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सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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जोजरी-बांडी-लूणी नदी प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त:मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनेगा रिवर कमीशन; नदी कॉरिडोर में नए निर्माणों पर रोक
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जोजरी-बांडी-लूणी नदी तंत्र में औद्योगिक प्रदूषण और पर्यावरणीय संरक्षण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को कड़े निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने नदी के संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए तुरंत महत्वपूर्ण कदम उठाने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 7 दिन के भीतर एक इंटीग्रेटेड कोऑर्डिनेशन ग्रुप (एकीकृत समन्वय समूह) गठित करने का आदेश दिया है। साथ ही, राज्य में नदियों के संरक्षण और उनके पुनर्जीवन के लिए स्वतंत्र एवं पर्याप्त अधिकारों वाले 'रिवर कमीशन' या 'रिवर रिजुवेनेशन अथॉरिटी' के गठन का भी निर्देश दिया गया है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ (बेंच) ने कहा- जोजरी-बांडी-लूणी नदी तंत्र के प्रभावी पुनर्जीवन के लिए 'हाई फ्लड लाइन' और 'इकोलॉजिकल बफर जोन' का वैज्ञानिक निर्धारण करना बेहद आवश्यक है। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक चिह्नित नदी कॉरिडोर में किसी भी नए औद्योगिक, व्यावसायिक या आवासीय विकास (निर्माण) की अनुमति नहीं दी जाएगी।
कोर्ट ने 16 आपराधिक मामलों का रिव्यू भी किया
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण से जुड़े मामलों की जांच कर रही एसआईटी (SIT) को भी जांच तेज करने और पूरे मामले की गहराई तक जाने के निर्देश दिए हैं। एसआईटी ने जोधपुर, पाली और बालोतरा जिलों में नदी प्रदूषण से जुड़े 16 आपराधिक मामलों की समीक्षा की है, जिनमें अब तक चार एफआईआर (FIR) दर्ज की जा चुकी हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच केवल अवैध औद्योगिक डिस्चार्ज (कचरा बहाने) तक ही सीमित न रहे, बल्कि इसमें जिम्मेदार अधिकारियों, औद्योगिक इकाइयों और सीईटीपी (CETP) से जुड़े लोगों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की जाए।
कांकाणी रीको एरिया को लेकर जताई चिंता
जोधपुर के कांकाणी में प्रस्तावित रीको (RIICO) औद्योगिक क्षेत्र को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट ने गहरी चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस औद्योगिक क्षेत्र का करीब 12.805 हेक्टेयर हिस्सा 'हाई फ्लड एरिया' (बाढ़ संभावित क्षेत्र) में आता है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि हाई फ्लड लाइन तय होने के बाद ही इस क्षेत्र के लेआउट की दोबारा समीक्षा की जाए।
अवैध खनन पर कार्रवाई और शिकायत के लिए बनेगा डिजिटल प्लेटफॉर्म
इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने नदी तल (रिवर बेड) और फ्लड प्लेन में हो रहे अतिक्रमण व अवैध खनन का सर्वे कर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन की शिकायत दर्ज कराने के लिए एक 'क्यूआर कोड' (QR Code) आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाने का भी आदेश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 22 सितंबर को होगी।
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जोजरी नदी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में इंडस्ट्रियल पॉल्यूशन (औद्योगिक प्रदूषण) और वॉटर सोर्सेज (जल स्रोतों) की बिगड़ती स्थिति पर कड़ा रुख अपनाया है। जोजरी नदी में प्रदूषण से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार से पर्यावरणीय चिंताओं पर विस्तृत जवाब मांगा है। पढ़ें पूरी खबर
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