जयपुर के डॉक्टर का कमाल: AI हेल्थकेयर असिस्टेंट विकसित किया, मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत
जयपुर के डॉक्टर का कमाल: AI हेल्थकेयर असिस्टेंट विकसित किया, मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत जयपुर के जेके लोन अस्पताल के डॉ. योगेश यादव ने BONORx नामक भारत का पहला ऑल-इन-वन वॉइस-ड्रिवन AI स्वास्थ्य सहायक विकसित किया है. Publ…

सौजन्य से:- ETV Bharat
जयपुर के डॉक्टर का कमाल: AI हेल्थकेयर असिस्टेंट विकसित किया, मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत
जयपुर के जेके लोन अस्पताल के डॉ. योगेश यादव ने BONORx नामक भारत का पहला ऑल-इन-वन वॉइस-ड्रिवन AI स्वास्थ्य सहायक विकसित किया है.
Published : June 30, 2026 at 6:38 AM IST
जयपुर: स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलाइजेशन की दिशा में भारत ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है. जयपुर के जेके लोन अस्पताल के प्रोफेसर डॉ. योगेश यादव ने देश का पहला ऑल-इन-वन एआई हेल्थकेयर असिस्टेंट विकसित किया है, जो क्लिनिकल मैनेजमेंट के साथ-साथ पेशेंट केयर में भी बड़ा बदलाव लाएगा. यह एडवांस टूल क्लिनिकल डेटा के आधार पर डॉक्टरों को संभावित बीमारी और उपचार के विकल्प सुझाएगा, जबकि अंतिम निर्णय और नियंत्रण पूरी तरह डॉक्टर के पास सुरक्षित रहेगा. इसके साथ ही, अस्पतालों में भीड़ और लंबी प्रतीक्षा अवधि को समाप्त करने के लिए इसमें 'स्मार्ट वर्चुअल क्यू मैनेजमेंट सिस्टम' भी जोड़ा गया है.
पहला AI हेल्थकेयर असिस्टेंट: जेके लोन अस्पताल के पीडियाट्रिक मेडिसिन विभाग में प्रोफेसर डॉ. योगेश यादव ने चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए BONORx नामक वॉइस-ड्रिवन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस असिस्टेंट विकसित किया है. डॉक्टर यादव का दावा है कि यह भारत का पहला ऑल-इन-वन AI हेल्थकेयर असिस्टेंट है, जो डॉक्टरों की जगह नहीं लेता बल्कि उनकी कार्यक्षमता, निर्णय क्षमता और समय प्रबंधन को काफी हद तक बेहतर बनाता है.
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डॉक्टर और मरीज दोनों को फायदा: डॉ. योगेश यादव ने बताया कि BONORx को विशेष रूप से भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था की चुनौतियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है. यहां बहुभाषी मरीज, भारी भीड़-भाड़ वाले अस्पताल और सीमित समय में अधिक से अधिक मरीजों को देखने की मजबूरी आम है. इस AI टूल की मदद से डॉक्टर मरीज से बातचीत करते हुए ही वॉइस कमांड के जरिए मरीज की हिस्ट्री, क्लीनिकल नोट्स और प्रिस्क्रिप्शन तैयार कर सकते हैं. इससे पारंपरिक टाइपिंग या हाथ से लिखने की प्रक्रिया काफी कम हो जाती है और डॉक्टर मरीज को व्यक्तिगत ध्यान देने के लिए अधिक समय निकाल पाते हैं.
AI सुझाव देगा, अंतिम निर्णय डॉक्टर का: डॉ. यादव ने बताया कि BONORx मरीज के बताए लक्षणों, उपलब्ध चिकित्सकीय जानकारी और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर संभावित रोग, जरूरी जांचें और उपचार के विकल्प सुझाता है. हालांकि, यह पूरी तरह से सहायक भूमिका में है. अंतिम फैसला, निदान और प्रिस्क्रिप्शन हमेशा डॉक्टर के हाथ में ही रहेगा. डॉ. यादव स्पष्ट करते हैं कि यह डॉक्टर हेल्पिंग असिस्टेंट है, न कि डॉक्टर का विकल्प. उन्होंने बताया कि इसमें एक और उल्लेखनीय फीचर है स्मार्ट वर्चुअल क्यू मैनेजमेंट सिस्टम, इससे मरीज घर बैठे डिजिटल कतार में शामिल हो सकते हैं और अपनी अनुमानित बारी देख सकते हैं. इससे अस्पतालों में अनावश्यक भीड़ और लंबे प्रतीक्षा समय में कमी आएगी.
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डॉक्टर की स्वीकृति अनिवार्य: BONORx ‘ह्यूमन-इन-द-लूप’ सिद्धांत पर काम करता है. AI द्वारा दिए गए हर सुझाव को डॉक्टर संशोधित या अस्वीकार कर सकते हैं. बिना डॉक्टर की अंतिम स्वीकृति के मरीज की कोई भी जानकारी सेव या साझा नहीं की जाएगी, जिससे डेटा सुरक्षा सुनिश्चित रहे. डॉ. योगेश यादव कहते हैं कि कोई भी AI टूल अभी डॉक्टरों की जगह नहीं ले सकता, लेकिन सही तरीके से इस्तेमाल किए जाने पर AI क्लीनिकल दक्षता, सटीकता और समय प्रबंधन को निश्चित रूप से बेहतर बना सकता है.
यह विकास भारत में स्वास्थ्य सेवा को डिजिटल और कुशल बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है. डॉ. योगेश यादव का यह प्रयास न केवल पीडियाट्रिक विभाग बल्कि पूरे चिकित्सा क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक है. BONORx जैसे टूल्स भविष्य में सरकारी और निजी दोनों स्तरों पर स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुलभ, तेज और सटीक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.
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