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Dainik Bhaskar के अनुसार6 सितंबर 2026 को 06:33 pm बजे
एक गलती पर अगला चुनाव नहीं लड़ पाएंगे प्रत्याशी:  चुनाव में सार्वजनिक स्थलों से पोस्टर बैनर नहीं उठाना पड़ सकता है भारी - Rajasthan News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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एक गलती पर अगला चुनाव नहीं लड़ पाएंगे प्रत्याशी:चुनाव में सार्वजनिक स्थलों से पोस्टर बैनर नहीं उठाना पड़ सकता है भारी

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निकाय चुनाव में सार्वजनिक स्थलों पर लगे पोस्टर बैनर नहीं हटाना प्रत्याशियों को भारी पड़ सकता है। आयोग इनका खर्च प्रत्याशी के कुल चुनावी खर्च में जोड़ेगा। चुनावी सीमा में खर्चा अधिक होने पर प्रत्याशी को अगले चुनाव से बैन भी किया जा सकेगा।

वहीं सड़क, गलियों, चौराहों और सरकारी भवनों गंदा करने के जुर्म में प्रत्याशी के खिलाफ एक्शन भी लिया जाएगा। प्रदेश भर में एक सितंबर तक सवा लाख से ज्यादा बैनर पोस्टरों को हटाया जा चुका है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट...

अब तक सवा लाख से ज्यादा बैनर पोस्टर हटाए

दरअसल, प्रदेश में 19 अगस्त को चुनावी कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो गई थी। आयोग के निर्देश पर अवैध होर्डिंग, बैनर और पोस्टर हटाने का अभियान शुरू हो गया था।

लेकिन बार-बार निर्देशों के बावजूद कई प्रत्याशी/राजनीतिक दल सार्वजनिक स्थलों जैसे- सड़कों, गलियों, चौराहों तथा सरकारी भवनों पर प्रचार सामग्री लगा रहे हैं।

आयोग के अनुसार ये आदर्श आचार संहिता और राजस्थान संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम 2006 का उल्लंघन है। अब तक आयोग के निर्देश पर जिला निर्वाचन अधिकारी सवा लाख से अधिक पोस्टर बैनर और होर्डिंग हटा चुके हैं।

अब जानिए प्रत्याशियों के चुनावी खर्च की लिमिट क्या है?

राज्य निर्वाचन आयोग ने निकाय चुनाव के लिए इस बार चुनावी खर्च सीमा को बढ़ाई है। इस बार नगर निगम व नगर परिषद के लिए एक-एक लाख और नगरपालिका के लिए 50 हजार रुपए खर्च ज्यादा कर पाएंगे।

- नगर निगम में पार्षद प्रत्याशी पुरानी खर्च सीमा 2.50 लाख की जगह 3.50 लाख रुपए खर्च कर सकेंगे।

- नगर परिषद के पार्षद प्रत्याशी 1.50 लाख की जगह 2.50 लाख खर्च कर सकेंगे

- नगरपालिका के पार्षद प्रत्याशी 1 लाख की जगह 1.50 लाख खर्च कर पाएंगे।

- सभी प्रत्याशियों को अपनी चुनावी रैली, पोस्टर, बैनर, जनसंपर्क व सोशल मीडिया अभियान का कुल खर्च नई समय सीमा के भीतर ही रखना होगा।

- हर प्रत्याशी को चुनाव परिणाम आने के 15 दिन बाद हर हाल में चुनाव खर्च का ब्योरा देना होगा।

- खर्च का ब्योरा ज्यादा आने की स्थिति में दोबारा चुनाव नहीं पाएंगे।

प्रत्याशियों को नोटिस जारी होगा

आयोग ने व्यय पर्यवेक्षकों और कलेक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने वाले उम्मीदवारों को नोटिस जारी कर उन्हें सख्त चेतावनी दी जाए।

जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, व्यय पर्यवेक्षक और नगर निगम अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए अवैध रूप से लगी सभी प्रचार सामग्री को तुरंत हटाया जाए।

बिजली के खंभों, सरकारी दीवारों, सड़कों और चौराहों पर किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार का प्रचार प्रसार पूर्णतः वर्जित होता है। बिना मालिक की लिखित अनुमति के निजी मकानों या दीवारों पर पोस्टर चिपकाना या झंडा लगाना आचार संहिता का उल्लंघन माना जाता है।

एडवोकेट प्रतीक कासलीवाल का कहना है- राजस्थान संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम 2006 की धारा 3 के अनुसार सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को बिना अनुमति पोस्टर, बैनर, फ्लेक्स या दीवार कुरूप करने पर सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

पहली बार 5000 रुपए तक का जुर्माना और एक माह की जेल हो सकती है। गलती दोहराने पर सजा बढ़ने का प्रावधान भी है। यानी जुर्माना 10 हजार रुपए तक लग सकता है।

38 हजार 891 प्रत्याशी चुनावी मैदान में

प्रदेश के 41 जिलों के 10 हजार 245 वार्डों में अब कुल 38 हजार 891 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। स्क्रूटनी के दौरान 17 हजार 137 नामांकन पत्र तकनीकी खामियों के चलते खारिज कर दिए गए।

वहीं, 10 हजार 112 उम्मीदवारों ने नाम वापस लिए। पिछली बार 196 निकायों में करीब 27 हजार प्रत्याशी थे। इस बार अबतक 77 उम्मीदवार निर्विरोध पार्षद चुने जा चुके हैं।

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