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निवेश के नाम पर फंसा सकते थे लोग, अब 2 गिरफ्तार

राजस्थान पुलिस ने डॉक्टर से 1.61 करोड़ की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। आरोपियों ने डॉक्टर को व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप से जोड़कर फर्जी निवेश एप इंस्टॉल कराई, जिससे पीड़ित का भरोसा बढ़ गया। पुलिस की जांच में 50 करोड़ से ज्यादा की ठगी के सबूत मिले हैं।

Hindustan के अनुसार17 जुलाई 2026 को 10:14 am बजे
निवेश के नाम पर फंसा सकते थे लोग, अब 2 गिरफ्तार

सौजन्य से:- Hindustan

IPO में मोटे मुनाफे का लालच पड़ा भारी, जयपुर के डॉक्टर से 62 लाख ठगे; 2 गिरफ्तार

आरोपियों ने पहले डॉक्टर को व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप से जोड़ा। इसके बाद एक फर्जी लिंक भेजकर मोबाइल में नकली निवेश एप इंस्टॉल करवाई। शुरुआत में एप पर मामूली मुनाफा दिखाया गया, जिससे पीड़ित का भरोसा बढ़ गया।

राजधानी जयपुर के एक डॉक्टर से शेयर बाजार और IPO में निवेश के नाम पर करीब 62 लाख रुपए की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का साइबर क्राइम पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में दिल्ली के नजफगढ़ निवासी देवेंद्र शर्मा और निखिल लूथरा को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी टेरापल्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर हैं। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने फर्जी कंपनी के जरिए देशभर में 50 करोड़ रुपए से ज्यादा की साइबर ठगी को अंजाम दिया और रकम को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया।

साइबर क्राइम के अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) वीके सिंह ने बताया कि आरोपियों का नेटवर्क सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को निवेश के नाम पर फंसाता था। गिरोह के खिलाफ देशभर में 250 से अधिक शिकायतें और 50 से ज्यादा एफआईआर दर्ज हैं। पुलिस को आशंका है कि ठगी की वास्तविक रकम अब तक सामने आए आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है।

डॉक्टर को IPO और विदेशी शेयर बाजार में निवेश का लालच

पुलिस के अनुसार जयपुर निवासी एक डॉक्टर ने 23 जनवरी 2025 को साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। डॉक्टर ने बताया कि उन्हें ‘विकासा कैपिटल’ नाम के एक कथित निवेश प्लेटफॉर्म के जरिए IPO और भारतीय-अमेरिकी शेयर बाजार में निवेश पर भारी मुनाफे का लालच दिया गया।

आरोपियों ने पहले डॉक्टर को व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप से जोड़ा। इसके बाद एक फर्जी लिंक भेजकर मोबाइल में नकली निवेश एप इंस्टॉल करवाई। शुरुआत में एप पर मामूली मुनाफा दिखाया गया, जिससे पीड़ित का भरोसा बढ़ गया। इसके बाद अलग-अलग निवेश योजनाओं का हवाला देकर डॉक्टर से 61.77 लाख रुपए विभिन्न फर्मों के बैंक खातों में जमा करा लिए गए।

जब डॉक्टर ने निवेश की रकम निकालने की कोशिश की तो एप पर यह संदेश दिखाया गया कि विदेशी नियामक संस्था ने उनका खाता ब्लॉक कर दिया है। इसके चलते पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ और उसने पुलिस से संपर्क किया।

फर्जी कंपनी के नाम पर खोले बैंक खाते

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपियों ने टेरापल्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर IDFC बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक में चालू खाते खुलवा रखे थे। साइबर ठगी से हासिल रकम पहले इन्हीं खातों में जमा कराई जाती थी और बाद में उसे दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था, ताकि पैसे का ट्रैक करना मुश्किल हो जाए।

पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उनकी कंपनी का इस्तेमाल साइबर अपराध से मिली रकम को अलग-अलग खातों में भेजने के लिए किया जाता था। पुलिस अब इन बैंक खातों के लेन-देन और डिजिटल ट्रेल की गहन जांच कर रही है।

50 करोड़ से ज्यादा की ठगी के मिले सबूत

एडीजी वीके सिंह ने बताया कि आरोपियों से जुड़े बैंक खातों के खिलाफ अब तक करीब 50 करोड़ रुपए के संदिग्ध लेन-देन से जुड़ी 40 शिकायतें और 10 से ज्यादा आपराधिक मामले विभिन्न राज्यों में दर्ज हैं। वहीं राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर इस गिरोह के खिलाफ 250 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह गिरोह लंबे समय से संगठित तरीके से निवेश के नाम पर लोगों को निशाना बना रहा था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, फर्जी निवेश एप और व्हाट्सएप-टेलीग्राम ग्रुप इनके सबसे बड़े हथियार थे।

डिजिटल सबूत खंगाल रही पुलिस

साइबर क्राइम थाना पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक खातों, लैपटॉप, डिजिटल वॉलेट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कर रही है। साथ ही गिरोह से जुड़े अन्य बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और संदिग्ध लोगों की पहचान की जा रही है।

पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क में कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग राज्यों में कार्रवाई की जा रही है। जांच के आधार पर आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।

पुलिस की अपील

साइबर क्राइम पुलिस ने लोगों से अपील की है कि शेयर बाजार, IPO या विदेशी निवेश के नाम पर सोशल मीडिया, व्हाट्सएप या टेलीग्राम पर मिलने वाले किसी भी निवेश प्रस्ताव पर बिना जांच भरोसा न करें। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने या एप डाउनलोड करने से पहले उसकी सत्यता की पुष्टि करें। यदि किसी प्रकार की साइबर ठगी का संदेह हो तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

लेखक के बारे में

Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)

सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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