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साइबर ठगी की वारदात: जयपुर पुलिस ने 50 करोड़ की ठगी का पर्दाफाश किया, दो गिरफ्तार

राजस्थान पुलिस की स्टेट साइबर क्राइम थाना पुलिस टीम ने ट्रेडिंग और आईपीओ में निवेश के नाम पर साइबर ठगी की वारदात को अंजाम देने वाले एक बड़े गिरोह का खुलासा किया है. दो आरोपियों को पुलिस ने हरियाणा से गिरफ्तार किया है.

ETV Bharat के अनुसार17 जुलाई 2026 को 07:01 am बजे
साइबर ठगी की वारदात: जयपुर पुलिस ने 50 करोड़ की ठगी का पर्दाफाश किया, दो गिरफ्तार

सौजन्य से:- ETV Bharat

जयपुर में 50 करोड़ के फर्जी ट्रेडिंग स्कैम का पर्दाफाश, डॉक्टर से ठगे 61.77 लाख, दो गिरफ्तार

वाट्सएप-टेलीग्राम के जरिए देते झांसा, विकासा कैपिटल के नाम से फर्जी पोर्टल बनाकर वारदात.

Published : July 17, 2026 at 9:20 AM IST

जयपुर : राजस्थान पुलिस की स्टेट साइबर क्राइम थाना पुलिस टीम ने ट्रेडिंग और आईपीओ में निवेश के नाम पर साइबर ठगी की वारदात को अंजाम देने वाले एक बड़े गिरोह का खुलासा किया है. दो आरोपियों को पुलिस ने हरियाणा से गिरफ्तार किया है. प्रारंभिक पड़ताल में इस गिरोह द्वारा 50 करोड़ से अधिक की ठगी की वारदातों को अंजाम देने की बात सामने आई है. आरोपियों ने ट्रेडिंग और आईपीओ में निवेश के नाम पर जयपुर के एक डॉक्टर से भी 61.77 लाख रुपए की ठगी की है. इसी मामले की जांच करते हुए पुलिस आरोपियों तक पहुंची. इस गिरोह के खिलाफ देशभर में करीब 250 शिकायतें हैं.

साइबर अपराध के खिलाफ खास अभियान : राजस्थान पुलिस के मुखिया डीजीपी राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर साइबर अपराध की रोकथाम के लिए खास अभियान चलाया जा रहा है. इसके तहत राजस्थान पुलिस की स्टेट साइबर क्राइम थाना पुलिस टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया. वाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग व आईपीओ में निवेश के नाम पर करोड़ों रुपए की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के दो प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया है.

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नजफगढ़ के आरोपी, फरीदाबाद से पकड़े : एडीजी साइबर क्राइम विजय कुमार सिंह ने बताया, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान देवेंद्र शर्मा व निखिल लुथरा निवासी नजफगढ़, दिल्ली के रूप में हुई है. दोनों टेरापल्स प्राइवेट लिमिटेड (TERRAPULSE PRIVATE LIMITED) कंपनी के डायरेक्टर हैं और इन्हें फरीदाबाद (हरियाणा) से गिरफ्तार किया गया. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह ने देशभर में करीब 50 से 60 करोड़ रुपए की साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दिया है.

जयपुर के डॉक्टर को इस तरह लिया झांसे में : उन्होंने बताया, स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में 23 जनवरी 2025 को परिवादी डॉ. निखिल मेहता ने शिकायत दर्ज कराई कि गूगल और सोशल मीडिया पर विकासा कैपिटल (VIKASA CAPITAL) नामक निवेश पोर्टल के माध्यम से उन्हें आईपीओ, अमेरिकी व भारतीय शेयर बाजार में निवेश पर आकर्षक और सुनिश्चित लाभ का लालच दिया गया. वाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए फर्जी लिंक भेजकर मोबाइल में नकली एप्लीकेशन इंस्टॉल करवाई गई तथा निवेश पर लगातार काल्पनिक लाभ दिखाकर विश्वास में लिया गया.

फर्मों के बैंक खातों में जमा करवाई रकम : आरोपियों ने शुरुआत में कम रकम निवेश करवाकर एक बार छोटी रकम की निकासी भी करवाई, जिससे परिवादी का भरोसा बढ़ गया. बाद में 'सत्कार शॉपिंग आईपीओ' सहित विभिन्न निवेश योजनाओं में अधिक लाभ का लालच देकर 'पीजी एंटरप्राइजेज', 'एसके एंटरप्राइजेज', 'टेरापल्स प्राइवेट लिमिटेड', 'राधा माधब वैराइटीज', 'पर्थ ट्रेडर्स' और 'प्रिशा एंटरप्राइजेज' जैसी फर्मों के बैंक खातों में कुल 61.77 लाख रुपए जमा करवा लिए. परिवादी ने मुनाफे की रकम निकालने का प्रयास किया तो पोर्टल पर विदेशी नियामक संस्था द्वारा खाता ब्लॉक किए जाने का झूठा संदेश दिखाकर निकासी रोक दी गई और संपर्क बंद कर दिया.

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दूसरे खातों में ट्रांसफर करते ठगी की रकम : साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, राजस्थान, जयपुर की टीम ने तकनीकी एवं वित्तीय साक्ष्यों, साइबर पुलिस पोर्टल तथा आईसीजेएस पोर्टल का गहन विश्लेषण कर ठगी में प्रयुक्त बैंक खातों का पता लगाया. जांच में सामने आया कि टेरापल्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से आईडीएफसी बैंक एवं एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में चालू खाते खोलकर साइबर ठगी की रकम प्राप्त की जाती थी और तुरंत अन्य खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी.

250 से ज्यादा शिकायतें और 50 एफआईआर : पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि फर्म का उपयोग साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त राशि को विभिन्न खातों में स्थानांतरित करने के लिए किया जाता था. अब तक की जांच में इनके बैंक खातों से संबंधित करीब 25 करोड़ रुपए की ठगी की 40 शिकायतें और 10 से अधिक आपराधिक प्रकरण विभिन्न राज्यों में दर्ज होना सामने आया है. बैंक खातों के विश्लेषण से इस गिरोह के खिलाफ साइबर क्राइम पोर्टल पर 250 से अधिक शिकायतें दर्ज मिली हैं. जबकि 50 से अधिक एफआईआर देश के विभिन्न राज्यों में पंजीकृत हैं. ऐसे में ठगी की वास्तविक राशि कहीं अधिक हो सकती है.

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यह सावधानियां रखकर बच सकते हैं ठगी से :-

- गारंटीड या असामान्य मुनाफे का दावा करने वाले निवेश प्रस्तावों से सतर्क रहें.

- केवल अधिकृत एवं पंजीकृत निवेश प्लेटफॉर्म पर ही निवेश करें.

- सोशल मीडिया, व्हाट्सएप या टेलीग्राम पर मिले निवेश प्रस्तावों पर बिना सत्यापन भरोसा न करें.

- ओटीपी, यूपीआई, पिन, सीवीवी, पासवर्ड एवं बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें.

- किसी भी कंपनी या निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसका पंजीकरण एवं वैधता अवश्य जांचें.

- संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और केवल आधिकारिक वेबसाइट या एप का ही उपयोग करें.

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