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राजस्थान में फिर से मानसून सक्रिय, 21 जुलाई से जयपुर-कोटा में बारिश के आसार

राजस्थान में फिर से मानसून सक्रिय होने के संकेत हैं। 21 जुलाई से पूर्वी राजस्थान में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, इस दौरान जयपुर, कोटा, भरतपुर और अन्य संभागों में मेघगर्जन के साथ बारिश की संभावना है।

ETV Bharat के अनुसार17 जुलाई 2026 को 09:44 am बजे
राजस्थान में फिर से मानसून सक्रिय, 21 जुलाई से जयपुर-कोटा में बारिश के आसार

सौजन्य से:- ETV Bharat

राजस्थान में फिर एक्टिव होगा मानसून: 21 जुलाई से जयपुर-कोटा समेत कई संभागों में बारिश के आसार, जानें अपने शहर का हाल

मौसम विभाग में प्रदेश में फिर से मानसून के रफ्तार पकड़ने की संभावना जताई है.

Published : July 17, 2026 at 1:39 PM IST

|Updated : July 17, 2026 at 1:46 PM IST

जयपुर : राजस्थान में मानसून की रफ्तार फिलहाल थमी हुई है, लेकिन मौसम विभाग ने 21 जुलाई से एक बार फिर मानसून के सक्रिय होने के संकेत दिए हैं. विभाग के मुताबिक राज्य में अगले 3-4 दिन मानसून कमजोर रहेगा. इसके बाद 21 जुलाई से पूर्वी राजस्थान में बारिश की गतिविधियां बढ़ने के आसार हैं. इस दौरान कोटा, भरतपुर और जयपुर संभाग में मेघगर्जन के साथ बारिश की संभावना है. 22 और 23 जुलाई से पश्चिमी और मध्य राजस्थान में भी बारिश बढ़ेगी. फिर जुलाई के आखिरी सप्ताह में जोधपुर और बीकानेर संभाग में भी मानसून सक्रिय होगा.

फिलहाल बंगाल की खाड़ी में बन रहे वेल मार्क्ड लो प्रेशर एरिया के असर से 21 से 23 जुलाई के बीच प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है. हालांकि तब तक अगले तीन-चार दिन मानसून कमजोर रहेगा और ज्यादातर इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश ही देखने को मिलेगी. मौसम विभाग के अनुसार, शुक्रवार को प्रदेश के 19 जिलों में हल्की बारिश की संभावना है, जबकि 20 जुलाई के लिए 17 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है. 22 और 23 जुलाई से पश्चिमी और मध्य राजस्थान के साथ पूर्वी राजस्थान के कई इलाकों में बारिश का दायरा बढ़ने की उम्मीद है.

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अब तक सामान्य से 18 फीसदी कम हुई बारिश : प्रदेश में इस बार मानसून की शुरुआत अच्छी रही थी, लेकिन जुलाई के दूसरे सप्ताह से बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ गईं. इसका असर पूरे राज्य में देखने को मिला है. अब तक राजस्थान में सामान्य से करीब 18 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. मानसून ट्रफ के सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर खिसक जाने के कारण प्रदेश में बारिश का सिलसिला थम गया. इसके चलते दिन के तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. गुरुवार को चूरू 40.6 डिग्री सेल्सियस के साथ प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा. बीकानेर और आसपास के इलाकों में भी गर्मी और उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी.

जयपुर में 11 दिन से नहीं बरसी एक बूंद : राजधानी जयपुर में मानसून की बेरुखी सबसे ज्यादा चिंता का विषय बनती जा रही है. पिछले 11 दिनों से शहर में एक मिलीमीटर भी बारिश दर्ज नहीं हुई है. इससे जिले की कुल बारिश औसत से नीचे पहुंच गई है. 15 जुलाई तक जयपुर जिले में सामान्य बारिश का आंकड़ा 151 मिमी माना जाता है, जबकि इस बार अब तक केवल 146.5 मिमी वर्षा हुई है. मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले चार-पांच दिन भी बारिश की संभावना कम रहने से यह अंतर और बढ़ सकता है. राहत की बात यह है कि 21 जुलाई से मानसून दोबारा सक्रिय होने के संकेत हैं, हालांकि यह दूसरा चरण लंबे समय तक प्रभावी रहने की संभावना नहीं है.

एक सप्ताह में 75 फीसदी कम बरसात : 9 से 15 जुलाई के बीच का सप्ताह पूरे प्रदेश के लिए लगभग सूखा साबित हुआ. मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में राजस्थान में सामान्य से 75 फीसदी कम बारिश हुई. आमतौर पर इस दौरान प्रदेश में 34.7 मिमी वर्षा होती है, लेकिन इस बार केवल 8.7 मिमी बारिश दर्ज की गई. सबसे अधिक चिंता की बात यह रही कि मानसून का प्रवेशद्वार माने जाने वाले हाड़ौती क्षेत्र में भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई. कोटा में सामान्य से 78 फीसदी, बूंदी में 77 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई, जबकि झालावाड़ में पूरे सप्ताह एक बूंद भी बारिश नहीं हुई. इससे खरीफ फसलों और जलाशयों की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है.

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बंगाल की खाड़ी का लो प्रेशर बढ़ाएगा बारिश : मौसम केंद्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा के अनुसार वर्तमान में मानसून ट्रफ सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर खिसककर जम्मू, बरेली और डाल्टेनगंज से होकर गुजर रही है. वहीं ओडिशा और पश्चिम बंगाल तट के ऊपर एक वेल मार्क्ड लो प्रेशर एरिया विकसित हुआ है. इसके प्रभाव से 21 से 23 जुलाई के बीच पूर्वी राजस्थान के कोटा, भरतपुर और जयपुर संभाग के कुछ हिस्सों में मेघगर्जन के साथ बारिश होने की संभावना है. इसके बाद 22 और 23 जुलाई से पश्चिमी और मध्य राजस्थान में भी वर्षा गतिविधियां बढ़ सकती हैं.

जुलाई में सबसे कम बारिश वाले सालों में 2026 : यदि मानसून का दूसरा चरण अपेक्षा के अनुरूप सक्रिय नहीं रहा, तो जुलाई 2026 पिछले दस वर्षों के सबसे कम बारिश वाले महीनों में शामिल हो सकता है. जयपुर में जून और जुलाई को मिलाकर अब तक 135 मिमी बारिश दर्ज हुई है. इसमें जून में 80 मिमी और जुलाई में अब तक केवल 55 मिमी वर्षा हुई है, जबकि अकेले जुलाई में सामान्य औसत 180 मिमी माना जाता है. पिछले दस साल के आंकड़े बताते हैं कि जुलाई में वर्षा की स्थिति हर वर्ष अलग रही है.

- 2016 - 11 बारिश वाले दिन, 239 मिमी वर्षा

- 2017 - 10 दिन, 171 मिमी

- 2018 - 9 दिन, 177.05 मिमी

- 2019 - केवल 6 दिन में 203 मिमी

- 2020 - 9 दिन, 180 मिमी

- 2021 - 8 दिन, 191 मिमी

- 2022 - 13 दिन, लगभग 399 मिमी

- 2023 - 17 दिन, 459 मिमी (सर्वाधिक)

- 2024 - 15 दिन, 302 मिमी

- 2025 - 10 दिन, 345.35 मिमी

इन आंकड़ों से साफ है कि वर्षा वाले दिनों की संख्या हमेशा अधिक नहीं रही, लेकिन कई वर्षों में कम दिनों में भी भारी बारिश दर्ज हुई. वर्ष 2023 जुलाई का सबसे अधिक वर्षा वाला वर्ष रहा, जबकि 2026 में अब तक की स्थिति को देखते हुए बारिश सामान्य से काफी कम बनी हुई है.

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किसानों और जल संसाधनों पर असर : बारिश की कमी का असर अब खेती और जल संसाधनों पर भी दिखाई देने लगा है. कई जिलों में खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है, जबकि बांधों और जलाशयों में पानी की आवक भी अपेक्षा से कम है. मौसम विभाग का कहना है कि अगर 21 जुलाई से मानसून अपेक्षित रूप से सक्रिय होता है, तो किसानों को राहत मिल सकती है और वर्षा का घाटा कुछ हद तक कम हो सकता है. फिलहाल प्रदेशवासियों की नजरें मानसून के अगले चरण पर टिकी हुई हैं

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