Sachin Pilot: दोस्तों ने की थी बगावत! पर पायलट टस से मस नहीं हुए, सचिन के जन्मदिन पर जानें उनसे जुड़े रोचक किस्से
Sachin Pilot Birthday Special: कांग्रेस के दिग्गज नेता और राजस्थान में युवाओं की आवाज बनने वाले सचिन पायलट आज 49 साल के हो गए हैं। पायलट के जन्मदिन पर उनके दोस्तों से जुड़े कुछ अहम किस्से NBT पर आगे पढ़िए। जयपुर: कांग्रे…

सौजन्य से:- Navbharat Times
Sachin Pilot Birthday Special: कांग्रेस के दिग्गज नेता और राजस्थान में युवाओं की आवाज बनने वाले सचिन पायलट आज 49 साल के हो गए हैं। पायलट के जन्मदिन पर उनके दोस्तों से जुड़े कुछ अहम किस्से NBT पर आगे पढ़िए।
जयपुर: कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और टोंक के विधायक सचिन पायलट का आज 49 वां जन्मदिन है। इसको लेकर उनके समर्थकों में जमकर उत्साह देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया पर पायलट को बधाई देने वाले लोगों की काफी भीड़ नजर आ रही है। वहीं कांग्रेस के तमाम छोटे-बड़े नेता भी, उन्हें सोशल मीडिया पर जन्मदिन की शुभकामनाएं दे रहे हैं। सचिन पायलट का अब तक का सियासी सफर कई उतार चढ़ाव में रहा। इसको लेकर एक किस्सा काफी सुर्खियों में है, जो सचिन पायलट की कांग्रेस पार्टी के प्रति निष्ठा और समर्पण की मिसाल पेश करता है। इस रिपोर्ट में जानिए सचिन पायलट और उनके सियासी दोस्तों के बीच का वह रोचक किस्सा, जो आज भी मिसाल बना हुआ है।
दोस्तों ने की बगावत, लेकिन पायलट नहीं हुए टस से मस
सचिन पायलट को राजनीति अपने पारिवारिक विरासत में मिली है, लेकिन उसे संजोने का काम पायलट ने खुद अपनी योग्यता के दम पर किया। इसी का परिणाम है कि सचिन पायलट कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हैं, उनकी लोकप्रियता राजस्थान ही नहीं, पूरे देश में देखने को मिलती है। पायलट की अपनी पार्टी के प्रति निष्ठा और समर्पण कांग्रेस में एक मिसाल है। सचिन पायलट के कई सियासी दोस्त, जो उनके काफी करीब रहे। लेकिन समय विपरीत आने के बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन छोड़कर बीजेपी को थाम लिया। वहीं सचिन पायलट ऐसे शख्स हैं जिन्होंने अपने करियर में काफी उतार चढ़ाव देखे, लेकिन फिर भी पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा को आंच नहीं आने दी। उसी का परिणाम है कि पार्टी हाईकमान का विश्वास पायलट पर बढ़ता ही जा रहा है।
पायलट के इन दोस्तों ने की बगावत
सचिन पायलट, जिन्होंने कभी भी विपरीत परिस्थिति में अपना धैर्य नहीं खोया। सदा अपने सियासी भाषण में संयमित भाषा का प्रयोग किया। हालांकि मानेसर मुद्दे के कारण यह सियासी चर्चा रही कि वह भी बीजेपी से मिलकर गहलोत सरकार को गिरा सकते है, लेकिन पायलट ने ऐसा नहीं किया। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पायलट को लेकर कई तीखे बयान भी दिए, फिर भी पायलट ने अपना संयम नहीं खोया। इधर, पायलट के कुछ खास सियासी दोस्त, जो उनके काफी करीब थे। इनमें कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया, आरपीएन सिंह, जितिन प्रसाद और मलिंद देवड़ा रहे। जिन्होंने विपरीत परिस्थिति में पार्टी बदल दी।
ज्योतिरादित्य सिंधिया 2020 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए।
आरपीएन सिंह 2022 में बीजेपी में शामिल हुए।
जितिन प्रसाद भी उत्तर प्रदेश के कद्दावर युवा नेता रहे, उन्होंने भी 2021 में बीजेपी ज्वाइन की।
इसी तरह मलिंद देवड़ा जिन्होंने कांग्रेस छोड़कर एनडीए (शिवसेना शिंदे गुट) का हिस्सा बने।
पायलट विपरीत परिस्थिति में भी नही हुए डगमग
राजस्थान की सियासत में 2020 का मानेसर घटनाक्रम सदा सुर्खियों में रहता है। कांग्रेस में अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद खींचतान देखने को मिली। इस बीच पायलट अपने समर्थक विधायकों को लेकर मानेसर चले गए। इस दौरान सियासी गलियारों में यह चर्चा रही कि पायलट बीजेपी के संपर्क में है और उनके सहयोग से अशोक गहलोत सरकार की सत्ता पलट सकते हैं, लेकिन पायलट ने ऐसा नहीं किया। सियासी घटनाक्रम के बाद पायलट राजस्थान लौट गए। हालांकि उन्हें उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटा दिया गया। गहलोत ने पायलट को लेकर कई आपत्तिजनक टिप्पणियां की, लेकिन सचिन पायलट फिर भी शांत रहे और उन्होंने अपना धैर्य नहीं खोया। उसी का परिणाम है कि पायलट ने पार्टी हाईकमान का विश्वास लगातार जीता है। आज पायलट कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और हाल ही में बनाए गए पंजाब के प्रभारी भी हैं।
लेखक के बारे मेंपुलकित सक्सेनापुलकित सक्सेना नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। वह साल 2022 नवंबर महीने से नवभारत टाइम्स की डिजिटल विंग से जुड़े। वर्तमान में राजस्थान के लिए काम करते हैं। 2019 में पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली के नेशनल टीवी चैनल में इनपुट डेस्क से की। बीते 7 सालों में टेलीविजन से लेकर सोशल मीडिया और अब डिजिटल मीडिया में काम कर रहे हैं। वर्तमान में नवभारत टाइम्स में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका में कार्यरत हैं।
राजस्थान की राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर्स और ऑफ बीट खबरों पर नजर रखना पुलकित सक्सेना की पहली प्राथमिकता रहती है।
विशेषज्ञता- राजनीति, क्राइम, एनलिसिस, सियासी उठा पटक को कवर करना।
पत्रकारिता अनुभव: 7 साल से कार्यरत
पुलकित सक्सेना ने साल 2017 में जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन पूरी की। साल 2019 में देश की प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी से दिल्ली में प्रथम श्रेणी से पोस्ट ग्रेजुएशन पत्रकारिता में किया। इसके बाद साल 2019 में दिल्ली से टीवी 100 न्यूज चैनल से पत्रकारिता की शुरुआत की। इसके बाद राजस्थान के यूट्यूब न्यूज चैनल में एंकरिंग, पैकेज क्रिएशन और सोशल मीडिया हैंडल के लिए सक्रियता से काम किया। साल 2022 के नवंबर महीने में वह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में जुड़े। वर्तमान में बीते तीन साल से वह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।... और पढ़ें
कन्वर्सेशन शुरू करें
Stateकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
Powered by Reporting Rajasthan Files
संबंधित ख़बरें

अलवर CM भजनलाल शर्मा का अलवर में रोड शो, कहा- कांग्रेस राजस्थान की जनता को बरगलाना बंद करें

जस्टिस संजय के.अग्रवाल ने ली राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ, जानें उनका छत्तीसगढ़ से जयपुर तक का सफर

जयपुर: नगरीय निकाय चुनाव मतदान के दिन जयपुर में अवकाश घोषित, 9 सितंबर को 18 नगर निकायों में मतदान के दिन रहेगा सार्वजनिक अवकाश


