जुलाई 2026 के लिए राज्यवार चीनी बिक्री कोटा जारी, 585 चीनी मिलों को 22 लाख मीट्रिक टन आवंटित - ChiniMandi
नई दिल्ली: केंद्र सरकार के खाद्य मंत्रालय ने 30 जून 2026 को जारी आदेश में जुलाई 2026 के लिए 585 चीनी मिलों को 22 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) चीनी बिक्री कोटा आवंटित किया है। यह कोटा जुलाई 2025 में दिए गए कोटे के बराबर है।जुल…

सौजन्य से:- ChiniMandi
नई दिल्ली: केंद्र सरकार के खाद्य मंत्रालय ने 30 जून 2026 को जारी आदेश में जुलाई 2026 के लिए 585 चीनी मिलों को 22 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) चीनी बिक्री कोटा आवंटित किया है। यह कोटा जुलाई 2025 में दिए गए कोटे के बराबर है।जुलाई 2025 में भी सरकार ने घरेलू बिक्री के लिए 22 एलएमटी चीनी का कोटा निर्धारित किया था, जबकि जून 2026 में यह कोटा 22.5 एलएमटी था।बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि, जुलाई 2026 के लिए 22 एलएमटी चीनी कोटा घोषित होने के बाद घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा बनी रहने की संभावना है।अधिकांश चीनी मिलों में गन्ना पेराई सत्र समाप्त हो चुका है और मानसून की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में सरकार ने चीनी की मांग को स्थिर मानते हुए पिछले वर्ष के समान ही कोटा जारी रखा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अप्रैल और मई के दौरान मानसून से पहले चीनी की खपत आमतौर पर अधिक रहती है, जबकि बरसात के मौसम में मांग अपेक्षाकृत स्थिर हो जाती है। इस कारण बाजार में फिलहाल सीमित दायरे में कारोबार रहने की संभावना जताई जा रही है।खाद्य मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, चीनी मिलों के ईआरपी/एसएपी सिस्टम को एनएसडब्ल्यूएस (NSWS) पोर्टल से एपीआई के माध्यम से जोड़ने की प्रक्रिया जारी है।सभी चीनी मिलों को 10 जुलाई 2026 तक अपना एपीआई मॉड्यूल विकसित कर NSWS पोर्टल से एकीकृत करने और जून 2026 का मासिक पी-2 विवरण एपीआई के माध्यम से जमा करने का निर्देश दिया गया है।
सरकार ने चेतावनी दी है कि जो चीनी मिलें निर्धारित समय सीमा में अनुपालन नहीं करेंगी, उन्हें अगले महीने से बिक्री कोटा आवंटित नहीं किया जा सकता।इसके अलावा, सभी चीनी मिलों को जूट पैकेजिंग सामग्री (पैकिंग में अनिवार्य उपयोग) अधिनियम, 1987 के तहत कम से कम 20 प्रतिशत चीनी की पैकिंग जूट के बोरों में करना अनिवार्य किया गया है। इस संबंध में जानकारी NSWS पोर्टल पर पी-2 प्रोफार्मा में उपलब्ध करानी होगी।सरकार ने कहा है कि, आदेश का उल्लंघन करने वाली चीनी मिलों पर आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की प्रासंगिक दंडात्मक धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
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