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निकाय चुनाव 2026: अजमेर और सिरोही में टिकट न मिलने से बीजेपी में बगावत, नाराज नेताओं ने निर्दलीय ठोकी ताल

निकाय चुनाव 2026: अजमेर और सिरोही में टिकट न मिलने से बीजेपी में बगावत, नाराज नेताओं ने निर्दलीय ठोकी ताल टिकट वितरण से नाराज अजमेर और आबूरोड के कुछ भाजपा नेताओं व महिला मोर्चा पदाधिकारियों ने इस्तीफा देकर निर्दलीय चुनाव…

ETV Bharat के अनुसार1 सितंबर 2026 को 01:33 pm बजे
निकाय चुनाव 2026: अजमेर और सिरोही में टिकट न मिलने से बीजेपी में बगावत, नाराज नेताओं ने निर्दलीय ठोकी ताल

सौजन्य से:- ETV Bharat

निकाय चुनाव 2026: अजमेर और सिरोही में टिकट न मिलने से बीजेपी में बगावत, नाराज नेताओं ने निर्दलीय ठोकी ताल

टिकट वितरण से नाराज अजमेर और आबूरोड के कुछ भाजपा नेताओं व महिला मोर्चा पदाधिकारियों ने इस्तीफा देकर निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया है.

Published : September 1, 2026 at 6:03 PM IST

अजमेर/सिरोही: शहर के दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को बड़ा झटका लगा है. चार सक्रिय नेताओं ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर अपने-अपने वार्ड से निर्दलीय चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है. भाजपा छोड़ चुके चारों नेताओं ने सोमवार को अपना नामांकन दाखिल कर दिया है. वहीं अभी भी भाजपा के कई अन्य नेता बागी तेवर दिखाते हुए निर्दलीय नामांकन दाखिल कर चुके हैं. अजमेर में उत्तर विधानसभा क्षेत्र के बाद अब दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में भी भाजपा को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. भाजपा छोड़ने वाले चारों नेताओं ने प्रेस वार्ता कर पार्टी छोड़ने का कारण स्पष्ट किया.

भाजपा के पूर्व पार्षद अरुण शर्मा, भाजपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष एवं पूर्व मंडल अध्यक्ष रहे घीसू गढ़वाल, पूर्व पार्षद और पार्टी के विभिन्न पदों का दायित्व निभा चुके रंजन शर्मा और भाजपा के ओबीसी प्रकोष्ठ में सक्रिय रहे अशोक सोनी ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. ये सभी नेता अपने-अपने वार्ड से चुनाव मैदान में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उतरे हैं.

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चारों नेताओं ने यह स्पष्ट किया कि उनकी नाराजगी भाजपा या भाजपा की विचारधारा से नहीं है. उनकी नाराजगी दक्षिण क्षेत्र से भाजपा की विधायक अनीता भदेल से है. उनका कहना है कि कई वर्षों से पार्टी के लिए वे क्षेत्र में काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें सम्मान नहीं मिला. पार्टी के कार्यक्रमों में उन्हें आमंत्रित न करके लगातार अपमानित किया जाता रहा है. लंबे समय से सक्रिय होने के बावजूद भी भाजपा से टिकट नहीं मिलने से वे आहत हैं. यही वजह है कि अब चारों ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में ताल ठोक दी है.

स्वाभिमान के लिए छोड़ी भाजपा: भाजपा के पूर्व पदाधिकारी रंजन शर्मा ने बताया कि वे व्यक्ति विशेष की हठधर्मिता के खिलाफ अपने स्वाभिमान की लड़ाई लड़ रहे हैं. भाजपा की विचारधारा और रीति-नीति में उनका पूर्ण विश्वास है, लेकिन व्यक्ति विशेष की हठधर्मिता और उनका विचार व व्यवहार कार्यकर्ताओं के प्रति अनुकूल नहीं है, इसलिए अपने स्वाभिमान को बचाते हुए वे लिखित में पार्टी के शहर अध्यक्ष को इस्तीफा भेज रहे हैं. शर्मा ने कहा कि यदि वे सभी चुनाव जीतते हैं और निश्चित रूप से भाजपा उन्हें याद करेगी, तो उनका समर्थन पार्टी के साथ ही रहेगा. उन्होंने यह भी कहा कि मान-सम्मान पर यदि किसी ने कुठाराघात किया, तो ऐसा करने वाले को वे कोर्ट का दरवाजा भी दिखाएंगे. वे पेशे से वकील भी हैं.

भाजपा महिला मोर्चे की पूर्व अध्यक्ष के भी बागी तेवर: भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व अध्यक्ष सुनीता गोस्वामी ने भी टिकट नहीं मिलने से आहत होकर वार्ड नंबर 52 से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ताल ठोकी है. ऐसे अनेक नाम हैं जो निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल कर चुके हैं. 3 अगस्त को नामांकन वापसी की अंतिम तिथि है. इसके बाद चुनावी स्थिति और भी स्पष्ट हो जाएगी.

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सिरोही में महिला मोर्चा की जिला मंत्री का इस्तीफा: सिरोही जिले के आबूरोड नगरपालिका चुनाव 2026 में भाजपा की अधिकृत प्रत्याशी सूची जारी होने के बाद पार्टी के भीतर टिकट वितरण को लेकर विरोध के स्वर खुलकर सामने आने लगे हैं. भाजपा महिला मोर्चा की जिला मंत्री स्वीटी शर्मा ने 31 अगस्त को अपने पद से इस्तीफा देते हुए टिकट वितरण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने अपना इस्तीफा प्रदेश अध्यक्ष को भेजा है, जिसमें वार्ड नंबर 20 से टिकट नहीं मिलने को लेकर नाराजगी जाहिर की गई है.

स्वीटी शर्मा ने अपने इस्तीफे में कहा कि उन्होंने वार्ड 20 से पार्षद पद के लिए पार्टी से टिकट मांगा था और एक निष्ठावान कार्यकर्ता के रूप में पार्टी के लिए समर्पण के साथ काम किया. उनका आरोप है कि वार्ड 20 का टिकट कांग्रेस पार्षद की पत्नी को दिया गया, जबकि उनके अनुसार संबंधित महिला भाजपा की प्राथमिक सदस्य तक नहीं थीं और उन्होंने टिकट के लिए कोई साक्षात्कार भी नहीं दिया था. इसके बावजूद उन्हें भाजपा की ओर से टिकट दिया गया और स्वीटी शर्मा का टिकट काट दिया गया.

स्वीटी शर्मा ने इसे केवल अपने साथ हुआ अन्याय न बताते हुए पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी का मुद्दा बताया. उन्होंने कहा कि वर्षों से पार्टी के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं की इज्जत और सम्मान सुरक्षित नहीं रहता, तो केवल भीड़ का हिस्सा बने रहना उन्हें उचित नहीं लगता. इसी नाराजगी के चलते उन्होंने महिला मोर्चा जिला मंत्री पद से इस्तीफा देने की बात कही है.

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