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Udaipur Nagar Nigam Mayor Result: कौन हैं पारस सिंघवी, जो बने उदयपुर के मेयर, लखनऊ से अयोध्या पैदल गए थे

Who is Paras Singhvi: उदयपुर नगर निगम महापौर चुनाव में भाजपा के पारस सिंघवी 55 वोट पाकर नए महापौर निर्वाचित हुए हैं। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को केवल 25 मत मिले। पारस सिंघवी उदयपुर में बीजेपी के सीनियर नेताओं में से ए…

navbharattimes.indiatimes.com के अनुसार21 सितंबर 2026 को 08:05 am बजे
Udaipur Nagar Nigam Mayor Result: कौन हैं पारस सिंघवी, जो बने उदयपुर के मेयर, लखनऊ से अयोध्या पैदल गए थे

सौजन्य से:- navbharattimes.indiatimes.com

Who is Paras Singhvi: उदयपुर नगर निगम महापौर चुनाव में भाजपा के पारस सिंघवी 55 वोट पाकर नए महापौर निर्वाचित हुए हैं। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को केवल 25 मत मिले। पारस सिंघवी उदयपुर में बीजेपी के सीनियर नेताओं में से एक हैं। वह पांचवीं बार पार्षद बने हैं।

उदयपुर: झीलों की नगरी उदयपुर के नगर निगम महापौर चुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं। मतगणना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिला निर्वाचन विभाग ने आधिकारिक घोषणा करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता पारस सिंघवी को उदयपुर का नया महापौर (मेयर) घोषित कर दिया है। महापौर पद के लिए हुए सीधे मुकाबले में भाजपा प्रत्याशी पारस सिंघवी ने एकतरफा जीत हासिल की। कुल 80 पार्षदों के बोर्ड में पारस सिंघवी को 55 मत प्राप्त हुए, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को मात्र 25 मतों से ही संतोष करना पड़ा।

उदयपुर नगर निगम के 80 वार्डों के चुनाव परिणामों में भाजपा के पास 53 पार्षद थे, जबकि कांग्रेस के 23 और अन्य पार्षद थे। महापौर चुनाव के दौरान भाजपा को अपनी पार्टी के 53 वोटों के अलावा 2 निर्दलीय पार्षदों का भी साथ मिला, जिससे भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में कुल वोटों का आंकड़ा 55 तक पहुंच गया।

पारस सिंघवी के समर्थकों ने बजाए छोल नगाड़े

जीत की औपचारिक घोषणा होते ही भाजपा खेमे और कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। नवनिर्वाचित महापौर पारस सिंघवी का समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ स्वागत किया। सिंघवी ने अपनी इस जीत को शहर की जनता और भाजपा कार्यकर्ताओं का विश्वास बताया और उदयपुर के समग्र विकास को अपनी पहली प्राथमिकता करार दिया।

कौन हैं पारस सिंघवी

पारस सिंघवी उदयपुर में बीजेपी के सीनियर नेताओं में से एक हैं। वह पांचवीं बार पार्षद बने हैं। उनका मेयर चुने जाना पहले से ही लगभग तय था। छात्रसंघ से राजनीति में कदम रखने वाले पारस सिंघवी पिछली बार डिप्टी मेयर रह चुके हैं। व्यापारिक संगठनों में भी उनकी अच्छी मजबूत पकड़ है। नगर निगम चुनाव में उन्होंने वार्ड नंबर 24 से जीत दर्ज की थी। उदयपुर नगर निगम में 80 में से 53 वार्ड बीजेपी के कब्जे में थे। ऐसे में उनका मेयर चुना जाना लगभग तय था।

62 साल के पारस सिंघवी को सिक्किम के राज्यपाल ओम माथुर का नजदीकी माना जाता है। इसके अलावा मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष मदन राठौड़ से भी उनके अच्छे संबंध हैं। 10 मई, 1964 को जन्मे पारस सिंघवी राम मंदिर को लेकर आंदोलन में भी शामिल रहे हैं। 90 के दशक में राम मंदिर आंदोलन के समय वह लखनऊ से अयोध्या तक पैदल यात्रा पर गए थे।

होटल और ट्रैवल का बिजनेस

पारस सिंघवी पेशे से बिजनेसमैन हैं। उनका ट्रैवल्स और होटल का बिजनेस है। उदयपुर में पारस ट्रैवल्स के नाम से उनकी बसें चलती हैं। उनका पारस होटल भी है। उन्होंने बी कॉम तक पढ़ाई की है। चुनावी हलफनामे के मुताबिक उनकी कुल संपत्ति 3.69 करोड़ रुपये है।

लेखक के बारे मेंखुशेंद्र तिवारीखुशेंद्र तिवारी नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर कंटेट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में राजस्थान के लिए कवर करते हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों की राजनीति की खबरें कवर करते हैं। खुशेंद्र तिवारी पत्रकारिता की शुरुआत समाचार पत्र से की। बीते 6 सालों से डिजिटल मीडिया के लिए काम कर रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 15 सालों का अनुभव है। समाचार पत्र में पहले रिपोर्टिंग और बाद में डेस्क पर काम किया। साल 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत । राजस्थान की राजनीति, सामाजिक और अपराध की खबरें कवर करता हैं । डेस्क के साथ-साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है । अभी तक राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर, शिक्षा और कला जैसे विषयों पर काम किया है। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय की है। प्रिंट में काम करने के बाद पिछले छह साल से डिजिटल में नए एक्सपीरियंस के साथ लर्निंग जारी है।

विशेषता: ब्यूरोक्रेसी, पॉलिटिक्ल, आर्ट एंड कल्चर, एजुकेशन और अपराध की खबरों में विशेष दिलचस्पी है। बड़े घटनाक्रमों पर अलग-अलग एंगलों से खबरें लिखना। ओपिनियन लिखना।

पत्रकारिता का अनुभव: पत्रकारिता में कुल 15 सालों का अनुभव है। पत्रकारिता में दिलचस्पी और शुरुआत अखबारों में छोटे- छोटे लेख भेजकर की। इसके बाद इसी क्षेत्र में पोस्ट ग्रेजुएशन कर विधिवत रूप से राजस्थान पत्रिका में फील्ड रिपोर्टिंग की। सबसे पहले आर्ट एंड कल्चर, इसके बाद एजुकेशन की फील्ड में काम किया। \ रिपोर्टिंग के बाद डेस्क के अनुभव को भी समझा।... और पढ़ें

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