राजस्थान हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति वाले बहू के वेतन का 25 % सास को देने का आदेश दिया
राजस्थान उच्च न्यायालय ने अनुकंपा नियुक्ति के तहत प्राप्त वेतन का एक चौथाई हिस्सा सास के खाते में जमा करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही दिवंगत कर्मचारी के अंतिम सेवा लाभों को बहू और सास के बीच बराबर बांटने का आदेश जारी किया गया।

सौजन्य से:- Amar Ujala
{"_id":"6ab3eef22f02bf72c000b408","slug":"rajasthan-hc-25-of-daughter-in-law-s-salary-to-go-to-mother-in-law-service-benefits-to-be-shared-equally-2026-09-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला: अनुकंपा नियुक्ति के बाद की दूसरी शादी, अब वेतन से सास को देना होगा चौथाई हिस्सा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला: अनुकंपा नियुक्ति के बाद की दूसरी शादी, अब वेतन से सास को देना होगा चौथाई हिस्सा
Wed, 23 Sep 2026 08:53 PM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Wed, 23 Sep 2026 08:53 PM IST
सार
अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने बहू के वेतन का 25 प्रतिशत हिस्सा सास के खाते में जमा कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने दिवंगत कर्मचारी के अंतिम सेवा लाभों को भी सास और बहू के बीच बराबर बांटने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
विस्तार
राजस्थान उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में निर्देश दिया है कि पति की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति पाने वाली बहू के मासिक वेतन में से 25 प्रतिशत राशि उसकी सास के बैंक खाते में जमा की जाए। न्यायालय ने अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड को इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी किए हैं। यह व्यवस्था सास के जीवित रहने तक लागू रहेगी। इसके साथ ही दिवंगत कर्मचारी के सभी सेवा संबंधी अंतिम लाभों को भी दोनों पक्षों में बराबर बांटने के निर्देश दिए गए हैं।
विज्ञापन
नौकरी मिलने के बाद ससुराल छोड़ा
मामले के अनुसार अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड में टेक्निकल हेल्पर के पद पर कार्यरत कर्मचारी की मार्च 2017 में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद सास-ससुर से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करके बहू को अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। नौकरी पाने के दौरान बहू ने परिवार के अन्य सदस्यों की देखरेख और भरण-पोषण करने का शपथ पत्र जमा किया था। हालांकि नौकरी मिलने के कुछ समय बाद ही बहू ने ससुराल छोड़ दिया और दूसरी शादी कर ली। साथ ही उसने बुजुर्ग सास-ससुर को आर्थिक सहारा देना बंद कर दिया। इस पर वर्ष 2018 में पीड़ित सास-ससुर ने याचिका दायर की थी। याचिका पर सुनवाई के दौरान ही ससुर की मृत्यु भी हो गई।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: पेंशनर्स की शिकायतें सुनने बैठे मुख्य सचिव, 13 को मौके पर मिले PPO; 356 लंबित मामले भी निपटाए
विज्ञापन
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आनंद शर्मा की एकलपीठ ने अपने फैसले में कहा कि अनुकंपा नियुक्ति कोई व्यक्तिगत अधिकार या विशेषाधिकार नहीं है, बल्कि यह एक कल्याणकारी उपाय है। अदालत ने स्पष्ट माना कि परिवार का भरण-पोषण करने का शपथ पत्र ही इस नियुक्ति का मुख्य आधार था। इस कल्याणकारी योजना का लाभ उठाने के बाद अपने मूल दायित्व से पीछे हट जाना अनुकंपा नियुक्ति योजना की मूल भावना और आत्मा का सीधा उल्लंघन है।
नहीं मानीं बहू की दलीलें
सुनवाई के दौरान बहू की ओर से दलील दी गई कि उसने दुर्व्यवहार के कारण अपना ससुराल छोड़ा था। उसने कहा कि सास के दो अन्य बेटे भी हैं, जो उनका भरण-पोषण कर सकते हैं। बहू का यह भी कहना था कि उसे मिल रहा वेतन उसके पति की सेवा के बदले प्राप्त रोजगार का परिणाम है, इसलिए इसे उसका व्यक्तिगत वेतन माना जाए। उसने सेवा लाभों में हिस्सा साझा करने के लिए बाध्य न किए जाने की मांग की थी। हालांकि अदालत ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया।
वेतन कटौती और लाभों का बंटवारा
उच्च न्यायालय ने अजमेर विद्युत वितरण निगम लि. को निर्देश दिया कि वह बहू के मासिक वेतन में से 25 प्रतिशत राशि की कटौती कर सीधे सास के बैंक खाते में जमा कराए। इसके अलावा दिवंगत कर्मचारी के सभी सेवा संबंधी अंतिम लाभों को 30 दिनों में जारी करने के आदेश दिए गए। न्यायालय ने इन लाभों को भी सास और बहू के बीच बराबर-बराबर बांटने का निर्देश दिया।
Powered by Reporting Rajasthan Files
संबंधित ख़बरें

Widow gets job after husband's death; Rajasthan HC orders 25% salary to mother-in-law

वाटिका ग्रुप: सुकून भरी जिंदगी का नया पता ‘जयपुर 21’ - Jaipur News

2020 Kia Seltos 1353 cc कार जयपुर में ₹9.45 लाख में - CarDekho


