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राजस्थान के उद्योगों को अलग-अलग कैटेगरी में बांटा: होटल और रिसॉर्ट के नियम भी बदले; आवेदन और मंजूरी की प्रक्रिया आसान होगी - Jaipur News

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Dainik Bhaskar के अनुसार7 अगस्त 2026 को 06:15 pm बजे
राजस्थान के उद्योगों को अलग-अलग कैटेगरी में बांटा:  होटल और रिसॉर्ट के नियम भी बदले; आवेदन और मंजूरी की प्रक्रिया आसान होगी - Jaipur News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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राजस्थान के उद्योगों को अलग-अलग कैटेगरी में बांटा:होटल और रिसॉर्ट के नियम भी बदले; आवेदन और मंजूरी की प्रक्रिया आसान होगी

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राजस्थान के उद्योगों और होटलों को उनके काम और प्रदूषण के आधार पर रेड, ऑरेंज, ग्रीन और ब्ल्यू कैटेगरी में रखा जाएगा। राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने राज्य के उद्योगों के लिए नया वर्गीकरण (श्रेणीकरण) लागू कर दिया है। इससे उद्योगों को पहले से साफ पता रहे

राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सदस्य सचिव कपिल चंद्रवाल ने बताया- पर्यावरण से जुड़े नियम पहले की तरह ही लागू रहेंगे। नए वर्गीकरण का मकसद सिर्फ यह तय करना है कि किस उद्योग को किस कैटेगरी में रखा जाए। ताकि आवेदन और मंजूरी की प्रक्रिया आसान और पारदर्शी बन सके।

पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया होगी आसान

उन्होंने बताया- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की गाइडलाइन के अनुसार राजस्थान में उद्योगों को राहत देने के लिए कई बदलाव किए गए हैं। कुछ उद्योगों की कैटेगरी बदली गई है। इससे उन्हें पहले की तुलना में कम औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। उदाहरण के तौर पर पहले रेड कैटेगरी में आने वाले कुछ उद्योगों को अब ऑरेंज कैटेगरी में रखा गया है। इससे उद्योगों पर नियमों का अनावश्यक बोझ कम होगा। उन्हें कारोबार करने में सहूलियत मिलेगी।

कपिल चंद्रवाल ने कहा- सरकार का उद्देश्य राजस्थान में नए उद्योग लगाना, स्टार्टअप शुरू करना और निवेश को बढ़ावा देना है। इसी को ध्यान में रखते हुए उद्योगों के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाया गया है। राजस्थान के उद्योग देश के दूसरे राज्यों के उद्योगों के साथ बेहतर प्रतिस्पर्धा कर सकें।

होटल और रिसॉर्ट के नियम भी बदले

नए वर्गीकरण में होटल और रिसॉर्ट के लिए भी बदलाव किए गए हैं। अब 300 बेड से अधिक क्षमता वाले होटल और रिसॉर्ट ही रेड कैटेगरी में आएंगे। ऐसे संस्थानों को पर्यावरण से जुड़ी मंजूरी के लिए मंडल के मुख्यालय या क्षेत्रीय कार्यालय में आवेदन करना होगा। इससे छोटे होटल और रिसॉर्ट संचालकों को पहले की तुलना में राहत मिलेगी।

कई नए उद्योग भी सूची में शामिल

नई सूची में रेड कैटेगरी में 144, ऑरेंज कैटेगरी में 159 और ग्रीन कैटेगरी में 116 तरह के औद्योगिक सेक्टर शामिल किए गए हैं। इनमें सीमेंट, सिरेमिक, डेयरी, बायोगैस (CBG/Bio-CNG) प्लांट, ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग, अस्पताल, होटल और रिसॉर्ट, निर्माण परियोजनाएं, बैटरी निर्माण, डिस्टिलरी, धातु प्रसंस्करण, औद्योगिक पार्क और वेस्ट ट्रीटमेंट जैसी कई इंडस्ट्री शामिल हैं। इन सभी को उनके प्रदूषण के स्तर के आधार पर अलग-अलग कैटेगरी में रखा गया है।

इस नए वर्गीकरण से उद्योगों को यह स्पष्ट हो जाएगा कि उन्हें किस कैटेगरी में आवेदन करना है। साथ ही पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया पहले से अधिक आसान, पारदर्शी और समयबद्ध होने की उम्मीद है।

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