18 की मौत और 7 की किडनी फेल, राजस्थान में 'मां' बन रही महिलाओं पर अनजानी आफत
18 की मौत और 7 की किडनी फेल, राजस्थान में 'मां' बन रही महिलाओं पर अनजानी आफत स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की जांच के लिए जयपुर से विशेषज्ञों की विशेष टीम गठित की है। इसमें माइक्रोबायोलॉजी, गायनेकोलॉजी, सर्जरी और एनेस्थी…

सौजन्य से:- Hindustan
18 की मौत और 7 की किडनी फेल, राजस्थान में 'मां' बन रही महिलाओं पर अनजानी आफत
स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की जांच के लिए जयपुर से विशेषज्ञों की विशेष टीम गठित की है। इसमें माइक्रोबायोलॉजी, गायनेकोलॉजी, सर्जरी और एनेस्थीसिया विभाग के विशेषज्ञ शामिल हैं।
राजस्थान में मां बनने का सबसे खूबसूरत पल कई परिवारों के लिए मातम में बदलता जा रहा है। पिछले दो महीनों में सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद 18 महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि 7 महिलाएं किडनी फेल होने के बाद डायलिसिस पर हैं। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने राज्य की मातृ स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि विशेषज्ञों और स्वास्थ्य विभाग को भी अभी तक इन मौतों की एक समान वजह नहीं मिल पाई है।
इन घटनाओं के बाद राज्य सरकार ने पूरे मामले की व्यापक जांच के आदेश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित अस्पतालों के इलाज के तरीके, ऑपरेशन थिएटर, दवाइयों, संक्रमण नियंत्रण और मेडिकल रिकॉर्ड की विशेष ऑडिट शुरू कर दी है।
9 मौतों ने बढ़ाई सबसे ज्यादा चिंता
स्थिति तब ज्यादा गंभीर हो गई जब 5 जुलाई से 10 जुलाई के बीच भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में 9 महिलाओं की मौत हो गई। इन घटनाओं के बाद अस्पतालों में इलाज करा रहे मरीजों और उनके परिजनों में डर का माहौल बन गया।
सबसे ज्यादा चर्चा भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल से जुड़ी है, जहां महज छह दिनों में सीजेरियन डिलीवरी के बाद पांच महिलाओं की मौत हो गई। अस्पताल रिकॉर्ड के अनुसार, ऑपरेशन के बाद सभी महिलाओं की तबीयत बिगड़ी, उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी जान नहीं बच सकी।
कहां-कहां सामने आए मामले?
मातृ मृत्यु के मामले किसी एक जिले तक सीमित नहीं हैं।
* मई में कोटा के सरकारी अस्पताल में प्रसव के बाद 5 महिलाओं की मौत हुई।
* जून में बीकानेर में सीजेरियन डिलीवरी के बाद 6 महिलाओं की किडनी फेल हो गई। इनमें से 2 महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि 7 महिलाएं अभी भी डायलिसिस पर हैं।
* जुलाई में भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में लगातार मौतों ने पूरे राज्य में चिंता बढ़ा दी।
इन घटनाओं को जोड़कर देखें तो मई से अब तक 18 महिलाओं की जान जा चुकी है।
स्वास्थ्य मंत्री भी बोले- वजह समझ नहीं आ रही
लगातार हो रही मौतों पर स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि एक साथ इस तरह की घटनाएं होना हैरान करने वाला है।
मंत्री के अनुसार, शुरुआत में गर्मी को संभावित कारण माना गया था, लेकिन मौसम बदलने के बाद भी मौतों का सिलसिला जारी रहा। इसलिए अब प्रदेशभर के वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञों, अस्पताल अधीक्षकों और मेडिकल कॉलेजों के अधिकारियों को बुलाकर पूरे मामले की गहन जांच कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि फिलहाल ब्लड रिपोर्ट और अन्य शुरुआती जांच सामान्य मिली हैं, इसलिए वास्तविक कारण का पता लगाना सबसे बड़ी चुनौती है।
अस्पताल में संसाधनों की कमी पर भी उठे सवाल
भीलवाड़ा अस्पताल की व्यवस्था भी जांच के दायरे में है। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक यहां रोजाना 30 से 40 सीजेरियन ऑपरेशन किए जाते हैं, लेकिन अस्पताल के पास केवल 8 सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट सेट हैं। इनमें से पांच नियमित उपयोग में रहते हैं और तीन आपात स्थिति के लिए सुरक्षित रखे जाते हैं।
हर सेट को दोबारा इस्तेमाल करने से पहले करीब तीन घंटे तक स्टरलाइजेशन करना जरूरी होता है। ऐसे में लगातार ऑपरेशन के दबाव के बीच संक्रमण के खतरे को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
ऑपरेशन थिएटर की रिपोर्ट से बढ़ा सस्पेंस
जांच के दौरान एक ऑपरेशन थिएटर की कल्चर टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद मामला और गंभीर हो गया। हालांकि प्रशासन ने अभी तक इस रिपोर्ट और महिलाओं की मौतों के बीच किसी सीधे संबंध की पुष्टि नहीं की है।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. अरुण गौर का कहना है कि संक्रमण की नियमित निगरानी अस्पताल की सामान्य प्रक्रिया है। जिस ऑपरेशन थिएटर का सैंपल मानकों पर खरा नहीं उतरा, उसे तत्काल बंद कर दिया गया है और वहां दोबारा स्टरलाइजेशन व फ्यूमिगेशन कराया जा रहा है। नई रिपोर्ट निगेटिव आने तक वहां कोई सर्जरी नहीं होगी।
जयपुर से भेजी गई विशेषज्ञों की टीम
स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की जांच के लिए जयपुर से विशेषज्ञों की विशेष टीम गठित की है। इसमें माइक्रोबायोलॉजी, गायनेकोलॉजी, सर्जरी और एनेस्थीसिया विभाग के विशेषज्ञ शामिल हैं।
यह टीम मेडिकल रिकॉर्ड, ऑपरेशन प्रक्रिया, इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम, दवाइयों और संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था की बारीकी से जांच करेगी। सरकार का कहना है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या मेडिकल प्रोटोकॉल का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप, राजनीति भी गरमाई
मृतक महिलाओं के परिजनों ने डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। कई जगह अस्पतालों में विरोध प्रदर्शन भी हुए।
वहीं, कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरा है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि दो महीने में 18 महिलाओं की मौत बेहद चिंताजनक है और यह प्रदेश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में गहराते संकट का संकेत है। उन्होंने सरकार से जवाबदेही तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर मां बनने वाली महिलाओं पर यह अनजानी आफत क्यों टूट रही है? जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि इन मौतों के पीछे संक्रमण, चिकित्सा संबंधी जटिलताएं, संसाधनों की कमी या कोई और वजह जिम्मेदार है। तब तक पूरे राजस्थान की नजर इस हाई-प्रोफाइल जांच पर टिकी हुई है।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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