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राजस्थान: क्रॉस वोटिंग और फ्लोर मैनेजमेंट पर जांच का इंतजार, वेणुगोपाल के निर्देश के बाद भी कमेटी नहीं बनी

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Amar Ujala के अनुसार1 अक्टूबर 2026 को 11:04 am बजे
राजस्थान: क्रॉस वोटिंग और फ्लोर मैनेजमेंट पर जांच का इंतजार, वेणुगोपाल के निर्देश के बाद भी कमेटी नहीं बनी

सौजन्य से:- Amar Ujala

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राजस्थान: क्रॉस वोटिंग और फ्लोर मैनेजमेंट पर जांच का इंतजार, वेणुगोपाल के निर्देश के बाद भी कमेटी नहीं बनी

Thu, 01 Oct 2026 03:22 PM IST

तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी

Updated Thu, 01 Oct 2026 03:22 PM IST

सार

राजस्थान निकाय चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद क्रॉस वोटिंग और फ्लोर मैनेजमेंट की शिकायतों की जांच के लिए प्रस्तावित कमेटी 11 दिन बाद भी गठित नहीं हो सकी है। केसी वेणुगोपाल ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को दो दिन में कमेटी बनाने के निर्देश दिए थे।

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विस्तार

जयपुर नगर निकाय चुनाव में करारी हार के बाद राजस्थान कांग्रेस में क्रास वोटिंग और खराब फ्लोर मैनेजमेंट की जांच 11 दिन बीत जाने के बाद भी शुरू नहीं हो सकी है। राष्ट्रीय संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल ने अपने जयपुर दौरे के दौरान प्रदेश कांग्रेस समिति अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को दो दिन में जांच कमेटी गठित करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अब तक जांच कमेटी का गठन नहीं हो पाया है।

कमेटी न बनने से स्थानीय नेताओं की भूमिका और क्रास वोटिंग के दावों की औपचारिक जांच अटकी हुई है। बिना कमेटी के स्थानीय स्तर पर हुई गड़बड़ियों और संगठनात्मक कमियों की जवाबदेही तय होना कठिन नजर आ रहा है।

जांच प्रक्रिया में देरी

निकाय चुनाव के नतीजों ने प्रदेश कांग्रेस के भीतर कई सवाल खड़े किए हैं। प्रदेश कांग्रेस समिति अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ मतदान, सिंबल वितरण में देरी और पार्टी लाइन का पालन न करने की शिकायतों पर विभिन्न जिलों से रिपोर्ट मांगी है। प्रदेश कांग्रेस ने भीलवाड़ा, बाड़मेर, धौलपुर, पाली, बीकानेर और अजमेर समेत कई जिलों के स्थानीय नेतृत्व से रिपोर्ट तलब की है। हालांकि, जांच कमेटी के गठन में हो रही देरी से यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि संबंधित पार्षदों और स्थानीय नेताओं पर कार्रवाई कब तक होगी। जब तक कमेटी गठित होकर अपनी रिपोर्ट पेश नहीं करती, तब तक फ्लोर मैनेजमेंट में रही कमियों की वास्तविक स्थिति सामने आना कठिन दिखाई दे रहा है।

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पाली और जोधपुर में उलटफेर

निकाय चुनाव में सबसे बड़ा उलटफेर पाली नगर निगम में देखने को मिला, जहां कांग्रेस स्पष्ट बढ़त में होने के बावजूद हार गई। पाली नगर निगम में कांग्रेस के पास 29 पार्षद थे और वह सबसे बड़ी पार्टी थी। वहीं भाजपा के पास 21 और निर्दलीयों के पास 15 पार्षद थे। इसके बावजूद महापौर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी नमिता बुबकिया को 33 वोट हासिल हुए और वे विजयी रहीं। कांग्रेस की बागी प्रत्याशी राजबाला हिंगड़ ने 29 वोट प्राप्त किए, जबकि कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी को केवल तीन वोट ही मिले। इस परिणाम ने पार्टी के भीतर गंभीर क्रास वोटिंग की पोल खोल दी।

दूसरी ओर, जोधपुर नगर निगम में भी कांग्रेस का फ्लोर मैनेजमेंट पूरी तरह नाकाम साबित हुआ। जोधपुर नगर निगम में भाजपा ने 45 और कांग्रेस ने 44 वार्डों में जीत हासिल की थी। इनके अलावा एक आरएलपी पार्षद और 11 निर्दलीय पार्षद भी चुनाव जीतकर आए थे। महापौर पद के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी प्रसन्नचंद मेहता को 53 वोट मिले और वे विजयी रहे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी केवल 47 वोट ही हासिल कर सके। संख्याबल पास होने की उम्मीद के बावजूद जोधपुर में कांग्रेस अपने पक्ष में निर्दलीयों को एकजुट रखने में असफल रही।

अजमेर और अलवर के आंकड़े

अजमेर नगर निगम में भी आंकड़ों ने कांग्रेस के दावों पर सवाल खड़े किए हैं। अजमेर में कांग्रेस 37 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, जबकि भाजपा के खाते में 32 सीटें आई थीं। कांग्रेस ने चुनाव में निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का दावा किया था। इसके बावजूद महापौर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी अनामिका शर्मा ने 43 वोट हासिल करके चुनाव जीता, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी किरण गड़वाल को महज 37 वोट ही मिले। चुनाव नतीजों के बाद अजमेर में भी क्रास वोटिंग की आशंका जताई जा रही है।

ये भी पढ़ें- राजस्थान: छात्रवृत्ति और स्कूटी योजनाओं के आवेदन शुरू, 30 नवंबर तक मौका; जन आधार जरूरी

इसी तरह, अलवर नगर निगम में भी स्थिति संभल नहीं सकी। अलवर में महापौर चुनाव के दौरान भाजपा प्रत्याशी ने 42 वोट हासिल किए, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को केवल 23 वोट ही मिल पाए। विभिन्न जिलों के आंकड़ों से साफ है कि स्थानीय स्तर पर समन्वय की भारी कमी रही, जिसकी जांच का इंतजार जारी है।

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कमेटी न बनने से स्थानीय नेताओं की भूमिका और क्रास वोटिंग के दावों की औपचारिक जांच अटकी हुई है। बिना कमेटी के स्थानीय स्तर पर हुई गड़बड़ियों और संगठनात्मक कमियों की जवाबदेही तय होना कठिन नजर आ रहा है।

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जांच प्रक्रिया में देरी

निकाय चुनाव के नतीजों ने प्रदेश कांग्रेस के भीतर कई सवाल खड़े किए हैं। प्रदेश कांग्रेस समिति अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ मतदान, सिंबल वितरण में देरी और पार्टी लाइन का पालन न करने की शिकायतों पर विभिन्न जिलों से रिपोर्ट मांगी है। प्रदेश कांग्रेस ने भीलवाड़ा, बाड़मेर, धौलपुर, पाली, बीकानेर और अजमेर समेत कई जिलों के स्थानीय नेतृत्व से रिपोर्ट तलब की है। हालांकि, जांच कमेटी के गठन में हो रही देरी से यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि संबंधित पार्षदों और स्थानीय नेताओं पर कार्रवाई कब तक होगी। जब तक कमेटी गठित होकर अपनी रिपोर्ट पेश नहीं करती, तब तक फ्लोर मैनेजमेंट में रही कमियों की वास्तविक स्थिति सामने आना कठिन दिखाई दे रहा है।

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पाली और जोधपुर में उलटफेर

निकाय चुनाव में सबसे बड़ा उलटफेर पाली नगर निगम में देखने को मिला, जहां कांग्रेस स्पष्ट बढ़त में होने के बावजूद हार गई। पाली नगर निगम में कांग्रेस के पास 29 पार्षद थे और वह सबसे बड़ी पार्टी थी। वहीं भाजपा के पास 21 और निर्दलीयों के पास 15 पार्षद थे। इसके बावजूद महापौर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी नमिता बुबकिया को 33 वोट हासिल हुए और वे विजयी रहीं। कांग्रेस की बागी प्रत्याशी राजबाला हिंगड़ ने 29 वोट प्राप्त किए, जबकि कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी को केवल तीन वोट ही मिले। इस परिणाम ने पार्टी के भीतर गंभीर क्रास वोटिंग की पोल खोल दी।

दूसरी ओर, जोधपुर नगर निगम में भी कांग्रेस का फ्लोर मैनेजमेंट पूरी तरह नाकाम साबित हुआ। जोधपुर नगर निगम में भाजपा ने 45 और कांग्रेस ने 44 वार्डों में जीत हासिल की थी। इनके अलावा एक आरएलपी पार्षद और 11 निर्दलीय पार्षद भी चुनाव जीतकर आए थे। महापौर पद के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी प्रसन्नचंद मेहता को 53 वोट मिले और वे विजयी रहे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी केवल 47 वोट ही हासिल कर सके। संख्याबल पास होने की उम्मीद के बावजूद जोधपुर में कांग्रेस अपने पक्ष में निर्दलीयों को एकजुट रखने में असफल रही।

अजमेर और अलवर के आंकड़े

अजमेर नगर निगम में भी आंकड़ों ने कांग्रेस के दावों पर सवाल खड़े किए हैं। अजमेर में कांग्रेस 37 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, जबकि भाजपा के खाते में 32 सीटें आई थीं। कांग्रेस ने चुनाव में निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का दावा किया था। इसके बावजूद महापौर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी अनामिका शर्मा ने 43 वोट हासिल करके चुनाव जीता, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी किरण गड़वाल को महज 37 वोट ही मिले। चुनाव नतीजों के बाद अजमेर में भी क्रास वोटिंग की आशंका जताई जा रही है।

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इसी तरह, अलवर नगर निगम में भी स्थिति संभल नहीं सकी। अलवर में महापौर चुनाव के दौरान भाजपा प्रत्याशी ने 42 वोट हासिल किए, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को केवल 23 वोट ही मिल पाए। विभिन्न जिलों के आंकड़ों से साफ है कि स्थानीय स्तर पर समन्वय की भारी कमी रही, जिसकी जांच का इंतजार जारी है।

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