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राजस्थान के ये पूर्व IAS कौन, जिन पर CBI ने की थी पासपोर्ट सत्यापन में हुई थी FIR , अब कोर्ट ने की रद्द

सीबीआई की ओर से दर्ज किए गए मामले में राजस्थान हाईकोर्ट का अहम फैसला आया है। इस पासपोर्ट सत्यापन से जुड़े मामले में दर्ज FIR को कोर्ट ने रद्द करते हुए इस केस में पूर्व आईएएस और अन्य आरोपी को राहत दी है। जयपुर: राजस्थान ह…

Navbharat Times के अनुसार18 जुलाई 2026 को 10:49 am बजे
राजस्थान के ये पूर्व IAS कौन, जिन पर CBI ने की थी पासपोर्ट सत्यापन में हुई थी FIR , अब कोर्ट ने की रद्द

सौजन्य से:- Navbharat Times

सीबीआई की ओर से दर्ज किए गए मामले में राजस्थान हाईकोर्ट का अहम फैसला आया है। इस पासपोर्ट सत्यापन से जुड़े मामले में दर्ज FIR को कोर्ट ने रद्द करते हुए इस केस में पूर्व आईएएस और अन्य आरोपी को राहत दी है।

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में भारतीय प्रशासनिक सेवा के तत्कालीन अधिकारी संजय दीक्षित और एक अन्य रणजीत सिंह को बड़ी राहत दी है। हाई कोर्ट ने दोनों के खिलाफ सीबीआई में दर्ज एफआईआर को पूरी तरह से रद्द करने का आदेश जारी किया है। न्यायमूर्ति अनूप कुमार ढंड की एकल पीठ ने दोनों अधिकारियों की ओर से दायर की गई आपराधिक याचिकाओं पर सुनवाई में यह फैसला लिया है। बता दें IAS अफसर पर पासपोर्ट सत्यापन से जुड़े मामले में FIR दर्ज की गई थी।

जानिए क्या है पूरा मामला

यह विवाद साल 2009 का है, जब प्रहलाद गुर्जर नामक व्यक्ति ने पासपोर्ट कार्यालय में एक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि रणजीत सिंह को जारी किया गया पासपोर्ट अवैध है, क्योंकि उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसी शिकायत और उसके बाद हुई अदालती कार्रवाई के आधार पर मामला सीबीआई (CBI) को सौंप दिया गया था, जिसने इस संबंध में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी।

पूर्व IAS संजय दीक्षित की ओर से रखा गया ये पक्ष

पूर्व आईएएस संजय दीक्षित की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता माधव मित्र और अधिवक्ता जया मित्र ने अदालत के सामने पैरवी की। उन्होंने कोर्ट को बताया कि जैसे ही तत्कालीन आईएएस अधिकारी (संजय दीक्षित) को रणजीत सिंह के आपराधिक रिकॉर्ड और उनकी गिरफ्तारी की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए पुलिस को चरित्र सत्यापन वापस लेने की लिखित सूचना दे दी थी। ऐसे में उनके खिलाफ दुर्भावनापूर्ण तरीके से मामला चलाया जा रहा है।

आरोपी रणजीत सिंह की ओर से रखी गई ये दलील

रणजीत सिंह की ओर से कोर्ट में पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अनुराग शर्मा ने दलील दी कि जिस मूल याचिका के आधार पर इस पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी, वह याचिका ही बिना किसी प्रभावी आदेश के पहले ही समाप्त हो चुकी है। जब मूल आधार ही खत्म हो चुका है, तो इस एफआईआर को जारी रखने का कोई कानूनी औचित्य नहीं बचता, इसलिए इसे रद्द किया जाना चाहिए।

सीबीआई की ओर से दर्ज करवाया गया विरोध

दूसरी तरफ, सीबीआई की ओर से उपस्थित अधिवक्ता जगमोहन सक्सेना ने याचिकाओं का कड़ा विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि संजय दीक्षित ने एक ऐसे व्यक्ति के चरित्र का सत्यापन किया था, जिसका पुराना क्रिमिनल बैकग्राउंड (हिस्ट्रीशीटर) रहा था और जिसे बाद में पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था। हालांकि, सीबीआई ने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने इस मामले की पूरी जांच कर ली थी, लेकिन तकनीकी या अन्य कारणों से चार्जशीट को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका था।

कोर्ट ने जानिए क्यों दिया अधिकारियों के पक्ष में फैसला

हाई कोर्ट के जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने सभी पक्षों की दलीलों, कानूनी बारीकियों और मामले से जुड़े दस्तावेजों का गहन अध्ययन किया। कोर्ट ने पाया कि मामले की परिस्थितियों और पिछली याचिकाओं के निस्तारण को देखते हुए अब इस एफआईआर को लंबित रखने का कोई ठोस आधार नहीं है। इसके बाद अदालत ने दोनों ही पूर्व अधिकारियों के खिलाफ दर्ज सीबीआई की एफआईआर को निरस्त करने के आदेश दे दिए।

लेखक के बारे मेंखुशेंद्र तिवारीखुशेंद्र तिवारी नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर कंटेट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में राजस्थान के लिए कवर करते हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों की राजनीति की खबरें कवर करते हैं। खुशेंद्र तिवारी पत्रकारिता की शुरुआत समाचार पत्र से की। बीते 6 सालों से डिजिटल मीडिया के लिए काम कर रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 15 सालों का अनुभव है। समाचार पत्र में पहले रिपोर्टिंग और बाद में डेस्क पर काम किया। साल 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत । राजस्थान की राजनीति, सामाजिक और अपराध की खबरें कवर करता हैं । डेस्क के साथ-साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है । अभी तक राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर, शिक्षा और कला जैसे विषयों पर काम किया है। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय की है। प्रिंट में काम करने के बाद पिछले छह साल से डिजिटल में नए एक्सपीरियंस के साथ लर्निंग जारी है।

विशेषता: ब्यूरोक्रेसी, पॉलिटिक्ल, आर्ट एंड कल्चर, एजुकेशन और अपराध की खबरों में विशेष दिलचस्पी है। बड़े घटनाक्रमों पर अलग-अलग एंगलों से खबरें लिखना। ओपिनियन लिखना।

पत्रकारिता का अनुभव: पत्रकारिता में कुल 15 सालों का अनुभव है। पत्रकारिता में दिलचस्पी और शुरुआत अखबारों में छोटे- छोटे लेख भेजकर की। इसके बाद इसी क्षेत्र में पोस्ट ग्रेजुएशन कर विधिवत रूप से राजस्थान पत्रिका में फील्ड रिपोर्टिंग की। सबसे पहले आर्ट एंड कल्चर, इसके बाद एजुकेशन की फील्ड में काम किया। \ रिपोर्टिंग के बाद डेस्क के अनुभव को भी समझा।... और पढ़ें

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