Rajasthan Monsoon: बारिश की रफ्तार धीमी, 253 बांध सूखे, क्या अगस्त बदलेगा हालात? जानें बीते पांच साल का ट्रेंड
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सौजन्य से:- Amar Ujala
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Rajasthan Monsoon: बारिश की रफ्तार धीमी, 253 बांध सूखे, क्या अगस्त बदलेगा हालात? जानें बीते पांच साल का ट्रेंड
Sat, 01 Aug 2026 08:17 AM IST
Sourabh Bhatt
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: Sourabh Bhatt
Updated Sat, 01 Aug 2026 08:17 AM IST
सार
राजस्थान में सामान्य से 9% कम बारिश के कारण बांधों का जलभराव पिछले साल के 75.20% से घटकर 47.57% रह गया। 253 बांध खाली हैं, अब उम्मीद अगस्त की बारिश पर टिकी है। लेकिन मौसम विशेषज्ञों की चेतावनी ने फिर चिंता बढ़ा दी...जानिए क्यूं !
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विस्तार
राजस्थान में एक बार फिर से मानसून कमजोर कमजोर पड़ने के सामाचारों ने चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश में 2 जुलाई को मानसून की एंट्री हुई थी। इसके बाद से अब तक प्रदेश में 192.09 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई है जबकि इस अवधि में औसत बारिश का स्तर 202.51 एमएम है। यानी इस बार राजस्थान में बारिश का पहला पखवाड़ा मायूस करने वाला रहा है।
मौसम विभाग ने अगस्त के पहले पांच दिनों में भारी बारिश की चेतावनी दी थी लेकिन अब ताजा अपडेट यह है कि 3 अगस्त से मानसून ट्रफ लाइन उत्तर की ओर खिसक सकती है, जिससे प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दौर धीमा पड़ने के आसार हैं। ऐसे मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से एक ओर प्रदेश के बांधों का जलस्तर चिंता बढ़ा रहा है, वहीं खरीफ बुआई के लिए अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे किसानों की उम्मीदें भी मौसम पर टिकी हैं।
राजस्थान में इस वर्ष जुलाई के दौरान कमजोर मानसून का असर अब प्रदेश के जलाशयों पर साफ दिखाई देने लगा है। 30 जुलाई तक राज्य में सामान्य 207.85 मिमी के मुकाबले 192.09 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से 9 से ज्यादा प्रतिशत कम है। इसका सीधा असर बांधों के जलभराव पर पड़ा है। पिछले वर्ष इसी अवधि तक राज्य के बांध 75.20 प्रतिशत भर चुके थे, जबकि इस वर्ष जलभराव घटकर 47.57 प्रतिशत पर सिमट गया है।
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253 बांध पूरी तरह खाली
प्रदेश के 693 बांधों में से अब भी 253 बांध पूरी तरह खाली हैं, जबकि 427 बांध आंशिक रूप से भरे हुए हैं। केवल 13 बांध ही पूरी क्षमता तक भर पाए हैं। इनमें 4.25 एमसीएम से अधिक क्षमता वाले 286 बड़े और मध्यम बांधों में सिर्फ 3 बांध पूरी तरह भरे हैं, जबकि 62 बांध खाली हैं। वहीं 4.25 एमसीएम से कम क्षमता वाले 407 छोटे बांधों में 191 बांध पूरी तरह सूखे हैं और केवल 10 बांध ही फुल हुए हैं। आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के अधिकांश बांध अभी भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में मानसून की स्थिति जल भंडारण के लिहाज से बेहद अहम रहेगी। प्रदेश के 23 प्रमुख बांधों में कुल क्षमता का 57.51 प्रतिशत पानी उपलब्ध है।
पिछले साल की तुलना में बांधों की स्थिति
जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 30 जुलाई 2025 तक प्रदेश के बांधों में 9,797.76 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) पानी उपलब्ध था। वहीं 30 जुलाई 2026 को यह घटकर 6,198.22 एमसीएम रह गया। यानी एक वर्ष में बांधों में लगभग 3,600 एमसीएम पानी कम है और जलभराव में करीब 28 प्रतिशत अंक की गिरावट दर्ज की गई है।
ये भी पढ़ें: Rajasthan: उद्घाटन से पहले ग्रिड परिसर बना मासूम की मौत का कारण, करंट लगने से 4 साल के बच्चे की गई जान
जुलाई में क्यों कमजोर पड़ा मानसून?
जुलाई में मानसून के कमजोर रहने का मुख्य कारण 'मानसून ब्रेक' (Monsoon Break) और अलनीनो (El Niño) का प्रभाव है, जिसके कारण लंबे शुष्क दौर (dry spells) के बीच केवल कुछ जगहों पर भारी बारिश हुई। हालांकि कुल मिलाकर बारिश सामान्य के करीब रही, लेकिन वितरण असमान रहा।
जुलाई में मानसूनी गतिविधियों में मानसून ब्रेक की स्थिति प्रमुख कारण है, जिसमें मानसूनी हवाओं को नियंत्रित करने वाली 'मानसून ट्रफ' (कम दबाव वाली पट्टी) के अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर खिसकने के कारण देश के कई हिस्सों में बारिश लगभग थम गई। इसके अलावा मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार अलनीनो का प्रभाव जारी रहने के कारण शुरुआत में मॉनसून की रफ्तार सुस्त रही।
पिछले वर्षों की तुलना में कमजोर रही जुलाई
यदि पिछले पांच वर्षों से तुलना की जाए तो इस साल के जुलाई माह के वर्षा आंकड़े बताते हैं कि इस बार मानसून अपेक्षाकृत कमजोर रहा है।
अब अगस्त से उम्मीद बाकी
जल विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून का सबसे महत्वपूर्ण चरण अभी शेष है। यदि अगस्त में अच्छी वर्षा होती है तो जलाशयों के जलस्तर में तेजी से सुधार संभव है। वर्ष 2024 इसका उदाहरण रहा, जब जुलाई में बेहद कम वर्षा के बावजूद अगस्त की रिकॉर्ड बारिश से अधिकांश जलाशय भर गए थे।
यदि अगस्त में भी वर्षा सामान्य से कम रही तो प्रदेश के कई हिस्सों में पेयजल उपलब्धता और सिंचाई व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में इस वर्ष राजस्थान की जल स्थिति काफी हद तक अगस्त के मानसून पर निर्भर करेगी।
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मौसम विभाग ने अगस्त के पहले पांच दिनों में भारी बारिश की चेतावनी दी थी लेकिन अब ताजा अपडेट यह है कि 3 अगस्त से मानसून ट्रफ लाइन उत्तर की ओर खिसक सकती है, जिससे प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दौर धीमा पड़ने के आसार हैं। ऐसे मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से एक ओर प्रदेश के बांधों का जलस्तर चिंता बढ़ा रहा है, वहीं खरीफ बुआई के लिए अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे किसानों की उम्मीदें भी मौसम पर टिकी हैं।
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राजस्थान में इस वर्ष जुलाई के दौरान कमजोर मानसून का असर अब प्रदेश के जलाशयों पर साफ दिखाई देने लगा है। 30 जुलाई तक राज्य में सामान्य 207.85 मिमी के मुकाबले 192.09 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से 9 से ज्यादा प्रतिशत कम है। इसका सीधा असर बांधों के जलभराव पर पड़ा है। पिछले वर्ष इसी अवधि तक राज्य के बांध 75.20 प्रतिशत भर चुके थे, जबकि इस वर्ष जलभराव घटकर 47.57 प्रतिशत पर सिमट गया है।
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253 बांध पूरी तरह खाली
प्रदेश के 693 बांधों में से अब भी 253 बांध पूरी तरह खाली हैं, जबकि 427 बांध आंशिक रूप से भरे हुए हैं। केवल 13 बांध ही पूरी क्षमता तक भर पाए हैं। इनमें 4.25 एमसीएम से अधिक क्षमता वाले 286 बड़े और मध्यम बांधों में सिर्फ 3 बांध पूरी तरह भरे हैं, जबकि 62 बांध खाली हैं। वहीं 4.25 एमसीएम से कम क्षमता वाले 407 छोटे बांधों में 191 बांध पूरी तरह सूखे हैं और केवल 10 बांध ही फुल हुए हैं। आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के अधिकांश बांध अभी भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में मानसून की स्थिति जल भंडारण के लिहाज से बेहद अहम रहेगी। प्रदेश के 23 प्रमुख बांधों में कुल क्षमता का 57.51 प्रतिशत पानी उपलब्ध है।
पिछले साल की तुलना में बांधों की स्थिति
जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 30 जुलाई 2025 तक प्रदेश के बांधों में 9,797.76 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) पानी उपलब्ध था। वहीं 30 जुलाई 2026 को यह घटकर 6,198.22 एमसीएम रह गया। यानी एक वर्ष में बांधों में लगभग 3,600 एमसीएम पानी कम है और जलभराव में करीब 28 प्रतिशत अंक की गिरावट दर्ज की गई है।
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जुलाई में क्यों कमजोर पड़ा मानसून?
जुलाई में मानसून के कमजोर रहने का मुख्य कारण 'मानसून ब्रेक' (Monsoon Break) और अलनीनो (El Niño) का प्रभाव है, जिसके कारण लंबे शुष्क दौर (dry spells) के बीच केवल कुछ जगहों पर भारी बारिश हुई। हालांकि कुल मिलाकर बारिश सामान्य के करीब रही, लेकिन वितरण असमान रहा।
जुलाई में मानसूनी गतिविधियों में मानसून ब्रेक की स्थिति प्रमुख कारण है, जिसमें मानसूनी हवाओं को नियंत्रित करने वाली 'मानसून ट्रफ' (कम दबाव वाली पट्टी) के अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर खिसकने के कारण देश के कई हिस्सों में बारिश लगभग थम गई। इसके अलावा मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार अलनीनो का प्रभाव जारी रहने के कारण शुरुआत में मॉनसून की रफ्तार सुस्त रही।
पिछले वर्षों की तुलना में कमजोर रही जुलाई
यदि पिछले पांच वर्षों से तुलना की जाए तो इस साल के जुलाई माह के वर्षा आंकड़े बताते हैं कि इस बार मानसून अपेक्षाकृत कमजोर रहा है।
- वर्ष 2022 में जुलाई के दौरान 294.72 मिमी वर्षा हुई थी।
- वर्ष 2023 में 246.88 मिमी वर्षा दर्ज की गई।
- वर्ष 2024 में जुलाई सबसे कमजोर रहा और केवल 138 मिमी वर्षा हुई, हालांकि अगस्त में 517 मिमी रिकॉर्ड बारिश ने इसकी भरपाई कर दी।
- वर्ष 2025 में जुलाई में 276 मिमी वर्षा हुई थी। उस वर्ष बारां में सर्वाधिक 709 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी।
- वर्ष 2026 में 31 जुलाई तक प्रदेश में केवल 192.09 मिमी वर्षा हुई है। इस वर्ष जुलाई में सर्वाधिक वर्षा सलूम्बर जिले में 235 मिमी दर्ज की गई।
अब अगस्त से उम्मीद बाकी
जल विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून का सबसे महत्वपूर्ण चरण अभी शेष है। यदि अगस्त में अच्छी वर्षा होती है तो जलाशयों के जलस्तर में तेजी से सुधार संभव है। वर्ष 2024 इसका उदाहरण रहा, जब जुलाई में बेहद कम वर्षा के बावजूद अगस्त की रिकॉर्ड बारिश से अधिकांश जलाशय भर गए थे।
यदि अगस्त में भी वर्षा सामान्य से कम रही तो प्रदेश के कई हिस्सों में पेयजल उपलब्धता और सिंचाई व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में इस वर्ष राजस्थान की जल स्थिति काफी हद तक अगस्त के मानसून पर निर्भर करेगी।
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