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Special : राजस्थान में हर तीसरा वयस्क तंबाकू की गिरफ्त में, खपत में जयपुर सबसे आगे

Special : राजस्थान में हर तीसरा वयस्क तंबाकू की गिरफ्त में, खपत में जयपुर सबसे आगे राजस्थान में तंबाकू के सेवन को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. पढ़िए आदित्य आत्रेय की रिपोर्ट... Published : September 29, 2026 at…

ETV Bharat के अनुसार29 सितंबर 2026 को 06:04 am बजे
Special : राजस्थान में हर तीसरा वयस्क तंबाकू की गिरफ्त में, खपत में जयपुर सबसे आगे

सौजन्य से:- ETV Bharat

Special : राजस्थान में हर तीसरा वयस्क तंबाकू की गिरफ्त में, खपत में जयपुर सबसे आगे

राजस्थान में तंबाकू के सेवन को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. पढ़िए आदित्य आत्रेय की रिपोर्ट...

Published : September 29, 2026 at 10:59 AM IST

जयपुर: राजस्थान में तंबाकू के सेवन से जुड़े आंकड़े काफी चौंकाने वाले हैं और आंकड़ों की मानें तो प्रदेश में हर तीसरा व्यक्ति तंबाकू की गिरफ्त में है. तंबाकू की खपत में जयपुर सबसे आगे है. ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे (GATS-2) की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में वर्तमान तंबाकू सेवन की दर 24.7 प्रतिशत है, पुरुषों में यह दर 39.6 प्रतिशत, जबकि महिलाओं में 9 प्रतिशत है यानी प्रदेश में पुरुषों के बीच तंबाकू सेवन का चलन महिलाओं की तुलना में काफी अधिक है.

ग्रामीण क्षेत्रों में भी तंबाकू का इस्तेमाल शहरी इलाकों से ज्यादा पाया गया है. तंबाकू सेवन का यह आंकड़ा केवल सिगरेट या बीड़ी पीने तक सीमित नहीं है. प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग बिना धुएं वाले तंबाकू उत्पादों, जैसे गुटखा और खैनी का भी इस्तेमाल करते हैं. इससे तंबाकू सेवन की समस्या का दायरा और व्यापक हो जाता है. तंबाकू सेवन के विरुद्ध काम करने वाले राजस्थान के सामाजिक कार्यकर्ता राजन चौधरी का कहना है कि तंबाकू के विभिन्न उत्पादों का सेवन मुंह, फेफड़ों और शरीर के अन्य अंगों से जुड़ी गंभीर बीमारियों के जोखिम को बढ़ाता है. ऐसे में तंबाकू नियंत्रण के लिए केवल धूम्रपान रोकने के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि चबाने वाले तंबाकू उत्पादों के इस्तेमाल पर भी ध्यान देना जरूरी है.

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शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अलग आंकड़े : तंबाकू सेवन को लेकर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के आंकड़ों में भी अंतर सामने आया है. ग्रामीण इलाकों में 26.8 प्रतिशत वयस्क तंबाकू का सेवन करते हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 19.1 प्रतिशत है. राजस्थान में तंबाकू सेवन के तरीकों पर नजर डालें तो बीड़ी का इस्तेमाल सिगरेट की तुलना में काफी ज्यादा है. GATS-2 के अनुसार, प्रदेश में 11.4 प्रतिशत लोग बीड़ी का सेवन करते हैं, जबकि सिगरेट पीने वालों की दर करीब 2.8 प्रतिशत दर्ज की गई. बिना धुएं वाले तंबाकू उत्पादों में गुटखा और खैनी का इस्तेमाल भी बड़ी संख्या में किया जाता है. प्रदेश में करीब 9 प्रतिशत लोग गुटखा और 8.2 प्रतिशत लोग खैनी का सेवन करते हैं. ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि राजस्थान में तंबाकू की समस्या केवल धूम्रपान तक सीमित नहीं है.

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करोड़ों रुपए की खपत : राजस्थान में तंबाकू उत्पादों की खपत को लेकर सामने आए जिला स्तर के आंकड़ों में जयपुर पहले स्थान पर है. प्रदेश की राजधानी जयपुर में तंबाकू उत्पादों का उपभोग 2011 करोड़ रुपए दर्ज किया गया है. इस सूची में अलवर 1361 करोड़ रुपए की खपत के साथ दूसरे और नागौर 1157 करोड़ रुपए के साथ तीसरे स्थान पर है. जोधपुर में भी तंबाकू उत्पादों की खपत 1102 करोड़ रुपए दर्ज की गई है. जिला स्तर पर तंबाकू उत्पादों के उपभोग के ये आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के बड़े शहरी और ग्रामीण जिलों में तंबाकू उत्पादों की खपत का दायरा काफी व्यापक है.

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कैंसर का खतरा बढ़ा : राज्य में कैंसर रोगियों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. खासतौर पर पुरुषों में मुंह और गले के कैंसर और महिलाओं में स्तन और जननांग के कैंसर की संख्या सबसे अधिक है. भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल जयपुर की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में कैंसर के बढ़ते मामलों ने चौंकाया है. चिकित्सालय की ओर से कैंसर रजिस्ट्री में 2024 में 10,363 मरीजों को दर्ज किया गया. इस रोगियों में 26 फीसदी से ज्यादा मुंह और गले के कैंसर के हैं. वहीं, महिलाओं में 11 फीसदी कैंसर स्तन और 8 फीसदी कैंसर जननांगों के हैं.

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मुंह के कैंसर का खतरा : तंबाकू का बढ़ता सेवन विशेष रूप से युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रहा है. इसके परिणामस्वरूप कैंसर के मामलों में भी लगातार वृद्धि देखी जा रही है. भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल के वरिष्ठ सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि तंबाकू के सेवन से मुख और ओरल कैविटी कैंसर के मामले सबसे अधिक देखने को मिलते है. कैंसर रजिस्ट्री में वर्ष 2025 के दौरान 15,116 नए मरीज दर्ज किए गए, जिनमें 26 प्रतिशत से अधिक मरीज मुंह और गले के कैंसर से प्रभावित थे.

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तंबाकू के सेवन के अलग-अलग रूपों के कारण इसके नियंत्रण के लिए व्यापक रणनीति की जरूरत है. गुटखा और खैनी जैसे उत्पादों को कई लोग धूम्रपान के मुकाबले कम नुकसानदायक समझ सकते हैं, लेकिन इनमें मौजूद तंबाकू और निकोटिन के कारण स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव डालते हैं. मुंह के कैंसर, मसूड़ों की बीमारी और दांतों से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ता है. वहीं, बीड़ी और सिगरेट के धुएं से फेफड़ों और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा रहता है.

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