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किसानों और उद्यमियों के लिए खुशखबरी! राजस्थान में लागू हुई नई 'फूड पार्क विकास नीति-2026'

इसमें कृषि प्रसंस्करण उद्योगों फल-सब्जी, मसाला, अनाज, तिलहन, दलहन, औषधीय उत्पाद, लघु वन उपज, शहद, दुग्ध और पशु आहार इकाइयों के साथ साइलोज और कोल्ड स्टोरेज जैसी आधारभूत ढांचा विकास परियोजनाओं को शामिल किया गया है। श्रीअन्…

Navbharat Times के अनुसार9 अगस्त 2026 को 04:15 am बजे
किसानों और उद्यमियों के लिए खुशखबरी! राजस्थान में लागू हुई नई 'फूड पार्क विकास नीति-2026'

सौजन्य से:- Navbharat Times

इसमें कृषि प्रसंस्करण उद्योगों फल-सब्जी, मसाला, अनाज, तिलहन, दलहन, औषधीय उत्पाद, लघु वन उपज, शहद, दुग्ध और पशु आहार इकाइयों के साथ साइलोज और कोल्ड स्टोरेज जैसी आधारभूत ढांचा विकास परियोजनाओं को शामिल किया गया है।

श्रीअन्न प्रमोशन एजेंसी की स्थापना

राठौड़ ने बताया कि श्रीअन्न (मिलेट्स) को बढ़ावा देने के लिए श्रीअन्न प्रमोशन एजेंसी की स्थापना भी की जाएगी। कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों, श्रीअन्न इकाइयों तथा प्राथमिक प्रसंस्करण इकाइयों के लिए 50 लाख रुपए तक के ऋण पर 60 प्रतिशत, 50 से 100 लाख रुपए तक के ऋण पर 50 प्रतिशत और एक करोड़ रुपए से अधिक के ऋण पर 40 प्रतिशत की दर से (अधिकतम 1 करोड़ 50 लाख रुपए तक) का पूंजीगत अनुदान देय होगा।एफपीओ, टीएसपी क्षेत्रों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिला उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए अतिरिक्त 5 प्रतिशत पूंजीगत अनुदान का विशेष प्रावधान रखा गया है। कोल्ड स्टोरेज, साइलोज और निर्यात हेतु अनुदान राजस्थान निवेश प्रोत्साहन नीति, 2024 के प्रावधानों के अनुसार देय होगा। साथ ही कृषि और खाद्य प्रसंस्करण परियोजनाएं रिप्स 2024 के एमएसएमई मानक पैकेज के अंतर्गत भी पूंजीगत अनुदान के लिए आवेदन कर सकेंगी।

क्लस्टर आधार पर जिलों में बनाए जाएंगे फूड पार्क

उद्योग मंत्री ने कहा कि मंत्रिमंडल ने कृषि जिन्सों के प्रसंस्करण, व्यवसाय और निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राजस्थान फूड पार्क विकास नीति, 2026 का अनुमोदन भी किया है। प्रदेश में कई स्थानों पर फूड पार्कों के विकास के लिए भूमि का आवंटन किया गया है। विश्वस्तरीय फूड पार्कों की स्थापना, संचालन एवं प्रबंधन के लिए यह नई नीति तैयार की गई है। इस नीति के अंतर्गत राज्य के प्रत्येक जिले में क्लस्टर आधार पर चरणबद्ध रूप से फूड पार्क विकसित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस नीति के तहत खाद्य उत्पादों के संरक्षण, भंडारण, प्रसंस्करण और परिवहन के लिए एकीकृत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।उत्पादक समूहों और किसानों को मजबूत सप्लाई चेन के माध्यम से प्रसंस्करण इकाइयों एवं बाजारों से जोड़ा जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ-साथ अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

एमओयू करने वाले निवेशकों को प्राथमिकता

राठौड़ ने बताया कि राजस्थान फूड पार्क विकास नीति में फूड पार्कों की स्थापना को भूमि स्वामित्व और विकास संबंधी मानदण्डों के आधार पर चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। इसमें उन विकासकर्ताओं को वरीयता दी जाएगी जो राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट-2024 के अंतर्गत फूड पार्क विकास हेतु एमओयू धारक हैं। या ऐसे विकास कर्ता जो प्रस्तावित फूड पार्क में न्यूनतम 10 करोड़ रुपये के निवेश के साथ एंकर फूड प्रोसेसिंग इकाई स्थापित करने के इच्छुक हैं।औद्योगिक विवादों का अब होगा जल्द समाधान

उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री ने बताया कि राज्य के श्रम ढांचे को सरल और आधुनिक बनाने के लिए राजस्थान औद्योगिक संबंध नियम, 2026 का मंत्रिमंडल ने अनुमोदन किया है। इन नए नियमों के अंतर्गत सभी प्रकार की श्रम अनुपालन और विवाद शिकायतों को पूरी तरह से ऑनलाइन पोर्टल्स पर स्थानांतरित किया जाएगा। औद्योगिक विवादों के त्वरित समाधान के लिए समय-सीमा तय की है और बातचीत करने वाली यूनियनों के निष्पक्ष चुनाव के लिए गुप्त मतदान प्रणाली अनिवार्य कर दी गई है।उन्होंने बताया कि कार्यस्थल पर शिकायत निवारण और कार्य समितियों के गठन और संचालन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। व्यापार और व्यवसाय को सुगम बनाने के उद्देश्य से कर्मचारियों की छंटनी और फैक्ट्री बंद करने की कानूनी प्रक्रियाओं और उनके फॉर्म्स को पहले से कहीं अधिक सरल और पारदर्शी बनाया गया है।

ट्री आउटसाइड फॉरेस्ट पॉलिसी को मिली स्वीकृति

मीडिया से रूबरू होते समय तीनों मंत्रियों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान से प्रेरणा लेते हुए प्रदेश में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ओर से 'मिशन हरियालो राजस्थान' प्रारंभ किया गया है। इसके तहत पांच वर्षों में 50 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें से लगभग दो वर्षों में करीब 20 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं। इस मानसून सीजन में भी 10 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य रखा गया है।वन क्षेत्र के बाहर हरित क्षेत्र को और अधिक विस्तार देने के लिए मंत्रिमंडल ने राज्य में ट्री आउटसाइड फॉरेस्ट पॉलिसी लागू किए जाने की स्वीकृति दी है। संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि इस नीति से राज्य में बंजर, परती भूमि और रेलवे, सड़कों के आस-पास की भूमि के साथ सिंचित भूमि क्षेत्रों में ट्री कवर बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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