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विदेशी पर्यटक बनाम घरेलू पर्यटक : सीकर ने जयपुर को पीछे छोड़ा, जानिए कैसे बदल रहा राजस्थान का पर्यटन मॉडल

विदेशी पर्यटक बनाम घरेलू पर्यटक : सीकर ने जयपुर को पीछे छोड़ा, जानिए कैसे बदल रहा राजस्थान का पर्यटन मॉडल राजस्थान के पर्यटन कारोबार का मॉडल धीरे-धीरे तब्दील हो रहा है. पढ़िए अश्वनि पारीक की रिपोर्ट... Published : Septem…

etvbharat.com के अनुसार23 सितंबर 2026 को 09:05 am बजे
विदेशी पर्यटक बनाम घरेलू पर्यटक : सीकर ने जयपुर को पीछे छोड़ा, जानिए कैसे बदल रहा राजस्थान का पर्यटन मॉडल

सौजन्य से:- etvbharat.com

विदेशी पर्यटक बनाम घरेलू पर्यटक : सीकर ने जयपुर को पीछे छोड़ा, जानिए कैसे बदल रहा राजस्थान का पर्यटन मॉडल

राजस्थान के पर्यटन कारोबार का मॉडल धीरे-धीरे तब्दील हो रहा है. पढ़िए अश्वनि पारीक की रिपोर्ट...

Published : September 23, 2026 at 2:02 PM IST

जयपुर : राजस्थान का पर्यटन मॉडल अब कुछ बड़े शहर और बड़े स्मारक वाली सोच से आगे बढ़कर पूरे प्रदेश में कई तरह के तजुर्बे और कई तरह के पर्यटक की दिशा में बढ़ रहा है. दुनियाभर के हालात विदेशी पर्यटन पर असर डाल रहे हैं, लेकिन घरेलू बाजार राजस्थान को अपने ही देश के विशाल पर्यटन बाजार से जोड़ता है. यही वजह है कि सरकार और पर्यटन उद्योग अब नए डेस्टिनेशन, नए सर्किट, वेडिंग, ग्रामीण, वाइल्डलाइफ, वेलनेस, फिल्म और अनुभव आधारित पर्यटन पर एक साथ काम कर रहे हैं.

राजस्थान की पहचान अरसे से विदेशी पर्यटकों के पसंदीदा डेस्टिनेशन के तौर पर रही है. जयपुर के किले और महल, उदयपुर की झीलें, जोधपुर का मेहरानगढ़, जैसलमेर का रेगिस्तान और पुष्कर जैसे धार्मिक-सांस्कृतिक केंद्र विदेशी पावणों को रिझाने का काम करते रहे हैं, लेकिन अब राजस्थान के पर्यटन कारोबार का मॉडल धीरे-धीरे तब्दील हो रहा है. अमेरिकन टैरिफ, रूस-यूक्रेन युद्ध और खाड़ी क्षेत्र में तनाव जैसी मुश्किलों के बीच अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है.

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इसके साथ महंगे हवाई सफर और विदेश यात्रा की बढ़ती लागत ने भी पर्यटन उद्योग की रणनीति पर असर डाला है. ऐसे वक्त में राजस्थान की नजर अब घरेलू पर्यटक बाजार पर है. जयपुर में आयोजित राजस्थान डोमेस्टिक ट्रैवल मार्ट यानी RDTM के छठे संस्करण में पर्यटन कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों, होटल व्यवसायियों, ट्रैवल एजेंट्स और सरकारी अधिकारियों की चर्चा में यही बदलाव प्रमुखता से सामने आया. सवाल सिर्फ यह नहीं है कि विदेशी पर्यटकों की जगह घरेलू पर्यटक कितने आ रहे हैं, बल्कि यह है कि घरेलू पर्यटन ने राजस्थान के पूरे टूरिज्म बिजनेस मॉडल को किस तरह बदलना शुरू किया है.

विदेशी पर्यटकों के मुकाबले घरेलू पर्यटकों का आकार कितना बड़ा ? : कोरोना काल के असर के बाद राजस्थान में देसी विदेशी सैलानियों की आवक के आंकड़े राजस्थान सरकार के मुताबिक पूरी तरह से घरेलू पर्यटक पर टिक गए. साल 2023 में प्रदेश में करीब 17.90 करोड़ घरेलू और 17 लाख विदेशी सैलानी आए थे. साल 2024 के आंकड़े बताते हैं कि 20 लाख 72 हजार विदेशी सैलानियों के मुकाबले देसी सैलानियों की संख्या 23 करोड़ से ज्यादा रही थी.

अब तक 10.92 करोड़ पर्यटक आए : इसी तरह 2025 में घरेलू पर्यटकों की संख्या बढ़कर करीब 25.25 करोड़ और विदेशी पर्यटकों की संख्या करीब 19.45 लाख रही, यानी संख्या के लिहाज से राजस्थान के पर्यटन बाजार में घरेलू पर्यटक पहले से ही बहुत बड़ा आधार हैं. 2026 में जून तक उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में करीब 10.85 करोड़ घरेलू और 8.45 लाख विदेशी पर्यटक पहुंचे. एक अन्य सरकारी अपडेट में जनवरी से जून 2026 के बीच कुल 10.92 करोड़ पर्यटकों के आने की जानकारी दी गई है.

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विदेशी पर्यटक क्यों महत्वपूर्ण रहे हैं ? : राजस्थान के लिए विदेशी पर्यटक हमेशा से अहम रहे हैं. इसका कारण सिर्फ उनकी तादाद नहीं, बल्कि उनका व्यवहार भी है. विदेशी सैलानी आमतौर पर राजस्थान में कई दिनों तक ठहरने वाले टूर पैकेज लेते हैं. वे होटल, हेरिटेज प्रॉपर्टी, गाइड, कैब, लोक कला, हस्तशिल्प और स्थानीय बाजारों पर खर्च करते हैं. एक विदेशी पर्यटक का खर्च कई अलग-अलग पर्यटन सेवाओं तक पहुंचता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय पर्यटन की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि वह वैश्विक परिस्थितियों से जल्दी प्रभावित होता है. युद्ध, राजनीतिक तनाव, आर्थिक संकट, एयर फेयर, वीजा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय यात्रा की लागत जैसे कई कारक इस बाजार को प्रभावित करते हैं. यही वजह है कि राजस्थान अब केवल विदेशी पर्यटकों पर निर्भर रहने के बजाय घरेलू बाजार को मजबूत करना चाहता है.

घरेलू पर्यटक क्यों बन गया है लाइफलाइन ? : फेडरेशन ऑफ हॉस्पिटैलिटी एंड टूरिज्म ऑफ राजस्थान (FHTR) के संस्थापक सदस्य खालिद खान के मुताबिक कोरोना महामारी के बाद घरेलू पर्यटन ने पर्यटन उद्योग को संभालने में बड़ी भूमिका निभाई. उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा महंगी हुई है, हवाई किराए बढ़े हैं और दुनिया के कई हिस्सों में तनाव का माहौल है. ऐसे में भारतीय पर्यटक देश के भीतर ही नए डेस्टिनेशन तलाश रहे हैं. घरेलू पर्यटक का महत्व इस वजह से भी बढ़ा है कि वह पूरे साल अलग-अलग मौकों पर यात्रा कर सकता है. धार्मिक यात्रा, वीकेंड ट्रिप, स्कूल-कॉलेज हॉलिडे, फैमिली ट्रिप, शादियां, फेस्टिवल और कॉर्पोरेट इवेंट, इन सभी से घरेलू पर्यटन को मांग मिलती है.

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अब पर्यटन का मतलब सिर्फ किला-महल देखना नहीं : राजस्थान का पारंपरिक पर्यटन मॉडल मुख्य रूप से किले, महल, हवेलियों और ऐतिहासिक स्मारकों के आसपास रहा है. अब इस मॉडल का विस्तार हो रहा है. सरकार और पर्यटन उद्योग घरेलू पर्यटक के लिए अलग-अलग तरह के अनुभव तैयार करने पर जोर दे रहे हैं, जिसमें वेडिंग टूरिज्म, धार्मिक पर्यटन, ग्रामीण और वाइल्डलाइफ पर्यटन के साथ-साथ मेडिकल एडवेंचर फिल्म टूरिज्म का भी स्कोप बढ़ा है यानी अब राजस्थान पर्यटक को केवल 'क्या देखना है' नहीं, बल्कि 'क्या अनुभव करना है' बेचने की दिशा में बढ़ रहा है.

सीकर ने जयपुर को पीछे छोड़ा, बदली पर्यटन की तस्वीर : घरेलू पर्यटन के बढ़ते प्रभाव को जिलावार आंकड़ों से भी समझा जा सकता है. जनवरी से जून 2026 के दौरान सीकर में करीब 1.56 करोड़ घरेलू पर्यटक यात्राएं दर्ज की गईं. जैसलमेर में करीब 1.18 करोड़ और जयपुर में करीब 81.49 लाख घरेलू पर्यटक पहुंचे. चित्तौड़गढ़ में करीब 1.33 करोड़ घरेलू पर्यटक यात्राएं दर्ज की गईं. इस तस्वीर का सबसे अहम पहलू यह है कि घरेलू पर्यटक सिर्फ जयपुर या उदयपुर जैसे बड़े पर्यटन शहरों तक सीमित नहीं हैं. सीकर और चित्तौड़गढ़ में धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन, जैसलमेर में रेगिस्तान, सवाई माधोपुर में वन्यजीव पर्यटन और उदयपुर-सिरोही में प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन घरेलू बाजार को अलग-अलग तरह से आकर्षित कर रहे हैं. इससे राजस्थान के पर्यटन मानचित्र का भी विस्तार हो रहा है.

कितने कारोबार जुड़े हैं ? : पर्यटन विशेषज्ञ संजय कौशिक बताते हैं कि एक पर्यटक राजस्थान आता है तो उसका खर्च सिर्फ होटल तक सीमित नहीं रहता. वह एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन से निकलने के बाद टैक्सी या बस लेता है, होटल में रुकता है, रेस्टोरेंट में खाना खाता है, पर्यटन स्थल पर गाइड लेता है. इसके अलावा स्थानीय बाजार में खरीदारी करता है. हस्तशिल्प, हैंडलूम और जेम्स-ज्वेलरी खरीदता है. कई जगह वह लोक कलाकारों के कार्यक्रमों का हिस्सा बनता है. इस पूरी प्रक्रिया में ड्राइवर, होटल कर्मचारी, गाइड, रेस्टोरेंट, दुकानदार, हस्तशिल्पकार, कलाकार और छोटे कारोबारी तक जुड़े हैं, इसलिए पर्यटन को केवल होटल उद्योग नहीं बल्कि एक पूरा लोकल बिजनेस इकोसिस्टम माना जा रहा है.

उनका कहना है कि तौर तरीकों में बदलाव आने के साथ-साथ सोलो टूरिज्म भी जोर पकड़ रहा है. राजस्थान इसके लिए सबसे मुफीद है. खासतौर पर राजस्थान आने वाली एकल महिला सैलानी बाद में यहां से लौटकर स्थानीय टूरिज्म की ब्रांड एंबेसडर बन जाती है. घरेलू पर्यटक के बढ़ते महत्व ने होटल कारोबार की रणनीति भी बदल दी है. अब होटल और रिसॉर्ट सिर्फ कमरे और भोजन की सुविधा देने के बजाय एंटरटेनमेंट, एडवेंचर एक्टिविटी, लोक संगीत, स्थानीय फूड, वेलनेस और दूसरे अनुभवों को पैकेज का हिस्सा बना रहे हैं.

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जीडीपी में इजाफे का जरिया : राजस्थान की पर्यटन सचिव शुचि त्यागी के मुताबिक आज पर्यटक केवल पारंपरिक पर्यटन स्थलों की यात्रा तक सीमित नहीं रहना चाहता. वह ऑथेंटिक और अनुभव आधारित यात्रा को प्राथमिकता दे रहा है, यानी किसी किले को देखने के साथ वहां की कहानी सुनना, स्थानीय भोजन करना, लोक कलाकारों से मिलना, गांव का अनुभव लेना या स्थानीय हस्तशिल्प को समझना भी पर्यटन उत्पाद बन रहा है. लिहाजा सरकार भी कोशिश कर रही है कि इसे प्रदेश की जीडीपी में इजाफे का जरिया बनाया जाए और 10 फीसदी से ऊपर लेकर जाया जाए.

वेडिंग टूरिज्म ने बदली होटल इंडस्ट्री की सोच : घरेलू पर्यटन का सबसे बड़ा नया सेगमेंट वेडिंग टूरिज्म बनकर उभर रहा है. पचार ग्रुप ऑफ होटल्स के प्रतिनिधि धनंजय सिंह के मुताबिक होटल इंडस्ट्री अब पर्यटकों के साथ-साथ शादियों और उनसे जुड़े आयोजनों को भी बड़े बाजार के रूप में देख रही है. इस बार RDTM में पहली बार वेडिंग प्लानर्स और इवेंट इंडस्ट्री को भी जोड़ा गया.

जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और पुष्कर पहले से ही वेडिंग डेस्टिनेशन हैं. अब कुंभलगढ़, रणथंभौर और रणकपुर जैसे स्थानों को भी इस बाजार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है. पुष्कर में इस साल होटल इन्वेंटरी में करीब 800 से 900 कमरों के इजाफे का उदाहरण भी इस बदलाव को दिखाता है. इसका मतलब है कि पर्यटन का सीजन अब केवल छुट्टियों या मौसम पर निर्भर नहीं रहना चाहता. शादी और इवेंट पूरे साल होटल और स्थानीय कारोबार को मांग दे सकते हैं.

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फिल्म टूरिज्म - राजस्थान में एक और बड़ा बाजार : राजस्थान की लोकेशन फिल्म और वेब प्रोडक्शन के लिए पहले से लोकप्रिय रही हैं. अब इसे व्यवस्थित पर्यटन उत्पाद के तौर पर विकसित करने की कोशिश हो रही है. फिल्म प्रोड्यूसर पदम शेखावत के मुताबिक राजस्थान खुद में एक बड़ा फिल्म कैनवास है. शेखावाटी की हवेलियां, थार के रेगिस्तान और ऐतिहासिक लोकेशन फिल्म निर्माताओं के लिए अलग-अलग तरह के विजुअल उपलब्ध कराते हैं.

फिल्म शूटिंग का फायदा सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री को नहीं मिलता. शूटिंग के दौरान होटल, परिवहन, कैटरिंग, स्थानीय कलाकारों और तकनीकी काम से जुड़े लोगों को भी रोजगार मिलता है. राजस्थान फिल्म पर्यटन प्रोत्साहन नीति-2025 भी इसी दिशा में एक कदम है. सरकार के अनुसार 108 फिल्मों, डॉक्यूमेंट्री और टीवी सीरियल की शूटिंग को अनुमति दी गई है. हालांकि, वह कहते हैं कि अभी सिंगल विंडो सिस्टम को और प्रभावी बनाने की जरूरत है ताकि यहां आने वाली यूनिट्स को फटाफट तरीके से काम निपटाने में आसानी हो.

पश्चिमी राजस्थान से वागड़ तक नए पर्यटन सर्किट : पूर्व IAS ललित के. पवार के मुताबिक राजस्थान में अभी कई ऐसे क्षेत्र हैं, जिन्हें पर्यटन के बड़े नक्शे पर लाने की जरूरत है. डूंगरपुर और बांसवाड़ा का प्राकृतिक पर्यटन, बाड़मेर का रेगिस्तान, शेखावाटी की कला और वास्तुकला और हनुमानगढ़-श्रीगंगानगर का अलग सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व नए पर्यटन सर्किट तैयार करने का आधार बन सकता है. यह रणनीति घरेलू पर्यटक के लिए खासतौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारतीय पर्यटक राजस्थान की बार-बार यात्रा करते हुए हर बार नए अनुभव तलाश सकता है.

घरेलू पर्यटक के सामने नई चुनौती भी : घरेलू बाजार बड़ा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सिर्फ पर्यटकों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त होगा. FHTR के खालिद खान के मुताबिक भारतीय पर्यटक अब हॉस्पिटैलिटी में अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं और हाइजीन भी चाहता है यानी पर्यटन उद्योग के सामने चुनौती अब सिर्फ 'पर्यटक लाना' नहीं बल्कि उसे बेहतर अनुभव देना भी है. स्वच्छता, सड़क और कनेक्टिविटी, डिजिटल सुविधा, सुरक्षा, प्रशिक्षित गाइड, होटल की गुणवत्ता और स्थानीय अनुभवों की विश्वसनीयता ऐसे मुद्दे हैं, जो घरेलू पर्यटन के अगले चरण को प्रभावित कर सकते हैं. इवेंट इंडस्ट्री से जुड़े गुंजन सिंघल ने भी वेडिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए टैक्स से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत बताई. उन्होंने वर्तमान 18 प्रतिशत GST स्लैब का उल्लेख करते हुए इसमें राहत की मांग की.

पर्यटन GDP को दोगुना करने की दिशा : राजस्थान सरकार अब पर्यटन को केवल विरासत संरक्षण या पर्यटक स्थलों के विकास तक सीमित नहीं रखना चाहती. पर्यटन आयुक्त रुक्मणी रियार ने पर्यटन GDP को दोगुना करने का लक्ष्य बताते हुए क्षेत्र-विशिष्ट और अनुभव आधारित पर्यटन उत्पाद विकसित करने पर जोर दिया है. सरकार की योजना पर्यटकों को पारंपरिक पर्यटन सर्किट से आगे नए गंतव्यों तक ले जाने की है. इसके लिए पर्यटन स्थलों पर सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए 5 हजार करोड़ रुपए से अधिक के कार्यों का प्रावधान बताया गया है. राजस्थान पर्यटन इकाई नीति-2024, राजस्थान पर्यटन नीति-2025 और राजस्थान फिल्म पर्यटन प्रोत्साहन नीति-2025 के जरिए भी निवेश और नए पर्यटन उत्पादों को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है.

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RDTM क्यों महत्वपूर्ण है ? : RDTM का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि यह केवल एक प्रदर्शनी नहीं है. यह पर्यटन कारोबार के खरीदार और विक्रेता को एक जगह लाने वाला B2B प्लेटफॉर्म है. इस साल करीब 300 ट्रैवल एजेंट्स और टूर ऑपरेटर्स के साथ राजस्थान की 700 से अधिक प्रॉपर्टीज और टूर कंपनियां इसमें शामिल हुईं. करीब 160 पवेलियंस में पर्यटन उत्पाद प्रदर्शित किए गए और दो दिनों में 21 हजार से अधिक B2B बैठकों का लक्ष्य रखा गया. पहली बार वेडिंग और इवेंट इंडस्ट्री को भी इसमें जोड़ा गया है. इसका सीधा उद्देश्य यही है कि राजस्थान के पर्यटन उत्पादों को देश के अलग-अलग हिस्सों के घरेलू बाजार तक पहुंचाया जाए.

विदेशी से घरेलू बाजारों का संतुलन : राजस्थान के पर्यटन मॉडल में बदलाव को विदेशी पर्यटकों से पूरी तरह दूरी बनाने के रूप में नहीं देखा जा रहा है. असल बदलाव यह है कि अब पर्यटन उद्योग एक ही बाजार पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग बाजारों और अलग-अलग पर्यटन उत्पादों को साथ लेकर चलने की कोशिश कर रहा है. विदेशी पर्यटक राजस्थान के लिए अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग और लंबे अनुभव आधारित पर्यटन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जबकि घरेलू पर्यटक बड़े बाजार, सालभर की मांग और नए पर्यटन सर्किट के विस्तार का आधार बन रहे हैं, इसीलिए राजस्थान की नई पर्यटन रणनीति में एक साथ कई तस्वीरें दिखाई दे रही हैं.

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