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छह चरणों में हो सकते हैं पंचायत और निकाय चुनाव, राजस्थान हाईकोर्ट के सख्ती के बाद तैयारी तेज

हाई कोर्ट के आदेशों की पालना के लिए निर्वाचन आयोग ने कमर कस ली है। चुनाव कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करना शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि पंचायत और शहरी निकाय चुनाव छह चरणों में होगा। जयपुर: राजस्थान में पंचायत और शहरी…

Navbharat Times के अनुसार18 जुलाई 2026 को 10:55 am बजे
छह चरणों में हो सकते हैं पंचायत और निकाय चुनाव, राजस्थान हाईकोर्ट के सख्ती के बाद तैयारी तेज

सौजन्य से:- Navbharat Times

हाई कोर्ट के आदेशों की पालना के लिए निर्वाचन आयोग ने कमर कस ली है। चुनाव कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करना शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि पंचायत और शहरी निकाय चुनाव छह चरणों में होगा।

जयपुर: राजस्थान में पंचायत और शहरी निकाय चुनाव कराने को लेकर हाई कोर्ट की सख्ती के बाद प्रशासनिक अमला पूरी तरह एक्टिव रहा है। इसके चलते 17 जुलाई को राज्य निर्वाचन आयोग, स्वायत्त शासन विभाग (DLB), पंचायती राज विभाग और ओबीसी (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग में दिनभर बैठकों और चर्चाओं का दौर चला। बताया जा रहा है कि हाई कोर्ट के आदेशों की पालना के लिए निर्वाचन आयोग ने जहां चुनाव कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करना शुरू कर दिया है, वहीं अन्य विभागों के अधिकारी कानूनी पहलुओं को सुलझाने में जुट गए हैं।

25 लाख ओबीसी परिवारों का डेटा कलेक्ट किया जा चुका

अदालती निर्देशों के तहत राज्य में ओबीसी वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को तय करने के लिए सर्वे चल रहा है। शुक्रवार तक करीब 25 लाख ओबीसी परिवारों का डेटा कलेक्ट किया जा चुका है। हालांकि, ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में सरकारी 'राजधरा ऐप' में आ रही तकनीकी दिक्कतों और सर्वर डाउन होने की वजह से सर्वे की रफ्तार धीमी पड़ गई है, जिससे अधिकारी चिंतित हैं।

6 लाख कार्मिको की जरूरत

आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती बड़े पैमाने पर मैनपावर (कर्मचारियों) की व्यवस्था करना है। आंकड़ों के मुताबिक पंचायत चुनाव के लिए करीब 6 लाख कार्मिकों की जरूरत होगी, इनमें 3.20 लाख चुनाव कर्मी और 2.80 लाख सुरक्षा कर्मी शामिल हैं। इसी तरह निकाय चुनाव के लिए करीब 2.40 लाख कर्मचारियों की आवश्यकता होगी।

मध्य प्रदेश सरकार ने ईवीएम मंगवाने को लेकर भी हो रही बात

इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों और सुरक्षाबलों की एक साथ उपलब्धता संभव नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव चार चरणों में और निकाय चुनाव दो चरणों में कराने की रणनीति पर विचार कर रहा है। इसके साथ ही, आयोग ने चुनावों के लिए मध्य प्रदेश सरकार से अतिरिक्त ईवीएम (EVM) मशीनें मंगवाने के लिए पत्राचार भी शुरू कर दिया है।

सरकार और आयोग में खींचतान

मामले में राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह पहले ही हाई कोर्ट में आयोग का रुख साफ कर चुके हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार एससी (SC), एसटी (ST), ओबीसी (OBC) और महिलाओं के आरक्षण की स्थिति स्पष्ट नहीं करती, तब तक चुनाव कराना तकनीकी रूप से मुमकिन नहीं है। यह जानकारी देना और सीटों की लॉटरी निकालना पूरी तरह राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।

इस संबंध में आयोग पंचायती राज और स्वायत्त शासन विभाग को अब तक 6 बार पत्र लिख चुका है, लेकिन सरकार ने हर बार ओबीसी डेटा उपलब्ध न होने का हवाला देकर हाथ खड़े कर दिए हैं। निर्वाचन आयुक्त ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि जैसे ही सरकार उन्हें आरक्षण संबंधी आवश्यक डेटा सौंप देगी, आयोग मात्र दो दिनों में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर देगा और अगले 90 दिनों के भीतर पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न करा ली जाएगी।

लेखक के बारे मेंखुशेंद्र तिवारीखुशेंद्र तिवारी नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर कंटेट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में राजस्थान के लिए कवर करते हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों की राजनीति की खबरें कवर करते हैं। खुशेंद्र तिवारी पत्रकारिता की शुरुआत समाचार पत्र से की। बीते 6 सालों से डिजिटल मीडिया के लिए काम कर रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 15 सालों का अनुभव है। समाचार पत्र में पहले रिपोर्टिंग और बाद में डेस्क पर काम किया। साल 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत । राजस्थान की राजनीति, सामाजिक और अपराध की खबरें कवर करता हैं । डेस्क के साथ-साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है । अभी तक राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर, शिक्षा और कला जैसे विषयों पर काम किया है। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय की है। प्रिंट में काम करने के बाद पिछले छह साल से डिजिटल में नए एक्सपीरियंस के साथ लर्निंग जारी है।

विशेषता: ब्यूरोक्रेसी, पॉलिटिक्ल, आर्ट एंड कल्चर, एजुकेशन और अपराध की खबरों में विशेष दिलचस्पी है। बड़े घटनाक्रमों पर अलग-अलग एंगलों से खबरें लिखना। ओपिनियन लिखना।

पत्रकारिता का अनुभव: पत्रकारिता में कुल 15 सालों का अनुभव है। पत्रकारिता में दिलचस्पी और शुरुआत अखबारों में छोटे- छोटे लेख भेजकर की। इसके बाद इसी क्षेत्र में पोस्ट ग्रेजुएशन कर विधिवत रूप से राजस्थान पत्रिका में फील्ड रिपोर्टिंग की। सबसे पहले आर्ट एंड कल्चर, इसके बाद एजुकेशन की फील्ड में काम किया। \ रिपोर्टिंग के बाद डेस्क के अनुभव को भी समझा।... और पढ़ें

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