मानसून में जयपुर की हरियाली की कहानी: झरनों से लेकर सोशल मीडिया तक
मानसून के दौरान जयपुर में अरावली की पहाड़ियों में बहने वाले झरने, बादलों से ढकी चोटियां और प्राकृतिक जलधाराएं सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं.

सौजन्य से:- ETV Bharat
Special : मानसून में हरियाली की चादर ओढ़ता जयपुर, जहां बहते हैं अरावली के झरने...युवाओं के लिए वीकेंड एडवेंचर हब
इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब व्लॉग्स और फेसबुक पोस्ट के जरिए ये प्राकृतिक स्थल लाखों लोगों तक पहुंच रहे हैं. अंकुर जाकड़ की रिपोर्ट...
Published : July 19, 2026 at 4:35 PM IST
जयपुर: राजस्थान के जयपुर की पहचान सिर्फ किलों, महलों और हवेलियों तक सीमित नहीं है. मानसून की बारिश के साथ ही अरावली की पहाड़ियां हरियाली की चादर ओढ़ लेती हैं और इनके बीच बहने वाले झरने शहर को एक अलग ही रूप दे देते हैं. घाट की गुणी, प्रभातपुरी, आमेर, नाहरगढ़ और आसपास के प्राकृतिक स्थल बारिश के दिनों में युवाओं के सबसे पसंदीदा वीकेंड डेस्टिनेशन बन जाते हैं.
सोशल मीडिया रील्स और वायरल फोटोग्राफी इन जगहों को नई पहचान देती है. यही वजह है कि स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूसरे राज्यों से आने वाले पर्यटक भी इन प्राकृतिक स्थलों की तलाश में जयपुर पहुंच जाते हैं. हालांकि, बढ़ती भीड़ के साथ सुरक्षा और व्यवस्थाओं की चुनौती भी सामने आने लगी है.
अरावली की गोद में बसता है प्राकृतिक जयपुर : बारिश शुरू होते ही जयपुर का एक बिल्कुल अलग चेहरा सामने आता है. सूखी दिखने वाली अरावली पर्वत शृंखला कुछ ही दिनों में हरियाली से भर जाती है. पहाड़ियों से बहते झरने, बादलों से ढकी चोटियां और प्राकृतिक जलधाराएं शहरवासियों को प्रकृति के बेहद करीब ले आती हैं. यही वजह है कि वीकेंड आते ही बड़ी संख्या में युवा ट्रेकिंग, नेचर वॉक, फोटोग्राफी और परिवार के साथ घूमने के लिए इन स्थलों का रुख करते हैं.
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सोशल मीडिया ने बदली इन जगहों की पहचान : कुछ साल पहले तक इन प्राकृतिक स्थलों की जानकारी केवल स्थानीय लोगों तक सीमित थी, लेकिन अब इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब व्लॉग्स और फेसबुक पोस्ट के जरिए ये स्थान लाखों लोगों तक पहुंच रहे हैं. स्थानीय निवासी बताते हैं कि कई पर्यटक मोबाइल में रील दिखाकर इन जगहों का रास्ता पूछते हैं. सोशल मीडिया ने जयपुर के मानसून सीजन में पर्यटन को नई गति दी है.
बारिश के बाद अरावली की पहाड़ियों से बहने वाले झरने पूरे शबाब पर दिखाई देते हैं और चारों ओर फैली हरियाली युवाओं को अपनी ओर खींचती है. जलमहल के सामने स्थित प्रभातपुरी का खोल स्थानीय लोगों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हुआ है. पहाड़ियों के बीच बहती जलधारा और प्राकृतिक हरियाली इसे फोटोशूट और रील्स के लिए आदर्श स्थान बनाती है. वीकेंड पर यहां बड़ी संख्या में लोग प्रकृति का आनंद लेने पहुंचते हैं.
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आमेर और नाहरगढ़ में मानसून का अलग ही अनुभव : आमेर की वादियां, मावठा झील, सागर क्षेत्र, भूतेश्वर महादेव, शीशमहल दरवाजा और नाहरगढ़ की पहाड़ियों में मानसून के दौरान प्राकृतिक सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है. यहां छोटे-बड़े झरने सक्रिय हो जाते हैं और बादलों से घिरी पहाड़ियां पर्यटकों को अलग ही अनुभव देती हैं. नाहरगढ़ की पहाड़ियों से शहर का हरा-भरा दृश्य लोगों की यादों का हिस्सा बन जाता है.
स्टेट अवॉर्डी टूरिस्ट गाइड महेश शर्मा ने बताया कि जयपुर केवल किलों और महलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां प्रकृति भी उतनी ही समृद्ध है. मानसून के दौरान आमेर, सागर, भूतेश्वर महादेव, नाहरगढ़, आथुनी कुंड और अरावली की पहाड़ियों में बहते झरने पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं. सोशल मीडिया के कारण इन स्थानों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है. पहले केवल स्थानीय लोग इन जगहों पर पहुंचते थे. वहीं, अब बाहरी राज्यों और विदेशी पर्यटक भी इन प्राकृतिक स्थलों के बारे में जानकारी लेकर यहां पहुंच रहे हैं.
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राजस्थान की रेगिस्तानी छवि से अलग दिखता है जयपुर : देश-विदेश से आने वाले अधिकांश पर्यटक राजस्थान को रेगिस्तान के रूप में देखते हैं, लेकिन मानसून के दौरान जयपुर उन्हें बिल्कुल अलग अनुभव देता है. चारों ओर फैली हरियाली, बादलों से घिरी अरावली और पहाड़ियों से गिरते झरने राजस्थान की एक नई तस्वीर प्रस्तुत करते हैं. ऊंचाई से देखने पर पूरी अरावली मानो हरे कालीन की तरह दिखाई देती है. मानसून के दौरान जयपुर का पर्यटन पारंपरिक हेरिटेज टूरिज्म से आगे बढ़कर एडवेंचर और नेचर टूरिज्म का रूप ले लेता है. मावठा झील में बोटिंग, झालाना सफारी और पहाड़ियों में ट्रेकिंग जैसी गतिविधियां पर्यटकों को नया अनुभव देती हैं.
सोशल मीडिया से बढ़ रही है भीड़ : जलमहल और प्रभातपुरी क्षेत्र के स्थानीय जनप्रतिनिधि विक्रम सिंह तंवर बताते हैं कि आमेर रोड पर पूरे साल पर्यटक आते हैं, लेकिन मानसून में उनकी संख्या कई गुना बढ़ जाती है. पहाड़ियों के बीच स्थित मंदिर, बावड़ियां और प्राकृतिक झरने लोगों को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं. उन्होंने कहा कि कई पर्यटक सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो दिखाकर इन स्थानों तक पहुंचने का रास्ता पूछते हैं.
बढ़ती लोकप्रियता के साथ बढ़ रही सुरक्षा की चिंता : जहां एक ओर प्राकृतिक पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा व्यवस्था अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है. स्थानीय निवासी विनोद नेगी बताते हैं कि जिस दिन झरनों में पानी का बहाव अच्छा होता है, उस दिन प्रभातपुरी और आसपास के क्षेत्रों में भारी भीड़ उमड़ पड़ती है, लेकिन यहां सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है. आथुनी कुंड सहित कई स्थानों पर हर वर्ष हादसे होते हैं. फिसलन भरी चट्टानें, तेज बहाव और सुरक्षा रेलिंग की कमी जोखिम बढ़ा देती है.
मानसून टूरिज्म जयपुर के लिए भी खास : यदि इन प्राकृतिक स्थलों का प्रकृति से जुड़ाव रखते हुए सुनियोजित विकास किया जाए तो जयपुर का मानसून टूरिज्म यहां की पर्यटन अर्थव्यवस्था का नया आधार बन सकता है. इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा, होम-स्टे, कैफे, एडवेंचर गतिविधियों और स्थानीय व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलेगा. साथ ही जयपुर की पहचान केवल हेरिटेज सिटी ही नहीं, बल्कि 'नेचर एंड मानसून डेस्टिनेशन' के रूप में भी स्थापित हो सकती है.
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