Research IN Jodhpur IIT: बिल्डिंग्स के फायर सेफ्टी टिप्स के साथ ढांचे का भविष्य बताएगा शोध
Research IN Jodhpur IIT: बिल्डिंग्स के फायर सेफ्टी टिप्स के साथ ढांचे का भविष्य बताएगा शोध आग से इमारत के ढांचे को कितना नुकसान पहुंचा या नुकसान के बाद ढांचा कब तक चलेगा, इसका पता लगाने को रिसर्च हो रहा हैं. Published :…

सौजन्य से:- ETV Bharat
Research IN Jodhpur IIT: बिल्डिंग्स के फायर सेफ्टी टिप्स के साथ ढांचे का भविष्य बताएगा शोध
आग से इमारत के ढांचे को कितना नुकसान पहुंचा या नुकसान के बाद ढांचा कब तक चलेगा, इसका पता लगाने को रिसर्च हो रहा हैं.
Published : July 7, 2026 at 6:59 PM IST
जोधपुर: देश में इमारतों में आग लगने के मामले बढ़ रहे हैं. ऐसे में IIT जोधपुर भविष्य की फायर सेफ्टी टेक्नोलॉजी तैयार कर रहा है. शोधकर्ता आग से बचाव, कंस्ट्रक्शन की क्वालिटी मैनेजमेंट, सस्टेनेबिलिटी का आंकलन और इमारतों व इंफ्रास्ट्रक्चर के इंटेलिजेंट लाइफ साइकिल मैनेजमेंट के लिए एडवांस्ड कंप्यूटेशनल तरीके, टेक्नोलॉजी और ओपन-सोर्स डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित कर रहे हैं. खास तौर से आग के दौरान इमारत के ढांचे को कितना नुकसान पहुंचा या नुकसान के बाद ढांचा कब तक चलेगा, इसका पता लगाने को रिसर्च हो रहा हैं. IIT जोधपुर की यह रिसर्च निर्मित पर्यावरण (बिल्ट एनवायरनमेंट) के लिए अगली पीढ़ी की डिजिटल इंजीनियरिंग को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम कदम है.
ढांचे के व्यवहार का अध्ययन: IIT जोधपुर के सिविल और इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पी रवि प्रकाश के नेतृत्व में यह रिसर्च ग्रुप एडवांस्ड कंप्यूटेशनल टेक्नोलॉजी विकसित कर रहा है. इस तकनीक से इमारतों के डिजाइन, आंकलन और आग से सुरक्षा के तरीके को पूरी तरह से बदला जा सकता है. डॉ. रवि प्रकाश ने बताया कि बड़ी इमारतों में हर आग याद दिलाती है कि जान बचाने को सिर्फ आग बुझाना काफी नहीं है. इसके लिए समझना होगा कि आग लगने से पहले, आग के दौरान और आग के बाद इमारत का ढांचा कैसा व्यवहार करता है. हमारी रिसर्च का मकसद इंजीनियरों, पॉलिसी मेकर और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को ऐसे एडवांस्ड कंप्यूटेशनल टूल देना है, जिनसे वे ढांचे के फेल होने का अनुमान लगा सकें. आग से क्षतिग्रस्त इमारतों का तेजी से आंकलन कर सकें और डिजाइन प्रोसेस में आग से बचाव की क्षमता यानी फायर रेजिलिएंस को शामिल कर सकें.
फायर सेफ्टी से आगे की सोच: यह रिसर्च परफॉर्मेंस-बेस्ड स्ट्रक्चरल फायर इंजीनियरिंग पर केंद्रित है, जो उभरता वैज्ञानिक दृष्टिकोण है और फायर सेफ्टी के तय नियमों से कहीं आगे जाता है. इस अध्ययन में पता लगा रहे हैं कि आग की भीषण स्थितियों में पूरी इमारतें कैसा व्यवहार करती हैं, जिससे इंजीनियर स्ट्रक्चरल नुकसान का अनुमान लगा सकते हैं, कमजोर हिस्सों की पहचान कर सकते हैं, स्ट्रक्चरल डिजाइन में सुधार कर सकते हैं और आपदा आने से पहले ही सुरक्षा क्षमता को बेहतर बना सकते हैं. कई मामलों में आग बुझने के बाद भी, स्ट्रक्चरल फेलियर (संरचनात्मक विफलता) अक्सर होती है. IIT जोधपुर की टीम ने ऐसे एडवांस्ड कंप्यूटेशनल मॉडल विकसित किए, जो इमारतों के अंदर आग के फैलाव का सिमुलेशन कर सकते हैं. आग की विभिन्न स्थितियों में स्ट्रक्चरल कंपोनेंट्स के व्यवहार का विश्लेषण कर सकते हैं. आग की घटना के बाद नुकसान की सीमा का मूल्यांकन कर सकते हैं.
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डिजिटल तकनीकों का एकीकृत रूप: स्ट्रक्चरल फायर इंजीनियरिंग से आगे बढ़कर IIT जोधपुर की टीम इंटेलिजेंट बिल्डिंग डिजाइन और मैनेजमेंट समाधान विकसित के लिए अत्याधुनिक डिजिटल तकनीकों को एकीकृत कर रही है. इनमें बिल्डिंग इंफॉर्मेशन मॉडलिंग (BIM), डिजिटल ट्विन्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और ज्योग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (GIS) शामिल हैं. ये डिजिटल समाधान पारंपरिक बिल्डिंग डिजाइन से कहीं आगे जाते हैं. ये इंजीनियरों और स्टेकहोल्डर्स को स्ट्रक्चरल सिमुलेशन, निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी, इमारत की सस्टेनेबिलिटी का आंकलन, लाइफ-साइकिल परफॉर्मेंस को ऑप्टिमाइज, प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस में सहायता और इमारतों को उनके पूरे सर्विस लाइफ के दौरान प्रबंधित करने में सक्षम बनाते हैं.
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