ऑनलाइन प्रमोशनल टास्क के नाम पर 4.29 लाख की ठगी, दिल्ली पुलिस ने राजस्थान-MP से दबोचे 7 जालसाज - delhi police busts online task scam 7 arrested in rajasthanmp
ऑनलाइन प्रमोशनल टास्क के नाम पर 4.29 लाख की ठगी, दिल्ली पुलिस ने राजस्थान-MP से दबोचे 7 जालसाज दिल्ली पुलिस ने ऑनलाइन प्रमोशनल टास्क और क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर राजस्थान और मध्…

सौजन्य से:- Jagran
ऑनलाइन प्रमोशनल टास्क के नाम पर 4.29 लाख की ठगी, दिल्ली पुलिस ने राजस्थान-MP से दबोचे 7 जालसाज
दिल्ली पुलिस ने ऑनलाइन प्रमोशनल टास्क और क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर राजस्थान और मध्य प्रदेश से सात जालसाजों ...और पढ़ें
HighLights
- दिल्ली पुलिस ने ऑनलाइन ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया।
- राजस्थान और मध्य प्रदेश से सात जालसाज गिरफ्तार हुए।
- अमेजन टास्क के नाम पर 4.29 लाख की ठगी।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। ऑनलाइन फर्जी प्रमोशनल टास्क, क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग और फर्जी कमीशन स्कीम के जरिये झांसे में लेकर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर दक्षिण-पश्चिमी जिले की साइबर थाना पुलिस ने सात जालसाजों को दबोचा है। इन्होंने हाल ही में अमेजन के फर्जी प्रमोशनल टास्क के जरिये पीड़ित से 4.29 लाख ठगे थे।
आपत्तिजनक चैटिंग बरामद की गईं
पुलिस टीम ने राजस्थान और मध्य प्रदेश में छापेमारी कर आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान जयपुर के सुरेश कुमार यादव, पूरन मल यादव, इंदौर के अर्शन मोहम्मद, गुफरान कुरैशी, अभिजीत पाटीदार और आर्यन राठौर के रूप में हुई है। इनके कब्जे से छह मोबाइल और आपत्तिजनक चैट बरामद की है। पुलिस ने इनसे पूछताछ कर गिरोह में शामिल अन्य आरोपितों की तलाश में जुटी है।
डिजिटल मार्केटिंग की दिखाते थे छवि
उपायुक्त अमित गोयल के मुताबिक, साइबर थाने में एक शिकायत मिली थी, जिसमें शिकायतकर्ता के साथ अमेजन टास्क-आधारित स्कैम में 4.29 लाख की ठगी हुई थी। शिकायतकर्ता से सबसे पहले जालसाजों के एक वाट्सएप ग्रुप के जरिये संपर्क किया, जो अमेजन से जुड़ी डिजिटल मार्केटिंग कंपनी के प्रतिनिधि बनकर बात कर रहे थे।
पहले छोटी रकम जमा की गई
उन्होंने कमीशन का लालच देकर उन्हें ऑनलाइन प्रमोशनल टास्क करने के लिए राजी किया और भरोसा जीतने के लिए पहले छोटी रकम जमा की गई, फिर जालसाजों ने उन्हें टेलीग्राम ग्रुप में शामिल किया और पक्का रिटर्न दिखाकर प्रमोशनल टास्क और कायनबेस के नाम पर बने फर्जी क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग प्लेटफाॅर्म में धीरे-धीरे बड़ी रकम निवेश करने के लिए उकसाया। पीड़ित ने अलग-अलग यूपीआई आईडी और बैंक अकाउंट के जरिये कुल 4.29 लाख ट्रांसफर कर दिए।
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तब मुकदमा दर्ज कराया गया
जब उसने जमा हुई रकम निकालने की कोशिश की, तो जालसाजों ने दावा किया कि उसका ट्रेडिंग अकाउंट फ्रीज कर दिया गया है और अकाउंट एक्टिवेशन और पैसे निकालने की प्रोसेसिंग फीस जैसे अलग-अलग बहाने बनाकर और पैसे जमा करने की मांग की। ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने थाने में शिकायत दर्ज कराई।
जांच में खुलने लगी सारी पोल
जांच के दौरान टीम ने फाइनेंशियल ट्रेल, बैंकिंग रिकाॅर्ड, यूपीआई ट्रांजैक्शन, सीडीआर, एटीएम सीसीटीवी फुटेज और दूसरे डिजिटल सबूतों का विश्लेषण कर संगठित अंतरराज्यीय साइबर ठगी सिंडिकेट का पता लगाया। इसके बाद मध्य प्रदेश और राजस्थान में छापेमारी कर छह आरोपितों को गिरफ्तार किया।
सिंडिकेट में सबकी अलग जिम्मेदारी
जांच से पता चला कि सभी आरोपित एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी सिंडिकेट के सक्रिय सदस्य थे, जिनकी भूमिकाएं अलग-अलग थीं, जैसे 'म्यूल' बैंक खाते (धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाले खाते) का इंतजाम करना, बैंकिंग क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल करना, धोखाधड़ी की रकम निकालना और अपराध से मिली रकम को बांटना शामिल था।
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