राजस्थान की पहली विधानसभा: संविधान की शुरुआत और सामंती व्यवस्था का अंत
राजस्थान विधानसभा के 75 साल पूरे होने पर जानिए प्रदेश की पहली विधानसभा का ऐतिहासिक इतिहास और संविधान की शुरुआत

सौजन्य से:- Navbharat Times
पहले विधानसभा थी राजस्थान की ये इमारत, क्यों बदला ठिकाना? जानिए रोचक तथ्य
Authored by: खुशेंद्र तिवारी|नवभारतटाइम्स.कॉम•
राजस्थान विधानसभा के 75 साल पूरे होने पर आज 15 जुलाई से अमृत महोत्सव शुरू होगा। इसके तहत 1 साल तक चलेंगे कार्यक्रम चलेंगे। इस अवसर पर जानिए प्रदेश की पहली विधानसभा का इतिहास।
1880 में हुआ ता इमारत का निर्माण
इस भव्य इमारत का निर्माण 1880-83 के दौरान महाराजा राम सिंह और माधो सिंह के शासनकाल में हुआ था। मशहूर ब्रिटिश वास्तुकार कर्नल सर सैमुअल स्विंटन जैकब ने इसे वेस्टर्न और राजस्थानी वास्तुकला के बेजोड़ मेल से तैयार किया था। दिलचस्प बात यह है कि इसका नाम जयपुर के आखिरी शासक महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय के नाम पर है, जबकि इसका निर्माण उनसे काफी पहले शुरू हो चुका था।जानिए क्यों ये इमारत बनी सवाई मानसिंह टाउन
उल्लेखनीय है कि 1922 में जयपुर की गद्दी संभाली, तो उन्होंने अपने शासनकाल के दौरान इस इमारत का कायाकल्प और जीर्णोद्धार करवाया। इसके बाद मानसिंह द्वितीय ने यही से अपना शासनकाल चलाया। इसे 'ढूंढाड़ राजपूताना हाईकोर्ट' बनाया, जो बाद में पहली विधानसभा के रूप में भी स्थापित हुई। राजतंत्र से जनतंत्र की गवाह
जब मार्च 1949 में जयपुर रियासत का भारत संघ (वृहद राजस्थान) में विलय हुआ, तब महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय को राजस्थान का पहला 'राजप्रमुख' (उस समय का राज्यपाल) बनाया गया। जब 1952 में लोकतांत्रिक सरकार बनी, तो रियासतकालीन समझौतों के तहत इसी 'टाउन हॉल' को अस्थाई रूप से नई सरकार को विधानसभा चलाने के लिए सौंप दिया गया था। चूंकि आज़ादी और विलय के समय इस इमारत की पहचान 'सवाई मानसिंह टाउन हॉल' के रूप में स्थापित हो चुकी थी, इसलिए जब यह राजस्थान का पहला विधानसभा सदन बना, तब से ही इसका यह ऐतिहासिक नाम बरकरार रहा। ऐसे बनी पहली विधानसभा
ऐसा बताया जाता है कि आजादी के बाद जब राजस्थान की राजधानी तय करने के लिए जब फजल अली आयोग की टीम शहरों का मुआयना करने आई, तो उन्हें इसी टाउन हॉल के ऊपरी गलियारे (कॉरिडोर) में एक टी-पार्टी के लिए आमंत्रित किया गया। वहां से जब कमेटी ने एक तरफ बारिश के बीच 'गढ़ गणेश' के दर्शन किए। दूसरी तरफ गुलाबी शहर की खूबसूरत बसावट देखी, तो वे मंत्रमुग्ध हो गए। यहीं से प्रभावित होकर उन्होंने जयपुर को राजस्थान की राजधानी और इस टाउन हॉल को विधानसभा बनाने का मन बना लिया। झरोखों से विधानसभा की कार्यवाही देखते थे लोग
टाउन हॉल के अंदर बनी दर्शक दीर्घा और ऊपरी मंजिलों पर पारंपरिक राजस्थानी 'झरोखे' बने हुए हैं। शुरुआती दौर में जब विधानसभा की कार्यवाही चलती थी, तो शहर के गणमान्य लोग और जनप्रतिनिधि इन पारंपरिक झरोखों के पीछे बैठकर सदन की बहस और लोकतंत्र के बनते नियमों को लाइव देखा करते थे। 29 मार्च 1952 को यहां हुई ती पहली बैठक
23 फरवरी 1952 को पहली बार राजस्थान विधानसभा का गठन हुआ। 29 मार्च 1952 को इसी टाउन हॉल में पहली बैठक आयोजित की गई। इसी ऐतिहासिक इमारत के भीतर राजस्थान का सबसे क्रांतिकारी कानून— 'राजस्थान भूमि सुधार और जागीर पुनर्ग्रहण अधिनियम, 1952' पास किया गया था, जिसने सदियों पुरानी सामंती व्यवस्था का खात्मा कर दिया था। आखिरी सत्र 6 नवंबर 2000 को हुआ
ऐतिहासिक इमारत में विधानसभा का आखिरी सत्र 6 नवंबर 2000 को आयोजित किया गया था, जिसके बाद साल 2001 में ज्योति नगर स्थित नए आधुनिक विधानसभा भवन में सत्र स्थानांतरित हो गए। वर्तमान में इस शानदार ग्रेड-1 हेरिटेज इमारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर के एक भव्य 'सिटी म्यूजियम' (धरोहर संग्रहालय) में बदलने का काम चल रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियां इसके गौरवशाली अतीत से रूबरू हो सकें। कन्वर्सेशन शुरू करें
Stateकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
Powered by Reporting Rajasthan Files
संबंधित ख़बरें

राजस्थान-आज से फिर एक्टिव होगा मानसून, 18 जिलों में अलर्ट: अलवर और कोटपूतली-बहरोड़ में झमाझम बरसात; अब तक 9 फीसदी कम बारिश - Bikaner News

उदयपुर में सड़क और रोड लाइटें हुई ठीक: कई इलाकों में अब भी गंदगी और झूलते तारों की समस्या, कनिष्ठ अभियंता रवि जैन बने 'स्टार ऑफिसर' - Udaipur News

बारिश पर ब्रेक, अब आंधी और बरसात की संभावना: जोधपुर में मौसम कैसा रहेगा?


