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Juice Jacking: मोबाइल चार्ज करते ही खाली हो सकता है बैंक खाता, पब्लिक USB पोर्ट बना साइबर ठगों का नया हथियार

Juice Jacking: मोबाइल चार्ज करते ही खाली हो सकता है बैंक खाता, पब्लिक USB पोर्ट बना साइबर ठगों का नया हथियार एक्सपर्ट बोले-पब्लिक जगहों पर सिर्फ अपना चार्जर और पावर बैंक इस्तेमाल करें Published : October 1, 2026 at 4:13…

ETV Bharat के अनुसार1 अक्टूबर 2026 को 11:04 am बजे
Juice Jacking: मोबाइल चार्ज करते ही खाली हो सकता है बैंक खाता, पब्लिक USB पोर्ट बना साइबर ठगों का नया हथियार

सौजन्य से:- ETV Bharat

Juice Jacking: मोबाइल चार्ज करते ही खाली हो सकता है बैंक खाता, पब्लिक USB पोर्ट बना साइबर ठगों का नया हथियार

एक्सपर्ट बोले-पब्लिक जगहों पर सिर्फ अपना चार्जर और पावर बैंक इस्तेमाल करें

Published : October 1, 2026 at 4:13 PM IST

जयपुर: भागदौड़ भरी जिंदगी में जब मोबाइल की स्क्रीन पर बैटरी लो होने का मैसेज दिखता है तो हर कोई उसे चार्ज करने के लिए दौड़ पड़ता है. ऐसे में अगर चार्जर पास न हो तो हर कोई जुगाड़ करके सबसे पहले मोबाइल चार्ज करने की सोचता है. कई बार ऐसी स्थिति में रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट या कैफे जैसी सार्वजनिक जगहों पर लगे फ्री यूएसबी चार्जिंग पोर्ट्स का इस्तेमाल करना पड़ जाता है, जो बहुत महंगा पड़ सकता है. साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक जगहों पर लगे अनजान यूएसबी चार्जिंग पोर्ट्स आपके मोबाइल के डेटा के लिए खतरा बन सकते हैं.

हिडन मालवेयर के जरिए सुरक्षा में सेंध: राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम विंग के एडीजी वीके सिंह का कहना है कि सार्वजनिक जगहों पर लगे अनजान यूएसबी पोर्ट्स से मोबाइल चार्ज करना भारी भूल साबित हो सकती है. कई बार ऐसे यूएसबी चार्जिंग पोर्ट्स मोबाइल के डेटा के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं. साइबर अपराधी इन पोर्ट्स के जरिए मोबाइल में हिडन मालवेयर ट्रांसफर कर मोबाइल की सुरक्षा में सेंध लगा सकते हैं. इस मालवेयर के जरिए मोबाइल में मौजूद निजी और गोपनीय जानकारी चोरी कर साइबर अपराधी किसी बड़ी साइबर फ्रॉड की वारदात को अंजाम दे सकते हैं. तकनीकी भाषा में इसे जूस जैकिंग (Juice Jacking) कहा जाता है.

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सतर्कता और सावधानी ही बड़ी सुरक्षा. एडीजी वीके सिंह का कहना है कि आज के डिजिटल दौर में सतर्कता और सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है. साइबर अपराधी हर समय मोबाइल में सेंध लगाने की फिराक में रहते हैं. जैसे ही उन्हें मौका मिलता है, वे मोबाइल में सेंधमारी कर निजी और गोपनीय जानकारी चुरा लेते हैं. इसके बाद साइबर अपराध का ऐसा जाल बुना जाता है, जिसमें लोग अनजाने में ही फंस जाते हैं और अपनी मेहनत की कमाई से हाथ धो बैठते हैं. ऐसे मामलों में साइबर अपराधी मोबाइल में मौजूद निजी और गोपनीय जानकारी का इस्तेमाल साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम देने के लिए कर सकते हैं. मालवेयर की मदद से मोबाइल को हैक भी किया जा सकता है. इसके बाद मोबाइल का कंट्रोल साइबर अपराधियों के हाथ में चला जाता है और वे बड़ी आसानी से साइबर ठगी की वारदात को अंजाम दे सकते हैं.

सावधानी रखकर जूस जैकिंग (Juice Jacking) से बच सकते हैं.

- जहां तक हो सके, मोबाइल चार्ज करने के लिए अपना खुद का चार्जर, एडॉप्टर या पावर बैंक इस्तेमाल करें.

- कभी मजबूरी में किसी और के यूएसबी पोर्ट का इस्तेमाल करना पड़े तो डेटा ब्लॉकर (Data Blocker) का विकल्प चुनें.

- मोबाइल को किसी कंप्यूटर से चार्ज करते समय स्क्रीन पर 'Trust This Computer' का मैसेज आए तो 'Don't Trust' का विकल्प चुनें.

- यह सुनिश्चित कर लें कि चार्जिंग पॉइंट से कोई अतिरिक्त केबल न जुड़ी हो.

- यूएसबी पोर्ट के अंदर या आसपास कोई संदिग्ध डिवाइस कनेक्ट न हो, इसका ध्यान रखें.

- चार्जिंग के दौरान इस पर नजर रखें और देखें कि बैकग्राउंड में कोई फाइल तो रन नहीं हो रही है.

- डिजिटल दुनिया में साइबर अपराध से बचाव के लिए सावधानी और सतर्कता ही सबसे कारगर उपाय है.

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साइबर ठगी का शिकार होने पर तत्काल दें शिकायत: राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम विंग ने आमजन से अपील की गई है कि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी होने या इसका अंदेशा होने पर तत्काल शिकायत दर्ज करवानी चाहिए. ठगी के मामलों में शुरुआती एक घंटे का समय गोल्डन पीरियड होता है. इस दौरान एक्शन लेने से ठगी की रकम होल्ड करवाना आसान होता है. ऐसे में साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर या पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करवा सकते हैं. अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर पुलिस स्टेशन से भी संपर्क कर सकते हैं. वॉट्सऐप हेल्पलाइन 9256001930 और 9257510100 पर कॉल कर भी मदद ली जा सकती है.

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