनका अमूल्य योगदान रहा है, जो सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। ईश्वर दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा… pic.twitter.com/vhFzQiKBng

— Gajendra Singh Shekhawat (@gssjodhpur) July 14, 2026

राजस्थानी भाषा आंदोलन से भी जुड़े रहे : वर्ष 1946 में चूरू जिले के सुजानगढ़ में जन्मे केसी मालू ने अपना पूरा जीवन राजस्थानी भाषा, लोक संगीत और लोक कलाकारों के संरक्षण को समर्पित किया. वे राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के आंदोलन से भी लंबे समय तक सक्रिय रूप से जुड़े रहे और भाषा के सम्मान के लिए लगातार प्रयास करते रहे. केसी मालू के निधन पर साहित्य, कला, संगीत, उद्योग और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया है. सभी ने उनके योगदान को राजस्थान की सांस्कृतिक चेतना का अमूल्य अध्याय बताते हुए कहा कि उनका जाना कला और लोकसंगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति है.

देश-दुनिया में राजस्थानी गानों को एक नई पहचान दिलाने वाले, वीणा कैसेट्स के मालिक और सुर संगम के संस्थापक, मेरे पारिवारिक मित्र श्री के सी मालू का आकस्मिक निधन बेहद दुखद है।

— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) July 14, 2026

पिछले सप्ताह ही 49, सिविल लाइंस आवास पर मेरी उनसे मुलाकात और लम्बी बातचीत हुई थी। उन्होंने अपना पूरा जीवन… pic.twitter.com/QcTnIlYJ4Z

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अकाल राहत के लिए जुटाए थे एक करोड़ रुपए : उनके पैतृक गांव सुजानगढ़ के रहने वाले संपत लाल जैन ने बताया कि साल 1987 में राजस्थान में पड़े भीषण अकाल के दौरान केसी मालू ने जयपुर में ऐतिहासिक 'लता मंगेशकर नाइट' का आयोजन कराया. इस कार्यक्रम के माध्यम से उस समय लगभग एक करोड़ रुपए की राशि राहत कार्यों के लिए जुटाई गई थी. यह आयोजन आज भी राजस्थान के सांस्कृतिक और सामाजिक इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में गिना जाता है. राजस्थानी लोक संगीत और संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें 'राजस्थान रत्न' सम्मान से अलंकृत किया गया. उनके प्रयासों से राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नई प्रतिष्ठा मिली.

सीएम ने जताया दुख : सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने लिखा है कि राजस्थानी लोक संगीत और संस्कृति को नई पहचान दिलाने में अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित करने वाले, वीणा कैसेट्स के संस्थापक और 'राजस्थान रत्न' से सम्मानित केसरी चंद मालू के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है. राजस्थान की समृद्ध लोक परंपराओं, गीत-संगीत और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ ही संवर्धन में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा. उनका जाना कला और संस्कृति जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है. ईश्वर दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें और शोकाकुल परिजनों एवं उनके शुभचिंतकों को यह असीम दुःख सहन करने की शक्ति दें.

बहुत ही दुःखद समाचार 🙏 #Rajasthan

— Vinod Bhojak (@VinoBhojak) July 14, 2026

चूरू जिले के #सुजानगढ़ कस्बे से निकलकर राजस्थानी लोक #गीतों को देश - विदेशों व #राजस्थान की मिट्टी में कण बिखेरने वाले #केशरीचंद मालू का हुआ निधन...!!

KC मालू जी ने वीणा कैसेट के जरिए ‘घूमर’, ‘चीरमी’, और ‘कांगसियो’ जैसे कई सदाबहार… pic.twitter.com/bD36OjyL4D

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केसरीचंद मालू का निधन बड़ी क्षति : सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर विनोद भोजक ने लिखा कि 'चूरू जिले के सुजानगढ़ कस्बे से निकलकर राजस्थानी लोक गीतों को देश-विदेशों और राजस्थान की मिट्टी में कण बिखेरने वाले केसरीचंद मालू का निधन बड़ी क्षति है. मालू जी ने वीणा कैसेट के जरिए 'घूमर', 'चीरमी' और 'कांगसियो' जैसे कई सदाबहार राजस्थानी गीतों के एलबम प्रोड्यूस करके अपनी अलग पहचान बनाई.'

शेखावत ने भी व्यक्त किया शोक : केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने श्रद्धांजलि देते हुए एक्स पर लिखा है कि वीणा कैसेट्स के संस्थापक, 'राजस्थान रत्न' से सम्मानित केसरी चंद मालू के परलोक गमन की सूचना पाकर गहरा दुख हुआ. राजस्थानी लोक संगीत के संरक्षण और संवर्धन में उनका अमूल्य योगदान रहा है, जो सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा. ईश्वर दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोक संतप्त परिजनों को यह दुःख सहन करने का संबल प्रदान करें.

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पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जताया शोक : सोशल मीडिया X पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि 'देश-दुनिया में राजस्थानी गानों को एक नई पहचान दिलाने वाले, वीणा कैसेट्स के मालिक और सुर संगम के संस्थापक, मेरे पारिवारिक मित्र के सी मालू का आकस्मिक निधन बेहद दुखद है. पिछले सप्ताह ही 49, सिविल लाइंस आवास पर मेरी उनसे मुलाकात और लम्बी बातचीत हुई थी. उन्होंने अपना पूरा जीवन संगीत जगत के लिए समर्पित किया. उनका निधन हम सबके लिए एक बड़ी क्षति है. ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों को यह अपार दुख सहने की शक्ति दें.'

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