CM भजनलाल शर्मा, सचिन पायलट-डोटासरा के गढ़ में GenZ का दबदबा; राजस्थान में 1094 जेन-ज़ी पार्षद
CM भजनलाल शर्मा, सचिन पायलट-डोटासरा के गढ़ में GenZ का दबदबा; राजस्थान में 1094 जेन-ज़ी पार्षद राजस्थान में इस बार 10,244 पार्षद पदों के लिए चुनाव हुए। इनमें से 1094 यानी 10.68 फीसदी पार्षद Gen-Z हैं। वहीं 30 साल तक की उ…

सौजन्य से:- Hindustan
CM भजनलाल शर्मा, सचिन पायलट-डोटासरा के गढ़ में GenZ का दबदबा; राजस्थान में 1094 जेन-ज़ी पार्षद
राजस्थान में इस बार 10,244 पार्षद पदों के लिए चुनाव हुए। इनमें से 1094 यानी 10.68 फीसदी पार्षद Gen-Z हैं। वहीं 30 साल तक की उम्र वाले पार्षदों की संख्या 1388 है, जो कुल पार्षदों का 13.55 फीसदी है।
राजस्थान के निकाय चुनाव में इस बार सिर्फ बोर्ड नहीं बदले हैं, वार्डों में चेहरों की उम्र भी बदली है। प्रदेश के अलग-अलग शहरों और कस्बों में बड़ी संख्या में Gen-Z यानी 29 साल या उससे कम उम्र के युवा चुनाव जीतकर पार्षद बने हैं। खास बात यह है कि इन युवाओं की एंट्री किसी एक पार्टी, शहर या सियासी खेमे तक सीमित नहीं रही।
सीएम भजनलाल शर्मा, डिप्टी सीएम दीया कुमारी और राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के इलाके से लेकर सचिन पायलट, गोविंद सिंह डोटासरा और निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी के प्रभाव वाले जिलों तक युवा चेहरों ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या राजस्थान की स्थानीय राजनीति में नई पीढ़ी दस्तक दे चुकी है?
1094 Gen-Z पार्षद, यानी हर 10 में एक युवा
राजस्थान में इस बार 10,244 पार्षद पदों के लिए चुनाव हुए। इनमें से 1094 यानी 10.68 फीसदी पार्षद Gen-Z हैं। वहीं 30 साल तक की उम्र वाले पार्षदों की संख्या 1388 है, जो कुल पार्षदों का 13.55 फीसदी है।
जिलेवार तस्वीर देखें तो झुंझुनूं में सबसे ज्यादा 73 युवा पार्षद चुनाव जीतकर आए हैं। वहीं सलूंबर में सबसे कम 3 युवा पार्षद चुने गए।
हालांकि, पांच नगर निकाय ऐसे भी रहे जहां 30 साल से कम उम्र का एक भी पार्षद चुनाव नहीं जीत पाया। इनमें चूरू की साहवा, नागौर की मेड़ता सिटी, पाली की रानीखुर्द और सुमेरपुर तथा सिरोही की मंडार नगर पालिका शामिल हैं।
22 साल की सोफिया से 23 साल की मोना तक
युवा चेहरों की एंट्री सिर्फ चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं रही। कुछ ने बिना मुकाबले के ही जीत दर्ज की।
सीकर की रामगढ़ शेखावाटी नगर पालिका में कांग्रेस की 22 वर्षीय सोफिया सबसे कम उम्र की निर्विरोध पार्षद चुनी गईं। नागौर की बासनी नगर पालिका में 23 साल की मोना बानो, डीग की पहाड़ी नगर पालिका में 24 साल की पिंकी कुमारी और 29 साल की साबरिन भी निर्विरोध पार्षद चुनी गईं।
यानी स्थानीय राजनीति में नई पीढ़ी की मौजूदगी अब सिर्फ सोशल मीडिया या चुनावी प्रचार तक नहीं है, बल्कि सीधे निर्वाचित सदनों तक पहुंची है।
15 Gen-Z बने निकाय प्रमुख
सबसे दिलचस्प तस्वीर निकाय प्रमुखों के स्तर पर सामने आई है। प्रदेश में 15 Gen-Z सभापति और पालिका चेयरमैन चुने गए हैं।
इनमें झालावाड़ की अकलेरा नगर पालिका की चेयरमैन यांशिका मेवाड़ा सबसे कम उम्र की निकाय प्रमुख हैं।
कुल मिलाकर प्रदेश के 19 निकायों में प्रमुखों की उम्र 30 साल या उससे कम है। अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, दौसा, धौलपुर, जैसलमेर, झालावाड़, करौली, नागौर, प्रतापगढ़, सीकर, टोंक और उदयपुर में एक-एक ऐसे निकाय प्रमुख हैं। वहीं जयपुर, झुंझुनूं और जोधपुर में दो-दो निकाय प्रमुख 30 साल या उससे कम उम्र के हैं।
पायलट-डोटासरा के गढ़ में 40-40 Gen-Z
अब नजर उन जिलों पर, जहां प्रदेश की राजनीति के बड़े नामों का प्रभाव माना जाता है।
भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में 30 साल तक के 26 युवा पार्षद चुने गए हैं। इनमें 23 Gen-Z हैं।
जयपुर, जहां दीया कुमारी और राज्यवर्धन सिंह राठौड़ की विधानसभा सीटें हैं, वहां 30 साल तक के 70 युवा पार्षद चुने गए। इनमें 57 Gen-Z हैं।
सीकर, जिसे कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का सियासी क्षेत्र माना जाता है, वहां 30 साल तक के 49 युवा पार्षद चुने गए, जिनमें 40 Gen-Z हैं।
वहीं सचिन पायलट के टोंक जिले में 30 साल तक के 52 युवा पार्षद बने हैं। इनमें भी 40 Gen-Z हैं। टोंक नगर परिषद के नए सभापति मयंक गोयल सिर्फ 24 साल के हैं।
बाड़मेर में भी युवा चेहरों की मौजूदगी दिखी। रविंद्र सिंह भाटी के गृह जिले में 29 साल तक के 12 Gen-Z पार्षद चुने गए हैं।
क्या यह सिर्फ युवा चेहरों की जीत है या बड़ा बदलाव?
स्थानीय निकाय की राजनीति में जीत के लिए सिर्फ उम्र काफी नहीं होती। वार्ड स्तर पर व्यक्तिगत पहचान, स्थानीय नेटवर्क और लगातार लोगों के बीच मौजूदगी अहम होती है। ऐसे में कम उम्र में चुनाव जीतकर सदन तक पहुंचना युवाओं की स्थानीय राजनीतिक मौजूदगी को जरूर दिखाता है।
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