Rajasthan panchayat chunav: पंचायत चुनाव में चुनावी खर्च की लिमिट फाइनल, उम्मीदवारों के लिए नियम और शर्त जान लें
राजस्थान पंचायती राज चुनाव के लिए आयोग ने कड़े नियम लागू किए हैं। प्रत्याशी अधिकतम 1 से 3 लाख रुपये तक ही खर्च कर सकेंगे और 1 से 3 वाहन ही उपयोग में ले सकेंगे। नियमों के उल्लंघन, बिना अनुमति पोस्टर लगाने या रात 10 बजे बा…

सौजन्य से:- Navbharat Times
राजस्थान पंचायती राज चुनाव के लिए आयोग ने कड़े नियम लागू किए हैं। प्रत्याशी अधिकतम 1 से 3 लाख रुपये तक ही खर्च कर सकेंगे और 1 से 3 वाहन ही उपयोग में ले सकेंगे। नियमों के उल्लंघन, बिना अनुमति पोस्टर लगाने या रात 10 बजे बाद लाउडस्पीकर बजाने पर 2 हजार रुपये जुर्माना और 6 साल का बैन लग सकता है।
झुंझुनूं: अगर सरपंच, जिला परिषद या फिर पंचायत समिति सदस्य का चुनाव लड़ रहे हैं तो यह खबर आपके बेहद काम की हो सकती है। निर्वाचन आयोग ने पोस्टर-बैनर से लाउडस्पीकर तक हर चीज के नियम तय कर दिए हैं। प्रत्याशी की जरा-सी चूक हो गई तो यह भारी पड़ेगी और हो सकता है आयोग आपको 6 साल तक चुनाव से बाहर करने का फरमान जारी कर दे।
चुनावी खर्च के दौरान निर्धारित नियमों का पालन करना होगा
दरअसल, पंचायती राज चुनाव का बिगुल बजने से पहले ही चुनावी मैदान में उतरने वाले संभावित प्रत्याशियों के लिए नियम-कायदे सामने आ गए हैं। जिला परिषद सदस्य से लेकर पंचायत समिति सदस्य और सरपंच का चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को प्रचार और चुनावी खर्च के दौरान निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। नियमों की अनदेखी करने पर जुर्माने के साथ छह साल तक चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराए जाने का प्रावधान बताया गया है
जानिए कौन कितना कर सकता है खर्च
दरअसल, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, छह साल बाद होने वाले पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन में चुनावी खर्च की सीमा भी तय की गई है। इसके मुताबिक जिला परिषद सदस्य अधिकतम 3 लाख रुपये, पंचायत समिति सदस्य 1.50 लाख रुपये और सरपंच पद का उम्मीदवार अधिकतम 1 लाख रुपये तक खर्च कर सकेगा।
कितनी गाड़ियों से कर सकेंगे प्रचार?
चुनावी प्रचार में वाहनों के इस्तेमाल को लेकर भी सीमा तय की गई है।
जिला परिषद सदस्य: अधिकतम 3 वाहन
पंचायत समिति सदस्य: अधिकतम 2 वाहन
सरपंच: अधिकतम 1 वाहन
इसके अलावा चुनावी प्रचार में बस, ट्रक, मिनी बस और पशु-चालित वाहनों के इस्तेमाल पर रोक रहेगी। यानी चुनावी शक्ति प्रदर्शन में वाहनों की भीड़ जुटाने पर भी अंकुश रहेगा।
रात 10 बजे बाद लाउडस्पीकर बंद
प्रचार के दौरान ध्वनि विस्तारक यंत्रों के इस्तेमाल को लेकर भी स्पष्ट नियम हैं। रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक रहेगी। अस्पताल, स्कूल और धार्मिक स्थलों के 100 मीटर के दायरे में भी लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति नहीं होगी। ऐसे में उम्मीदवारों को प्रचार का कार्यक्रम तय करते समय समय-सीमा और प्रतिबंधित क्षेत्रों का विशेष ध्यान रखना होगा।
पोस्टर-बैनर लगाने में भी मनमानी नहीं चलेगी
सार्वजनिक या निजी स्थानों पर पोस्टर, बैनर या होर्डिंग लगाने के लिए संबंधित प्रशासन अथवा मकान मालिक की लिखित अनुमति लेना जरूरी होगा। वहीं मतदान केंद्र के 200 मीटर के दायरे में प्रचार सामग्री लगाने पर रोक रहेगी। यानी चुनावी प्रचार में पोस्टर-बैनर से लेकर वाहनों और लाउडस्पीकर तक हर कदम नियमों के दायरे में रखना होगा।
चुनाव खर्च का हिसाब भी देना होगा
चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को सिर्फ खर्च की सीमा का ध्यान रखना ही नहीं होगा, बल्कि चुनाव के बाद उसका पूरा हिसाब भी देना होगा। आयोग की गाइडलाइन के अनुसार चुनाव परिणाम घोषित होने के 15 दिन के भीतर चुनावी खर्च का पूरा विवरण प्रस्तुत करना होगा। निर्धारित सीमा के अनुसार जिला परिषद सदस्य के लिए 3 लाख रुपये, पंचायत समिति सदस्य के लिए 1.50 लाख रुपये और सरपंच के लिए 1 लाख रुपये की अधिकतम खर्च सीमा रखी गई है।
नियम तोड़े तो जुर्माने के साथ अयोग्यता का प्रावधान
निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन का मकसद चुनाव प्रचार और खर्च में पारदर्शिता बनाए रखना है। नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रत्याशियों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है। उपलब्ध गाइडलाइन के अनुसार ऐसे मामलों में 2 हजार रुपये तक जुर्माना और छह साल तक चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किए जाने की कार्रवाई हो सकती है। यानी पंचायत चुनाव के मैदान में उतरने वाले दावेदारों के लिए अब सिर्फ वोटों का गणित साधना ही काफी नहीं होगा। प्रचार का तरीका, गाड़ियों की संख्या, लाउडस्पीकर का समय, पोस्टर-बैनर की अनुमति और चुनावी खर्च-हर कदम नियमों के हिसाब से उठाना होगा।
लेखक के बारे मेंखुशेंद्र तिवारीखुशेंद्र तिवारी नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर कंटेट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में राजस्थान के लिए कवर करते हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों की राजनीति की खबरें कवर करते हैं। खुशेंद्र तिवारी पत्रकारिता की शुरुआत समाचार पत्र से की। बीते 6 सालों से डिजिटल मीडिया के लिए काम कर रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 15 सालों का अनुभव है। समाचार पत्र में पहले रिपोर्टिंग और बाद में डेस्क पर काम किया। साल 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत । राजस्थान की राजनीति, सामाजिक और अपराध की खबरें कवर करता हैं । डेस्क के साथ-साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है । अभी तक राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर, शिक्षा और कला जैसे विषयों पर काम किया है। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय की है। प्रिंट में काम करने के बाद पिछले छह साल से डिजिटल में नए एक्सपीरियंस के साथ लर्निंग जारी है।
विशेषता: ब्यूरोक्रेसी, पॉलिटिक्ल, आर्ट एंड कल्चर, एजुकेशन और अपराध की खबरों में विशेष दिलचस्पी है। बड़े घटनाक्रमों पर अलग-अलग एंगलों से खबरें लिखना। ओपिनियन लिखना।
पत्रकारिता का अनुभव: पत्रकारिता में कुल 15 सालों का अनुभव है। पत्रकारिता में दिलचस्पी और शुरुआत अखबारों में छोटे- छोटे लेख भेजकर की। इसके बाद इसी क्षेत्र में पोस्ट ग्रेजुएशन कर विधिवत रूप से राजस्थान पत्रिका में फील्ड रिपोर्टिंग की। सबसे पहले आर्ट एंड कल्चर, इसके बाद एजुकेशन की फील्ड में काम किया। \ रिपोर्टिंग के बाद डेस्क के अनुभव को भी समझा।... और पढ़ें
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