चीनी कीमतों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार मulling साप्ताहिक कोटा और डिस्पैच व्यवस्था
चीनी की बढ़ती कीमतों पर काबू लगाने के लिए केंद्र सरकार साप्ताहिक चीनी कोटा और डिस्पैच व्यवस्था लागू करने पर विचार कर रही है। सूत्रों के अनुसार, सरकार घरेलू बाजार में चीनी की आपूर्ति सुनिश्चित करने और बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए आयात पर भी विचार कर सकती है।

सौजन्य से:- ChiniMandi
कोल्हापुर: उद्योग जगत के सूत्रों के अनुसार, चीनी की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए केंद्र सरकार साप्ताहिक चीनी कोटा और डिस्पैच (आपूर्ति/भेजने) की व्यवस्था लागू करने पर विचार कर रही है। देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में एक्स-मिल चीनी की कीमतें जून में 3,800 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 16 जुलाई तक 4,450 रुपये प्रति क्विंटल हो गई हैं। व्यापारियों के अनुसार, इस दौरान कीमतों में लगभग 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
उद्योग सूत्रों ने बताया कि, घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में लगातार तेज वृद्धि के बीच केंद्र सरकार शून्य आयात शुल्क पर लगभग 10 लाख टन चीनी को आयात करने पर भी विचार कर सकती है। इसके साथ ही सरकार बाजार में हस्तक्षेप के लिए कड़े कदमों का मूल्यांकन कर रही है। इनमें साप्ताहिक और पखवाड़ेवार चीनी रिलीज एवं डिस्पैच व्यवस्था तथा व्यापारियों के लिए स्टॉक सीमा लागू करना शामिल है।
चीनी की कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब 2025-26 चीनी सीजन में भारत का चीनी उत्पादन करीब 28 मिलियन मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जो पिछले सीजन के 26.2 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन से अधिक है। उद्योग सूत्रों के मुताबिक, घरेलू बाजार में उपलब्धता घटने और मांग मजबूत रहने के कारण कीमतों पर दबाव बढ़ा है। सरकार ने 2025-26 चीनी सीजन के लिए 15 लाख टन चीनी के निर्यात को मंजूरी दी थी, लेकिन अब तक करीब 7.5 लाख टन चीनी का ही निर्यात हुआ है। घरेलू मांग बढ़ने और कीमतों में तेजी के बीच सरकार द्वारा देश में चीनी के कुल संतुलन की समीक्षा की जा रही हैं और घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आयात पर विचार किया जा रहा हैं।
उद्योग सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर 10 लाख टन चीनी के आयात की अनुमति देने पर विचार कर रही है। आयात के अलावा, सरकार मौजूदा मासिक रिलीज व्यवस्था को बदलकर साप्ताहिक और पखवाड़ेवार चीनी रिलीज एवं डिस्पैच व्यवस्था लागू करने की संभावना पर भी विचार कर रही है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की आपूर्ति को बेहतर बनाना है। एक उद्योग सूत्र ने कहा, सरकार चीनी आयात की अनुमति देने के साथ-साथ व्यापारियों पर स्टॉक रखने की सीमा लागू करने पर भी विचार कर रही है।
यदि इन उपायों को मंजूरी मिलती है, तो बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण और घरेलू बाजार में चीनी की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के सरकार के प्रयासों में यह एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव होगा।भारत इससे पहले भी आपूर्ति की कमी के दौरान चीनी का आयात कर चुका है। देश ने 2009-10 में 41 लाख टन, 2012-13 में 15 लाख टन और 2017-18 में 2 लाख टन चीनी का आयात किया था। 2009 में आपूर्ति संकट के दौरान केंद्र सरकार ने 17 अप्रैल से 1 अगस्त 2009 के बीच सफेद, रिफाइंड और कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी थी। इसके अलावा, घरेलू बाजार में चीनी की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा मासिक रिलीज आदेशों को विभाजित कर साप्ताहिक और पखवाड़ेवार चीनी रिलीज व्यवस्था भी शुरू की गई थी। उद्योग सूत्रों ने कहा कि, सरकार बाजार की स्थिति पर करीबी नजर रख रही है। यदि चीनी की कीमतों में मजबूती बनी रहती है, तो आयात और अतिरिक्त बाजार नियंत्रण उपायों पर जल्द निर्णय लिया जा सकता है।
Powered by Reporting Rajasthan Files




