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'नकली बॉस' और 'फर्जी नियामक संस्थाओं' की आड़ में बुना जा रहा साइबर ठगी का जाल, एडवाइजरी जारी

'नकली बॉस' और 'फर्जी नियामक संस्थाओं' की आड़ में बुना जा रहा साइबर ठगी का जाल, एडवाइजरी जारी इन दिनों साइबर ठग फर्जी बॉस अथवा फर्जी नियामक संस्था बनकर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं. Published :…

ETV Bharat के अनुसार24 जून 2026 को 04:01 pm बजे
'नकली बॉस' और 'फर्जी नियामक संस्थाओं' की आड़ में बुना जा रहा साइबर ठगी का जाल, एडवाइजरी जारी

सौजन्य से:- ETV Bharat

'नकली बॉस' और 'फर्जी नियामक संस्थाओं' की आड़ में बुना जा रहा साइबर ठगी का जाल, एडवाइजरी जारी

इन दिनों साइबर ठग फर्जी बॉस अथवा फर्जी नियामक संस्था बनकर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं.

Published : June 24, 2026 at 7:44 PM IST

जयपुर: डिजिटल युग में साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों और संस्थानों को निशाना बना रहे हैं. अब साइबर ठग नकली बॉस और फर्जी नियामक संस्थाओं की आड़ में ठगी का नया जाल बुन रहे हैं. राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने आमजन एवं विभिन्न संस्थानों के कर्मचारियों को आगाह करते हुए बताया है कि इन दिनों साइबर ठग फर्जी बॉस (Fake Boss) अथवा फर्जी नियामक संस्था (Fake Regulatory Body) बनकर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की वारदातों को अंजाम देने का प्रयास कर रहे हैं. राजस्थान पुलिस का संदेश है कि सतर्कता ही साइबर सुरक्षा का सबसे बड़ा हथियार है. किसी भी संदिग्ध लिंक, फाइल या वित्तीय निर्देश पर बिना पुष्टि किए भरोसा न करें.

जल्दबाजी में आकर उठा सकते हैं बड़ा नुकसान: एडीजी, साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि साइबर अपराधी अपने आप को किसी वरिष्ठ अधिकारी, कंपनी प्रमुख, बैंकिंग अथवा नियामक संस्था का प्रतिनिधि बताकर ईमेल, वाट्सएप मैसेज या फोन कॉल करते हैं. इसके बाद वे कर्मचारियों, विशेष रूप से वित्त विभाग से जुड़े कार्मिकों पर तत्काल भुगतान या गोपनीय वित्तीय लेन-देन का दबाव बनाते हैं. जल्दबाजी में कोई उनकी बातों में आ जाता है तो बड़ा नुकसान हो सकता है.

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ऐसे हासिल करते हैं जानकारियां: अपराधी पहले किसी ZIP फाइल, संदिग्ध लिंक या सॉफ्टवेयर को डाउनलोड करवाते हैं. जैसे ही संबंधित फाइल खोली जाती है, मालवेयर सिस्टम या वाट्सएप वेब तक पहुंच बनाकर महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कर लेता है. इसके बाद अपराधी अधिकारी के नाम से संदेश भेजकर खातों में धनराशि ट्रांसफर करवाने का प्रयास करते हैं. पढ़ें: साइबर ठगी में फ्रीज बैंक खातों को GRM मॉड्यूल से मिलेगी राहत, अकाउंट होल्डर को नहीं काटने पड़ेंगे चक्कर

इन संकेतों को नजरअंदाज न करें: एडीजी सिंह ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था तत्काल भुगतान, गोपनीय लेन-देन या दबावपूर्ण निर्देश दे रही हो तो सावधान हो जाना चाहिए. अनजान स्रोत से ZIP फाइल या सॉफ्टवेयर भेजा गया हो, संदिग्ध ईमेल आईडी या मोबाइल नंबर का उपयोग किया गया हो अथवा नियामक संस्था के नाम से असामान्य संदेश प्राप्त हो रहे हों, तो भी सतर्क हो जाना चाहिए.

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सुरक्षा के लिए अपनाएं ये उपाय:

- किसी भी भुगतान संबंधी निर्देश की स्वतंत्र रूप से फोन कॉल या व्यक्तिगत संपर्क से पुष्टि अवश्य करें.

- अज्ञात स्रोतों से प्राप्त लिंक, फाइल या सॉफ्टवेयर को कभी डाउनलोड न करें.

- याद रखें कि आरबीआई या अन्य नियामक संस्थाएं वाट्सएप के माध्यम से ZIP फाइल अथवा सॉफ्टवेयर नहीं भेजती हैं.

- वाट्सएप वेब और लिंक्ड डिवाइस की नियमित जांच करें.

- एंटीवायरस एवं सुरक्षा सॉफ्टवेयर को अपडेट रखें.

- वित्तीय लेन-देन में टू-फैक्टर वेरिफिकेशन (Two-Factor Authentication) का उपयोग अनिवार्य रूप से करें.

- संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत करें शिकायत

राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि यदि इस प्रकार की कोई घटना घटित होती है अथवा साइबर ठग धोखाधड़ी का प्रयास करते हैं तो तुरंत निकटतम पुलिस थाने या साइबर पुलिस थाने पर शिकायत करें. साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर भी शिकायत दी करवानी चाहिए. साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी सूचना दी जा सकती है.

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