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Sunil Kothari Jaipur: कभी छोड़ना पड़ा था जिलाध्यक्ष का पद, जानें अब कैसे हुई सुनील कोठारी की 'टाइगर इज बैक' वाली एंट्री!

जयपुर नगर निगम के मेयर पद के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता सुनील कोठारी मेयर प्रत्याशी बनाया है। वार्ड 112 से चुनाव जीतने वाले सुनील कोठारी का राजनीतिक सफर भी काफी उतार चढ़ाव से भरा रहा है। कभी उन्हें जयपुर जिलाध्यक्ष का पद…

Navbharat Times के अनुसार20 सितंबर 2026 को 11:04 am बजे
Sunil Kothari Jaipur: कभी छोड़ना पड़ा था जिलाध्यक्ष का पद, जानें अब कैसे हुई सुनील कोठारी की 'टाइगर इज बैक' वाली एंट्री!

सौजन्य से:- Navbharat Times

जयपुर नगर निगम के मेयर पद के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता सुनील कोठारी मेयर प्रत्याशी बनाया है। वार्ड 112 से चुनाव जीतने वाले सुनील कोठारी का राजनीतिक सफर भी काफी उतार चढ़ाव से भरा रहा है। कभी उन्हें जयपुर जिलाध्यक्ष का पद छोड़ना पड़ा था।

जयपुर: भारतीय जनता पार्टी ने जयपुर नगर निगम के मेयर पद के लिए अपने पत्ते खोलते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता सुनील कोठारी मेयर प्रत्याशी बनाया है। वार्ड 112 से नव निर्वाचित पार्षद सुनील कोठारी बीजेपी में अपनी अलग जगह और पहचान रखते हैं, लेकिन राजनीति में उन्होंने भी काफी उतार चढ़ाव का दौर देखा है। हाल ही जयपुर नगर निगम चुनाव जीतने के बाद एक बार फिर पार्टी ने उन पर विश्वास जताया है। बता दें कि जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में से भाजपा ने 78 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। ऐसे में सुनील कोठारी का जयपुर का अगला मेयर बनना लगभग तय माना जा रहा है।

छोड़ना पड़ा था जिलाध्यक्ष पद

सुनील कोठारी के राजनीतिक सफर में एक वक्त ऐसा भी आया जब उन्हें अपने ही पद से इस्तीफा देना पड़ा था। जनवरी 2020 में पार्टी ने उन्हें जयपुर शहर बीजेपी अध्यक्ष की कमान सौंपी थी। हालांकि, मीडिया रिपोटर्स के अनुसार बेहद सरल और सौम्य स्वभाव के चलते वे पार्टी के भीतर अलग-अलग गुटों को एक मंच पर लाने में सहज नहीं हो सके। गुटबाजी और आपसी तालमेल के अभाव के चलते वे लंबे समय तक अपनी शहर कार्यकारिणी का गठन ही नहीं कर पाए। कार्यकारिणी के गठन में हो रही देरी और हर पार्टी में होने वाली अंदरूनी खींचतान के बीच आखिरकार महज 7-8 महीनों के भीतर ही, अगस्त 2020 में उनसे जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा ले लिया गया था। इसके बाद वे करीब ढाई साल तक मुख्यधारा की सक्रिय राजनीति से थोड़े दूर रहे।

2023 चुनाव से वापसी और 'म्हारा जयपुर' अभियान

सक्रिय राजनीति से कुछ समय से दूर दिखाई दिए सुनील कोठारी ने साल 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में पार्टी ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया। उन्हें प्रदेश स्तरीय चुनाव प्रबंधन समिति तथा आर्थिक समिति का सदस्य बनाया। हालांकि राजनीति से परे सुनील कोठारी सामाजिक मोर्चों पर भी काफी मुखर रहे। सुनील कोठारी के कम बैक का पार्टी को फिर फायदा मिला। जब तत्कालीन गहलोत सरकार ने जयपुर को दो जिलों में विभाजित करने का निर्णय लिया, तब कोठारी ने 'म्हारा जयपुर, प्यारा जयपुर, हमें चाहिए एक जयपुर'अभियान चलाया।

जयपुर को लेकर चलाए अभियान की हुई थी तारीफ

राजनीति के जानकार और पार्टी नेताओं के अनुसार उनके अभियान का खास असर दिखा। इस दौरान सुनील कोठारी ने दौरान संकल्प भी लिया था कि जयपुर के विभाजन का फैसला टलने पर वे सांगानेर के सांगा बाबा मंदिर से आमेर के शिला माता मंदिर तक पदयात्रा निकालेंगे। प्रदेश में भाजपा सरकार बनने और फैसला लागू न होने पर उन्होंने 4 फरवरी 2024 को यह विशाल पदयात्रा निकालकर अपना संकल्प पूरा किया।

किशनपोल से जीत और मेयर पद पर दावेदारी

संघ पृष्ठभूमि से आने वाले और पेशे से जाने-माने ज्वैलर सुनील कोठारी को पार्टी ने वार्ड 112 (किशनपोल क्षेत्र) से मैदान में उतारा था। यहां उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी आशीष शर्मा को 905 वोटों से मात दी। वरिष्ठता, साफ-सुथरी छवि, और विधायकों के साथ बेहतर तालमेल के आधार पर सीएमआर में हुई बैठक और पार्षदों की रायशुमारी के बाद पार्टी ने उन्हें मेयर प्रत्याशी घोषित किया है। उनका जयपुर मेयर बनना लगभग तय माना जा रहा है।

लेखक के बारे मेंखुशेंद्र तिवारीखुशेंद्र तिवारी नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर कंटेट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में राजस्थान के लिए कवर करते हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों की राजनीति की खबरें कवर करते हैं। खुशेंद्र तिवारी पत्रकारिता की शुरुआत समाचार पत्र से की। बीते 6 सालों से डिजिटल मीडिया के लिए काम कर रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 15 सालों का अनुभव है। समाचार पत्र में पहले रिपोर्टिंग और बाद में डेस्क पर काम किया। साल 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत । राजस्थान की राजनीति, सामाजिक और अपराध की खबरें कवर करता हैं । डेस्क के साथ-साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है । अभी तक राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर, शिक्षा और कला जैसे विषयों पर काम किया है। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय की है। प्रिंट में काम करने के बाद पिछले छह साल से डिजिटल में नए एक्सपीरियंस के साथ लर्निंग जारी है।

विशेषता: ब्यूरोक्रेसी, पॉलिटिक्ल, आर्ट एंड कल्चर, एजुकेशन और अपराध की खबरों में विशेष दिलचस्पी है। बड़े घटनाक्रमों पर अलग-अलग एंगलों से खबरें लिखना। ओपिनियन लिखना।

पत्रकारिता का अनुभव: पत्रकारिता में कुल 15 सालों का अनुभव है। पत्रकारिता में दिलचस्पी और शुरुआत अखबारों में छोटे- छोटे लेख भेजकर की। इसके बाद इसी क्षेत्र में पोस्ट ग्रेजुएशन कर विधिवत रूप से राजस्थान पत्रिका में फील्ड रिपोर्टिंग की। सबसे पहले आर्ट एंड कल्चर, इसके बाद एजुकेशन की फील्ड में काम किया। \ रिपोर्टिंग के बाद डेस्क के अनुभव को भी समझा।... और पढ़ें

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