मूंग के दाने जितने छोटे लड्डू गोपाल! उदयपुर के स्वर्ण शिल्पी ने बनाई अद्भुत सूक्ष्म कलाकृति
मूंग के दाने जितने छोटे लड्डू गोपाल! उदयपुर के स्वर्ण शिल्पी ने बनाई अद्भुत सूक्ष्म कलाकृति डॉ. इक़बाल सक्का ने जन्माष्टमी पर चांदी और तांबे से 1 मिलीमीटर की श्रीकृष्ण और कालिया नाग की अद्भुत सूक्ष्म कलाकृति बनाई है. Pub…

सौजन्य से:- ETV Bharat
मूंग के दाने जितने छोटे लड्डू गोपाल! उदयपुर के स्वर्ण शिल्पी ने बनाई अद्भुत सूक्ष्म कलाकृति
डॉ. इक़बाल सक्का ने जन्माष्टमी पर चांदी और तांबे से 1 मिलीमीटर की श्रीकृष्ण और कालिया नाग की अद्भुत सूक्ष्म कलाकृति बनाई है.
Published : September 2, 2026 at 3:01 PM IST
उदयपुर: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर उदयपुर के स्वर्ण शिल्पी डॉ. इकबाल सक्का ने भगवान श्रीकृष्ण की जन्म कथा से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रसंग को बेहद सूक्ष्म कलाकृति के रूप में साकार किया है. चांदी और तांबे से तैयार इस कलाकृति में वासुदेव द्वारा नन्हे श्रीकृष्ण को टोकरी में लेकर यमुना पार करने का दृश्य दिखाया गया है.
बेहद सूक्ष्म है कलाकृति: डॉ. सक्का के अनुसार, इतनी सूक्ष्मता के साथ इस तरह की कलाकृति पहले कभी नहीं बनाई गई है. उन्होंने बताया कि इस कलाकृति को तैयार करने के लिए एक पात्र को कलात्मक तरीके से यमुना नदी का स्वरूप दिया गया है. इसमें पानी भरकर नदी का दृश्य बनाया गया है. यमुना के बीच तांबे से निर्मित पंचमुखी नाग देवता के फन के नीचे वासुदेव को दिखाया गया है. वासुदेव अपने सिर पर चांदी की एक छोटी सी टोकरी लेकर चल रहे हैं, जिसमें नवजात लड्डू गोपाल को नींद की मुद्रा में विराजमान किया गया है.
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आकृति महज 1 मिलीमीटर की: इस कलाकृति की सबसे खास बात इसमें बनाई गई आकृतियों का आकार है. डॉ. सक्का के अनुसार, कालिया नाग और वासुदेव की आकृति करीब 1-1 सेंटीमीटर, टोकरी करीब 2 मिलीमीटर और लड्डू गोपाल की आकृति महज 1 मिलीमीटर की है. लड्डू गोपाल को मूंग के दाने के बराबर आकार में तैयार किया गया है. चांदी की टोकरी को मखमल से सजाया गया है. डॉ. सक्का ने बताया कि इस सूक्ष्म कलाकृति को तैयार करने में करीब 56 घंटे का समय लगा. बेहद छोटे आकार के कारण लड्डू गोपाल की आकृति को सामान्य आंखों से देखना मुश्किल है. लेंस की सहायता से देखने पर भगवान कृष्ण की आकृति स्पष्ट दिखाई देती है.
जन्माष्टमी पर लोग देख सकेंगे: जन्माष्टमी पर इस कलाकृति को उनके आवास पर प्रदर्शित किया जाएगा. इसके बाद उदयपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे दूध तलाई, मोती मगरी, सहेलियों की बाड़ी और फतेहसागर सहित अन्य स्थानों पर भी इसे पर्यटकों और आम लोगों के दर्शन के लिए ले जाया जाएगा. कलाकृति की बारीकी देखकर पर्यटक भी हैरान नजर आए. डॉ. सक्का ने बताया कि इस रचना के जरिए धार्मिक आस्था के साथ कौमी एकता और भाईचारे का संदेश देने का प्रयास किया गया है.
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