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कोटा की मेहनत और विश्वास ने दिलाए राष्ट्रीय टॉप-10 में जगह

बिहार के आयुष भालोटिया ने कोटा से री-नीट में ऑल इंडिया रैंक 4 हासिल कर इतिहास रचा, उनका सपना है दिल्ली एम्स में पढ़ाई करना और वे अपने गांव नवादा के पहले एमबीबीएस डॉक्टर बनने वाले होंगे.

ETV Bharat के अनुसार17 जुलाई 2026 को 04:31 am बजे
कोटा की मेहनत और विश्वास ने दिलाए राष्ट्रीय टॉप-10 में जगह

सौजन्य से:- ETV Bharat

कोटा से पढ़कर बिहार के आयुष लेकर आएं AIR-4, NEET में थे कम अंक... RE-NEET ने दिलाया एम्स दिल्ली

बिहार के नवादा के आयुष भालोटिया ने कोटा में रहकर री-नीट यूजी में ऑल इंडिया रैंक 4 हासिल किया है.

Published : July 17, 2026 at 7:47 AM IST

कोटा : मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी (NEET UG) के घोषित परिणामों में ऑल इंडिया रैंक 4 हासिल कर आयुष भालोटिया ने इतिहास रच दिया है. आयुष करीब दो साल पहले बिहार से आंखों में देश के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान दिल्ली एम्स (AIIMS Delhi) में पढ़ने का सपना लेकर कोटा आए थे. आज न सिर्फ उनका वह सपना पूरा हो गया है, बल्कि वे राष्ट्रीय स्तर पर टॉपर बनकर उभरे हैं. आयुष की यह सफलता इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि वे अपने पूरे गांव के इतिहास में पहले एमबीबीएस डॉक्टर बनने जा रहे हैं.

हालांकि, सफलता का यह सफर इतना आसान नहीं था. जब नीट यूजी का पहला पेपर हुआ था, तब आयुष अपने प्रदर्शन से बिल्कुल खुश नहीं थे. आंसर की के अनुसार उनके 695 नंबर आ रहे थे, जिससे उनकी रैंक 500 से नीचे खिसक रही थी. इस रैंक पर दिल्ली एम्स में दाखिला मिलना पूरी तरह असंभव था. लेकिन तभी नीट पेपर लीक के विवादों के बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने दोबारा परीक्षा (Re-NEET) कराने की घोषणा की. आयुष के लिए यह दोबारा परीक्षा एक वरदान और बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई. उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और दोगुने उत्साह के साथ री-नीट की तैयारियों में जुट गए. आयुष ने मेहनत की और परिणाम सबके सामने है. वे सीधे देश के टॉप-10 टॉपर में शामिल हो गए और अंततः ऑल इंडिया रैंक 4 पर अपना परचम लहराया.

आयुष का कहना है कि कोटा में पढ़ाई के दौरान यहां के पूरे सिस्टम ने काफी मदद की है. मैं परिवार के साथ नहीं रहता था. अकेला कोटा में रहता था, लेकिन कभी प्रेशर मुझे नहीं महसूस हुआ है. यहां पर फैकल्टी और मेरे साथ पढ़ रहे दोस्तों ने अकेलापन महसूस नहीं होने दिया. मैं 5 घंटे क्लास रूम के बाद में 7 घंटे हॉस्टल रूम पर सेल्फ स्टडी कर लेता था. कभी-कभी बोर होने या फिर खुद को रिफ्रेश करने के लिए मैं चेस खेलता था. मेरे पेरेंट्स मुझे हमेशा मोटिवेट करते थे और कहते थे कि मेरा सिलेक्शन जरूर होगा. मैंने पढ़ाई के दौरान नीट का पूरा सिलेबस तैयार किया था और कोचिंग के नोट्स पर काफी फोकस किया है. मैं लगातार रिवीजन करता था और टेस्ट देता था.

आयुष के पिता सुनील भालोटिया का कहना है कि नीट के पहले पेपर में आयुष के 695 नंबर आंसर की के अनुसार आ रहे थे, इस पर करीब 500 से नीचे रैंक आ रही थी. दिल्ली एम्स में उसके पढ़ने का सपना यहां पूरा नहीं हो रहा था, लेकिन पेपर के लीक होने जैसी खबर बाहर आई. एनटीए इन्हें दोबारा परीक्षा की घोषणा कर दी. इसके बाद आयुष ने और जमकर मेहनत की और री नीट एग्जाम के बाद उसने कह दिया कि मैं टॉप टेन रैंक में आऊंगा. परिणाम में भी यही सामने आया है और वह आखिर में ऑल इंडिया रैंक 4 लेकर आया है, जिसकी बदौलत दिल्ली एम्स में उसका एडमिशन हो जाएगा. आयुष मूल रूप से बिहार के नवादा निवासी है. उनका गांव नवादा शहर से 20 किमी दूर वरीसालीगंज है. उनके गांव से अभी तक कोई भी एमबीबीएस नहीं कर पाया है, वह अपने गांव के पहले डॉक्टर बनेंगे.

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आयुष का कहना है कि यह सफलता जितनी मेरी है, उतनी ही मेरी फैमिली और फैकल्टीज की भी है. मैं चाहता हूं कि मेरी सफलता से गांव और छोटे शहरों के अन्य स्टूडेंट्स भी मोटिवेट हों और बड़े टारगेट तय करने का साहस जुटाएं. मैं नीट की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स से कहना चाहूंगा कि स्टूडेंट्स को एनसीईआरटी पर मजबूत पकड़ बनानी चाहिए, नियमित रिवीजन करना चाहिए और मॉक टेस्ट को सीरियसली देना चाहिए.

भाई आईआईटियन, फिर भी 2024 में चुना एमबीबीएस : आयुष के पिता सुनील कुमार भालोटिया का सीमेंट और स्टील का व्यवसाय है. जबकि उनकी मां किरण देवी हाउसवाइफ है. बड़े भाई आदित्य भी कोटा ही पढ़ने आए थे. उन्होंने कोटा में जेईई मेन व एडवांस्ड की तैयारी की. इसके बाद 2020 में कोविड-19 के दौर में उन्होंने जेईई एडवांस्ड को क्रैक कर दिया. इसके बाद उन्होंने आईआईटी दिल्ली से 2025 में बीटेक पुरी की और यूएसए से पीएचडी करने चले गए. इसी बीच 2024 में आयुष ने अपनी दसवीं की परीक्षा को 96.2 फीसदी अंको से पास किया. इसके बाद उन्होंने तय कर लिया कि वह एमबीबीएस करेंगे और अपने परिवार को भी बताया. उनके पिता ने कोटा में उन्हें कोचिंग में दाखिला दिलाया, उन्होंने 2 साल यहां पर पढ़ाई की. जिसके बाद 12वीं में उनके 93.8 फीसदी अंक है.

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