जयपुर-UK व्यापार का नया अध्याय: शून्य सीमा शुल्क का लाभ, 2.5 अरब डॉलर का नया लक्ष्य
जयपुर से यूके के लिए पहली आभूषण निर्यात खेप रवाना हुई, जिसके तहत देशव्यापी पहल के तहत प्रमुख निर्यात केंद्रों से भी निर्यात किया जाएगा। इस पहल के तहत भारतीय रत्न एवं आभूषण निर्यातकों को यूके बाजार में शून्य ड्यूटी का लाभ मिलेगा।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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जयपुर से UK रवाना हुई पहली ज्वेलरी खेप:शून्य सीमा शुल्क का मिलेगा फायदा, 3 साल में 2.5 बिलियन का लक्ष्य
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जयपुर ने बुधवार को भारत–यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) के तहत एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए यूनाइटेड किंगडम (यूके) के लिए पहली आभूषण निर्यात खेप रवाना की।
सांगानेर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे स्थित एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स से रवाना की गई यह खेप देशव्यापी पहल का हिस्सा है, जिसके तहत दिल्ली, मुंबई, सूरत, चेन्नई और कोलकाता सहित प्रमुख निर्यात केंद्रों से भी पहली खेप यूके भेजी जा रही है।
करीब 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य की इस खेप में स्वर्ण, हीरा जड़ित, रजत और प्लेटिनम आभूषण शामिल हैं। जयपुर के प्रमुख निर्यातकों द्वारा जेम्स लिमिटेड, गैलेंट ज्वेलरी, विनायक ज्वेल्स इंडिया प्रा. लि. और वैभव ग्लोबल लिमिटेड इस ऐतिहासिक निर्यात का हिस्सा बने।
इस अवसर पर आयोजित समारोह में अतिरिक्त आयुक्त (सीमा शुल्क) नीरज दुबे, अतिरिक्त आयुक्त सुनीता वर्मा, उप आयुक्त (सीमा शुल्क) जितेंद्र मीणा तथा जीजेईपीसी राजस्थान के क्षेत्रीय अध्यक्ष योगेन्द्र गर्ग मौजूद रहे।
यूके बाजार में मिलेगा शून्य शुल्क का लाभ
भारत–यूके CETA लागू होने के साथ ही भारतीय रत्न एवं आभूषण निर्यातकों को यूके बाजार में जीरो ड्यूटी (Zero Duty) का लाभ मिलेगा। इससे पहले यूके में भारतीय आभूषणों पर 4 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता था, जो अब समाप्त हो जाएगा। इससे भारतीय निर्यातकों को करीब 4 बिलियन अमेरिकी डॉलर के यूके आभूषण बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलने की उम्मीद है।
सीमा शुल्क विभाग ने जताया भरोसा
सीमा शुल्क आयुक्त आर.के. चंदन ने कहा कि भारत–यूके CETA के तहत पहली निर्यात खेप भारत की निर्यात यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है। सीमा शुल्क विभाग तेज एवं सुगम क्लीयरेंस के माध्यम से व्यापार को हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।
GJEPC ने बताया ऐतिहासिक दिन
जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के अध्यक्ष किरीट भंसाली ने कहा कि यह केवल आभूषणों की पहली खेप नहीं, बल्कि भारत के वैश्विक व्यापार के नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने विश्वास जताया कि शून्य शुल्क सुविधा मिलने से भारत का रत्न एवं आभूषण निर्यात अगले तीन सालों में 754 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है।
जयपुर को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ
जीजेईपीसी राजस्थान के क्षेत्रीय अध्यक्ष योगेन्द्र गर्ग ने कहा कि रंगीन रत्नों और हस्तनिर्मित आभूषणों के वैश्विक केंद्र के रूप में जयपुर इस समझौते का सबसे बड़ा लाभार्थी बनेगा। इससे राजस्थान के रत्न एवं आभूषण उद्योग, एमएसएमई, कारीगरों और डिजाइनरों के लिए नए अवसर पैदा होंगे तथा रोजगार और निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।
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