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63 साल, 3 पीढ़ियां, दादा ने कराया केस अब पोते लड़ रहे, राजस्थान हाईकोर्ट ने भी भावुक टिप्पणी

राजस्थान हाईकोर्ट ने 63 साल पुराने पाटरखेड़ा जमीन विवाद पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि 'न्याय में देरी, न्याय से इनकार है।' अदालत ने टिप्पणी की कि मानव जीवन छोटा है, लेकिन मुकदमेबाजी पीढ़ियों तक चलती है। हाईकोर्ट ने दौसा…

Navbharat Times के अनुसार29 सितंबर 2026 को 05:04 am बजे
63 साल, 3 पीढ़ियां, दादा ने कराया केस अब पोते लड़ रहे, राजस्थान हाईकोर्ट ने भी भावुक टिप्पणी

सौजन्य से:- Navbharat Times

राजस्थान हाईकोर्ट ने 63 साल पुराने पाटरखेड़ा जमीन विवाद पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि 'न्याय में देरी, न्याय से इनकार है।' अदालत ने टिप्पणी की कि मानव जीवन छोटा है, लेकिन मुकदमेबाजी पीढ़ियों तक चलती है। हाईकोर्ट ने दौसा एसडीएम को तीन महीने में मामला निस्तारित करने का आदेश दिया।

दौसा: न्याय मिलने में अत्यधिक विलंब पर राजस्थान हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए एक ऐतिहासिक और भावुक टिप्पणी की है। अदालत ने 63 साल पुराने एक जमीन विवाद के अब तक लंबित रहने पर कहा कि 'न्याय में देरी होना, वास्तव में न्याय से इनकार करने के समान है'। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश अनूप कुमार ढंढ ने न्यायिक प्रणाली की कड़वी सच्चाई को बयां करते हुए टिप्पणी की, 'मानव जीवन का दायरा छोटा और सीमित होता है, जबकि मुकदमेबाजी असीमित और अमर होती है। एक व्यक्ति बहुत कम समय के लिए जीता है, लेकिन मुकदमे पीढ़ियों तक चलते रहते हैं। अक्सर मुकदमे की शुरुआत करने वाले मूल वादी की मृत्यु हो जाती है और उसकी अगली पीढ़ियां अदालतों के चक्कर काटती रहती हैं।'

क्या है 63 साल पुराना पाटरखेड़ा जमीन विवाद?

यह पूरा कानूनी विवाद दौसा जिले के पाटरखेड़ा गांव में स्थित एक जमीन के टुकड़े से जुड़ा हुआ है। इस जमीन पर कब्जे को लेकर करीब 63 साल पहले वर्ष 1963 में दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 145 के तहत कानूनी कार्यवाही शुरू हुई थी। तब से लेकर आज तक पीड़ित परिवार जमीन के मालिकाना हक के लिए अदालती लड़ाई लड़ रहा है।

86 वर्ष के मूल पक्षकार

बता दें कि मुकदमे के मुख्य पक्षकार जयराम अब 86 वर्ष के हो चुके हैं। इस छह दशक लंबी अवधि में मुकदमे से जुड़े कई मूल पक्षकारों का निधन हो चुका है, जिसके बाद उनके विधिक वारिसों (कानूनी प्रतिनिधियों) को कोर्ट रिकॉर्ड पर लाना पड़ा।

'दादा मुकदमा दर्ज कराए और पोते फैसला सुनें, यह मानसिकता बदलनी होगी'

हाईकोर्ट ने राजस्व अदालतों में सालों-साल लंबित रहने वाले मुकदमों पर गहरी चिंता व्यक्त की। अदालत ने तंज कसते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि इस ढर्रे और मानसिकता को बदला जाए, जहाँ मामले दादाओं द्वारा दायर किए जाते हैं और अंततः उनके पोते जाकर उन मुकदमों के फैसले सुनते हैं। यह मामला इस बात का ज्वलंत उदाहरण है कि कैसे न्यायिक देरी हमारी व्यवस्था का गंभीर दोष बन चुकी है।

कोर्ट ने किया उच्च अधिकारियों को तलब

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने प्रशासनिक व राजस्व स्तर पर जवाबदेही तय करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने इस आदेश की एक-एक प्रति अतिरिक्त मुख्य सचिव (कार्मिक विभाग), संभागीय आयुक्त (जयपुर), जिला कलेक्टर (दौसा) और रजिस्ट्रार (राजस्व मंडल, अजमेर) को सख्त अनुपालन के लिए भेजने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले की प्रशासनिक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 18 दिसंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है।

लेखक के बारे मेंखुशेंद्र तिवारीखुशेंद्र तिवारी नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर कंटेट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में राजस्थान के लिए कवर करते हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों की राजनीति की खबरें कवर करते हैं। खुशेंद्र तिवारी पत्रकारिता की शुरुआत समाचार पत्र से की। बीते 6 सालों से डिजिटल मीडिया के लिए काम कर रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 15 सालों का अनुभव है। समाचार पत्र में पहले रिपोर्टिंग और बाद में डेस्क पर काम किया। साल 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत । राजस्थान की राजनीति, सामाजिक और अपराध की खबरें कवर करता हैं । डेस्क के साथ-साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है । अभी तक राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर, शिक्षा और कला जैसे विषयों पर काम किया है। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय की है। प्रिंट में काम करने के बाद पिछले छह साल से डिजिटल में नए एक्सपीरियंस के साथ लर्निंग जारी है।

विशेषता: ब्यूरोक्रेसी, पॉलिटिक्ल, आर्ट एंड कल्चर, एजुकेशन और अपराध की खबरों में विशेष दिलचस्पी है। बड़े घटनाक्रमों पर अलग-अलग एंगलों से खबरें लिखना। ओपिनियन लिखना।

पत्रकारिता का अनुभव: पत्रकारिता में कुल 15 सालों का अनुभव है। पत्रकारिता में दिलचस्पी और शुरुआत अखबारों में छोटे- छोटे लेख भेजकर की। इसके बाद इसी क्षेत्र में पोस्ट ग्रेजुएशन कर विधिवत रूप से राजस्थान पत्रिका में फील्ड रिपोर्टिंग की। सबसे पहले आर्ट एंड कल्चर, इसके बाद एजुकेशन की फील्ड में काम किया। \ रिपोर्टिंग के बाद डेस्क के अनुभव को भी समझा।... और पढ़ें

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