प्रदेश में सूखे पर गहलोत की भजनलाल सरकार को चेतावनी, बोले- अभी नहीं जागे तो प्रदेश में हाहाकार मचेगा
प्रदेश में सूखे पर गहलोत की भजनलाल सरकार को चेतावनी, बोले- अभी नहीं जागे तो प्रदेश में हाहाकार मचेगा राजस्थान में कम बारिश से सूखे के हालात पर गहलोत ने चिंता जताते हुए सीएम से तुरंत गिरदावरी और राहत तैयारियों की मांग की…

सौजन्य से:- ETV Bharat
प्रदेश में सूखे पर गहलोत की भजनलाल सरकार को चेतावनी, बोले- अभी नहीं जागे तो प्रदेश में हाहाकार मचेगा
राजस्थान में कम बारिश से सूखे के हालात पर गहलोत ने चिंता जताते हुए सीएम से तुरंत गिरदावरी और राहत तैयारियों की मांग की है.
Published : September 16, 2026 at 5:44 PM IST
जयपुर: प्रदेश में इस बार कम बरसात के चलते पानी के संकट की स्थिति पैदा हो रही है, जिसके चलते फसलों को भी नुकसान होने की संभावना बनी हुई है. प्रदेश में सूखे के हालात को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से तत्काल युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरू करने की मांग की है. गहलोत ने प्रदेश में पानी, रोजगार और चारे के संभावित संकट को लेकर सरकार को आगाह करते हुए कहा कि हालात को गंभीरता से नहीं लिया तो आने वाले समय में ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है.
अभी से होनी चाहिए तैयारी और प्लानिंग: गहलोत ने बुधवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा कि प्रदेश में सूखे के हालात बन चुके हैं. बांधों में पानी नहीं है, फसलें जल रही हैं और कुओं का जलस्तर नीचे जा रहा है. गांवों और परिवारों में इस बात को लेकर चिंता हो रही है कि आगे रबी के सीजन में फसलों का क्या होगा. ऐसे हालात में सरकार को संकट आने का इंतजार करने की बजाय अभी से ही तैयारी और प्लानिंग शुरू कर देनी चाहिए.
लगभग आधा राजस्थान अब सूख रहा है और भाजपा सरकार सो रही है। खेतों में लहलहाती फसलें अब जलने लगी हैं, बांधों का पानी दिन-ब-दिन घट रहा है जिससे जल आपूर्ति का अंतराल बढ़ने लगा है और आने वाले दिनों में पीने का पानी की कमी पड़ने वाली है, फिर भी सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही।… pic.twitter.com/9YFqc9ILcV
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) September 16, 2026
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मनरेगा कानून ग्रामीणों के लिए था काम का अधिकार: पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि तत्कालीन मनमोहन सरकार और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने तब बहुत सोच-समझकर ग्रामीणों को रोजगार देने के लिए मनरेगा कानून बनाकर काम की गारंटी का अधिकार दिया था. तब ग्रामीणों को 100 दिन के रोजगार की गारंटी मिलती थी, अगर काम नहीं मिलता था, तो उन्हें घर बैठे पैसा मिलता था. राजस्थान में जब अकाल और सूखा पड़ता था, तब ग्रामीणों के सामने रोजगार का संकट, पशुओं के लिए चारे का संकट और पीने के पानी की समस्या खड़ी हो जाती थी, लेकिन मनरेगा के आने के बाद सूखे के दौरान ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने में मदद मिली और सूखा व अकाल इतिहास बन गए थे.
सूखे और अकाल को लेकर सरकार की क्या तैयारी: पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने मनरेगा को बंद कर दिया है और एक नई योजना लाकर उसमें 60-40% की हिस्सेदारी कर दी है, अगर राज्य सरकार 40% पैसा नहीं देगी, तो काम ही शुरू नहीं होगा. मनरेगा बंद होने से ग्रामीणों के सामने भी रोजगार का संकट खड़ा हो गया है. गहलोत ने कहा कि सरकार ग्रामीणों को 100 दिन, 150 दिन और 200 दिन रोजगार देने की बात कर रही थी, लेकिन अब वह रोजगार कब मिलेगा. मनुष्यों और पशुओं के लिए पीने के पानी और चारे की व्यवस्था कब होगी. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर समय पर चारे-पानी की व्यवस्था नहीं हुई, तो सूखे और अकाल में इतने मवेशियों की मौत होगी कि कोई कल्पना भी नहीं कर सकता है.
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जल्द गिरदावरी कर किसानों को राहत दे सरकार: गहलोत ने राज्य सरकार से जल्द गिरदावरी की मांग करते हुए कहा कि सरकार को इस मामले में तुरंत कदम उठाते हुए गिरदावरी करवानी चाहिए, ताकि लोगों के सामने फसल खराबे की वास्तविक स्थिति सामने आ सके. गहलोत ने कहा कि जिला कलेक्टरों को भी गिरदावरी के दौरान गांवों की वास्तविक स्थिति और किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखने के निर्देश दिए जाने चाहिए. तुरंत किसानों की गिरदावरी कराकर मुआवजा दिया जाना चाहिए.
अनुभव के आधार पर कर रहा हूं आगाह: पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार को संकट आने से पहले ही तमाम व्यवस्थाएं कर लेनी चाहिए कि पानी कहां से आएगा, किन इलाकों में पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था होगी, पशुओं के लिए चारा कहां से उपलब्ध होगा और ग्रामीणों को रोजगार कहां से दिया जाएगा. गहलोत ने कहा कि "मैं अपने अनुभव के आधार पर सरकार को लगातार आगाह कर रहा हूं कि प्रदेश में सूखे के हालात बनते जा रहे हैं, इसलिए मुख्यमंत्री से भी अपील है कि वे इस मामले को प्राथमिकता पर लें और पूरा एक्शन प्लान तैयार करें, ताकि संभावित संकट का सामना बेहतर तरीके से किया जा सके.
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