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जगन्नाथ रथयात्रा: उदयपुर में 375 साल पुराने ऐतिहासिक रथ पर निकले भगवान, भक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम

जगन्नाथ रथयात्रा: उदयपुर में 375 साल पुराने ऐतिहासिक रथ पर निकले भगवान, भक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम उदयपुर और झालरापाटन में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निकाली गई. Published : July 16, 2026 at 7:02 PM IST उदयपुर/झाल…

ETV Bharat के अनुसार16 जुलाई 2026 को 02:56 pm बजे
जगन्नाथ रथयात्रा: उदयपुर में 375 साल पुराने ऐतिहासिक रथ पर निकले भगवान, भक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम

सौजन्य से:- ETV Bharat

जगन्नाथ रथयात्रा: उदयपुर में 375 साल पुराने ऐतिहासिक रथ पर निकले भगवान, भक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम

उदयपुर और झालरापाटन में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निकाली गई.

Published : July 16, 2026 at 7:02 PM IST

उदयपुर/झालावाड़: आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के पावन अवसर पर उदयपुर में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के माहौल में निकाली गई. देश की तीसरी और राजस्थान की सबसे बड़ी मानी जाने वाली इस रथयात्रा में इस बार इतिहास भी जीवंत रूप में शामिल हुआ. मंदिर स्थापना के बाद पहली बार लगभग 375 वर्ष पुराने ऐतिहासिक लकड़ी के रथ को मुख्य यात्रा में शामिल किया गया. यात्रा शुरू होने से पहले परंपरा के अनुसार 21 बंदूकों की सलामी दी गई, जिसने पूरे आयोजन को शाही गरिमा प्रदान की.

उदयपुर में सुबह से ही जगदीश चौक में हजारों श्रद्धालु जमा होने लगे. भगवान जगन्नाथ, माता लक्ष्मी और दानीराय जी की विधिवत पूजा-अर्चना के बाद रजत रथ और ऐतिहासिक लकड़ी के रथ का पूजन किया गया. इसके बाद भगवान को पालकी से रथ पर विराजमान कर जय जगन्नाथ के उद्घोष के साथ नगर भ्रमण के लिए रवाना किया गया, रथयात्रा के पूरे मार्ग पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा. भक्त भजन-कीर्तन गाते हुए रथ के साथ चले और जगह-जगह भगवान के दर्शन के लिए भारी भीड़ जुटती रही.

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375 साल पुराना ऐतिहासिक रथ: इस वर्ष रथयात्रा की सबसे बड़ी खासियत 375 वर्ष पुराने ऐतिहासिक लकड़ी के रथ का शामिल होना रहा. वर्षों तक संरक्षित इस धरोहर को पहली बार मुख्य रथयात्रा का हिस्सा बनाया गया, जिससे पूरे आयोजन का ऐतिहासिक महत्व कई गुना बढ़ गया. साथ ही मेवाड़ की शाही परंपराओं का भी पूर्ण निर्वहन किया गया. भगवान को शाही सम्मान देते हुए नगर भ्रमण के लिए रवाना किया गया. इस दौरान श्रद्धालुओं में अपार उत्साह देखने को मिला. यात्रा के दौरान जगदीश चौक, घंटाघर, बापू बाजार और अन्य प्रमुख मार्गों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही.

21 बंदूकों की सलामी: सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस और प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए थे. जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई, पुलिस बल और स्वयंसेवकों को तैनात किया गया, ताकि रथयात्रा शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हो सके. हर साल लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बनने वाली उदयपुर की जगन्नाथ रथयात्रा इस बार धार्मिक भावना के साथ-साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के कारण भी बेहद खास रही. 95 किलो चांदी के रजत रथ, 375 वर्ष पुराने लकड़ी के रथ, 21 बंदूकों की सलामी और मेवाड़ की परंपराओं के अद्भुत संगम ने इस वर्ष की रथयात्रा को अविस्मरणीय बना दिया.

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झालरापाटन में निकली रथयात्रा: झालावाड़ जिले के घंटियों के शहर व धार्मिक नगरी झालरापाटन में शुक्रवार को भक्ति, आस्था और परंपरा के रंग में पूरा कस्बा रंग गया. यहां जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर भगवान श्रीमन नारायण की 172वीं ऐतिहासिक रथयात्रा पूरे वैदिक विधि-विधान, बैंड-बाजों और जयघोष के साथ निकाली गई. किवदंती है कि भगवान श्रीमन नारायण तीन दिन अपने सुसराल में रहेंगे और वहां उनकी खूब आवभगत की जाएगी. इसी के साथ तीन दिवसीय धार्मिक महोत्सव की भी शुरुआत हो गई.

रथयात्रा के दर्शन के लिए जिले भर और आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े. रथ पर भगवान को विराजमान करने से पहले मंदिर प्रांगण में पारंपरिक हिंडोले में उन्हें झुलाया गया. इसके बाद भगवान को आकर्षक ढंग से सजे ऐतिहासिक काष्ठ निर्मित रथ में बैठाया गया. जैसे ही रथ आगे बढ़ा, पूरा शहर “जय श्रीमन नारायण” के जयघोष से गूंज उठा. श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया.

रथ को श्रद्धालुओं ने अपने हाथों से खींचते हुए शहर के प्रमुख मार्गों से होकर पवित्र चंद्रभागा नदी तट तक पहुंचाया. रथ खींचने के लिए भक्तों में अपार उत्साह दिखा और हर कोई इस पुण्य अवसर का हिस्सा बनने को उतावला नजर आया. श्रीमन नारायण मंदिर के मुख्य पुजारी राजेंद्र शर्मा ने बताया कि वर्ष 1863 ईस्वी में दक्षिण भारत के कांची मठ के स्वामी वेंकटाचार्य जी यहां आए थे. शहरवासियों के आग्रह पर उन्होंने भगवान श्रीमन नारायण की प्रतिमा स्थापित की, तभी से जगन्नाथपुरी की परंपरा के अनुरूप हर वर्ष यहां यह ऐतिहासिक रथयात्रा निकाली जाती है.

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