फॉरेस्ट रेंजर की मौत पर SC सख्त, राजस्थान सरकार से मांगा जवाब
फॉरेस्ट रेंजर की मौत पर SC सख्त, राजस्थान सरकार से मांगा जवाब फॉरेस्ट रेंजर प्रताप सिंह चुंडावत की डंपर से कुचलकर हुई मौत का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. कोर्ट ने इस मामले में राजस्थान सरकार से अब तक की कार्रवाई…

सौजन्य से:- ABP News
फॉरेस्ट रेंजर की मौत पर SC सख्त, राजस्थान सरकार से मांगा जवाब
फॉरेस्ट रेंजर प्रताप सिंह चुंडावत की डंपर से कुचलकर हुई मौत का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. कोर्ट ने इस मामले में राजस्थान सरकार से अब तक की कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.
राजस्थान के प्रतापगढ़ में फॉरेस्ट रेंजर प्रताप सिंह चुंडावत की डंपर से कुचलकर हुई मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने घटना को गंभीर और तत्काल ध्यान देने वाला मामला मानते हुए राजस्थान सरकार से अब तक की कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी.
मामला 21 सितंबर की देर रात छोटी सादड़ी क्षेत्र का है. पुलिस के अनुसार, वन विभाग की टीम को क्षेत्र में कथित अवैध मिट्टी खनन की सूचना मिली थी. इसके बाद फॉरेस्ट रेंजर प्रताप सिंह चुंडावत टीम के साथ मौके पर पहुंचे.
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अवैध मिट्टी खनन के खिलेफ एक्शन पड़ा भारी?
सादड़ी क्षेत्र में तालाब के पास जेसीबी से अवैध तरीके से मिट्टी की खुदाई किए जाने की बात सामने आई थी. इसी दौरान मिट्टी लेकर जा रहे डंपर को रोकने की कोशिश की गई. आरोप है कि डंपर चालक ने रेंजर की बाइक को टक्कर मार दी और उन्हें बाइक समेत काफी दूर तक घसीटता हुआ ले गया. गंभीर चोटों के चलते प्रताप सिंह की मौत हो गई. इस घटना का उल्लेख सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता निखिल गोयल ने किया. निखिल गोयल राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध रेत खनन से जुड़े मामले में न्यायमित्र के तौर पर कोर्ट की मदद कर रहे हैं.
राज्य सरकार ने मामले पर क्या कहा?
सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने बताया कि इस घटना का चंबल अभयारण्य से सीधा संबंध नहीं है और इसे अवैध रेत खनन का मामला नहीं बताया गया है. उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि पुलिस महानिदेशक से बात की गई है और कार्रवाई शुरू की जा चुकी है. राज्य सरकार विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करेगी.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए पहले से प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है. कोर्ट ने अवैध खनन से जुड़े संगठित अपराधों में निवारक निरोध जैसे सख्त कानूनी कदमों पर भी विचार करने की बात कही. इससे पहले 22 जुलाई के आदेश में भी कोर्ट ने संगठित अवैध खनन से जुड़े सरगनाओं और आदतन अपराधियों के खिलाफ निवारक कार्रवाई पर विचार करने को कहा था.
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