मानसून की विदाई की उलटी गिनती शुरू, राजस्थान से वापसी की शुरुआत, देश में सामान्य से 15 प्रतिशत कम हुई बारिश - monsoon withdrawal begins india faces 15 percent rainfall deficit
मानसून की विदाई की उलटी गिनती शुरू, राजस्थान से वापसी की शुरुआत, देश में सामान्य से 15 प्रतिशत कम हुई बारिश केरल में तीन जून को दस्तक देने वाले मानसून की विदाई शनिवार से राजस्थान के कुछ हिस्सों से शुरू हो ...और पढ़ें समय…

सौजन्य से:- Jagran
मानसून की विदाई की उलटी गिनती शुरू, राजस्थान से वापसी की शुरुआत, देश में सामान्य से 15 प्रतिशत कम हुई बारिश
केरल में तीन जून को दस्तक देने वाले मानसून की विदाई शनिवार से राजस्थान के कुछ हिस्सों से शुरू हो ...और पढ़ें
समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। केरल में तीन जून को दस्तक देने वाले मानसून की विदाई शनिवार से शुरू होने वाली है। राजस्थान के कुछ हिस्सों से मानसून की वापसी की स्थितियां बन गई हैं। अभी तक देश में सामान्य से 15 प्रतिशत कम बारिश हुई है। वितरण भी समान नहीं है।
सबसे ज्यादा वर्षा वाले मेघालय में इस बार सामान्य से 59 प्रतिशत कम और ओडिशा में लगभग 19 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। कम वर्षा का असर खरीफ के बाद रबी फसलों पर भी पड़ने की आशंका जताई जाने लगी है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, एक जून से 17 सितंबर तक देश में 686.4 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 806.8 मिलीमीटर होनी चाहिए थी। मतलब देश को सामान्य से 120 मिलीमीटर कम पानी मिला है। अब इस कमी की भरपाई के लिए समय भी सीमित रह गया है।
हालांकि सामान्य से कम बारिश का अर्थ यह नहीं है कि देश में सूखा पड़ गया।
बारिश का वितरण और जलाशयों में पानी की स्थिति अलग-अलग है। लेकिन जिन क्षेत्रों में लगातार कम बारिश के साथ मिट्टी में नमी और जल भंडार दोनों कम है, वहां सूखे का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में असली चिंता बारिश के असमान वितरण और मानसून की विदाई के बाद पानी की उपलब्धता को लेकर है।
अगले दो सप्ताह खरीफ की मौजूदा स्थिति और रबी की संभावनाओं के लिए महत्वपूर्ण होंगे। यदि सितंबर के बचे दिनों में अच्छी वर्षा हुई तो काफी हद तक भरपाई हो सकती है।
अच्छी बात यह है कि बंगाल की खाड़ी में सिस्टम बनने जा रहा है, जिससे अगले कुछ दिनों तक देश के पूर्वी हिस्से में अच्छी बारिश हो सकती है।
हालांकि, आंधी के साथ बारिश से फसलों को नुकसान ही होगा, क्योंकि खरीफ की फसलें इस समय पकने की स्थिति में हैं। फिर भी धान, मक्का, दलहन और तिलहन में इस समय होने वाली हल्की बारिश दाने भरने और फसल की अंतिम बढ़वार के लिए महत्वपूर्ण होती है। जहां बारिश की कमी रही है, वहां मिट्टी में नमी कम होने से पैदावार पर दबाव बढ़ेगा।
बिहार, पंजाब, हरियाणा, आंध्र प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों में सामान्य से कम वर्षा हुई है। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर पर 15 प्रतिशत की कमी पूरे क्षेत्र में एक जैसी नहीं है। कहीं ज्यादा तो कहीं कम। अब बड़ी चिंता रबी फसलों को लेकर भी है।
खरीफ के बाद गेहूं, चना, मसूर, सरसों की बोआई के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी और सिंचाई के लिए पानी की जरूरत होगी। जिन राज्यों में बारिश की कमी रही है, वहां यदि सितंबर के अंत तक पर्याप्त बारिश नहीं होती है तो खेतों में नमी कमजोर रह सकती है।
एक जून से 17 सितंबर तक बारिश का हाल
सामान्य से कम बारिश प्रतिशत में
मेघालय- 59
अरुणाचल- 41
पंजाब -39
बिहार -36
राजस्थान- 25
हरियाणा 22
हिमाचल प्रदेश- 09
झारखंड-08
मध्य प्रदेश- 07
छत्तीसगढ़- 05
उत्तर प्रदेश-04
सामान्य से अधिक वर्षा
ओडिशा- 19
दिल्ली : 08
उत्तराखंड- 04
(स्रोत -आईएमडी)
Powered by Reporting Rajasthan Files
संबंधित ख़बरें

राजस्थान में मानसून के बीच गर्मी का नया रिकॉर्ड: 10 साल में सितंबर सबसे गर्म, पारा 42 डिग्री के ऊपर; जानें- आगे कैसा रहेगा मौसम - Jaipur News

ब्यावर CM भजनलाल शर्मा का जैतारण दौरा, कहा- राजस्थान के किसानों को अगर पानी मिल जाए तो किसान फसल से सोना बना सकते हैं

मानसून की विदाई से पहले राजस्थान में गर्मी का अटैक: पारा 41.5


