राजस्थान जल सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की ओर एक नए दिशा में
राजस्थान जल संचयन और संरक्षण के लिए कई बड़े प्रस्तावों को अपने क्षेत्र में लागू कर रहा है, जो राज्य को जल नीति का प्रकरण बना रहा है।

सौजन्य से:- The Economic Times
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य रामजल सेतु लिंक परियोजना और यमुना जल समझौते जैसी परिवर्तनकारी पहलों के माध्यम से जल क्षेत्र में 'नए राजस्थान' की नींव रख रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राजस्थान जल प्रबंधन और जल आत्मनिर्भरता का राष्ट्रीय मॉडल बनकर उभरने की ओर अग्रसर है।
जयपुर में द इकोनॉमिक टाइम्स द्वारा आयोजित राजस्थान वॉटर कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने अपने कार्यकाल की शुरुआत से ही जल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने, सिंचाई का विस्तार करने और भूजल संरक्षण के लिए कई ऐतिहासिक पहल शुरू की गई हैं।
केंद्र की पहल पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कैच द रेन, नमामि गंगे, जल जीवन मिशन, अटल भूजल योजना, अमृत सरोवर, हर खेत को पानी और पर ड्रॉप मोर क्रॉप जैसे कार्यक्रमों ने देश में जल सुरक्षा को एक नई दिशा दी है।
जल संरक्षण को एक साझा जिम्मेदारी बताते हुए शर्मा ने संस्थानों, विशेषज्ञों और नागरिकों से तकनीकी नवाचार, वैज्ञानिक योजना और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से योगदान देने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए जल संरक्षण एक जन आंदोलन बनना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रामजल सेतु लिंक परियोजना लगभग 4.84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई प्रदान करते हुए 17 जिलों में पेयजल सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। यमुना जल समझौते के तहत, 295 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के माध्यम से लगभग 1,917 क्यूसेक पानी शेखावाटी में लाया जाएगा, जिससे सीकर, झुंझुनू और चूरू जिलों के लगभग 75 लाख लोगों को लाभ होगा।
उन्होंने प्रमुख जल अवसंरचना परियोजनाओं में चल रहे निवेश पर भी प्रकाश डाला, जिसमें उदयपुर की पेयजल जरूरतों के लिए ₹1,691 करोड़ की देवास III और देवास IV परियोजनाएं, पश्चिमी राजस्थान में आईजीएनपी नहर प्रणाली को मजबूत करना, रानीवाड़ा और भीनमाल में नर्मदा का पानी लाने की योजना और परवन बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना शामिल है, जिस पर राज्य पहले ही ₹1,164 करोड़ खर्च कर चुका है।
शर्मा ने कहा कि कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान और वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान जैसी पहलों के माध्यम से सार्वजनिक भागीदारी सरकार की जल संरक्षण रणनीति के केंद्र में है, जो जल संचयन संरचनाओं, जल निकायों के कायाकल्प, वृक्षारोपण अभियान और जागरूकता अभियानों पर केंद्रित है।
प्रमुख योजनाओं पर प्रगति साझा करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि 178 शहरी स्थानीय निकायों में पीने के पानी के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अमृत 2.0 के तहत 5,100 करोड़ रुपये की मंजूरी जारी की गई है, 109 यूएलबी के लिए कार्य आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं। जल जीवन मिशन के तहत 15 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को पाइप से पीने का पानी मिल रहा है, जबकि अटल भूजल योजना के तहत ₹485 करोड़ के संरक्षण कार्य पूरे हो चुके हैं।
शर्मा ने यह भी कहा कि राजस्थान अब किसानों को दिन के समय बिजली की आपूर्ति का विस्तार करते हुए अन्य राज्यों को बिजली की आपूर्ति कर रहा है, उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2027 तक सभी जिलों में किसानों को दिन के समय बिजली प्रदान करना है।
राज्य के निवेश अभियान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राइजिंग राजस्थान पहल के दौरान हस्ताक्षरित ₹35 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों में से ₹9 लाख करोड़ की परियोजनाएं पहले ही जमीन पर उतारी जा चुकी हैं।
जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि पानी केवल एक प्राकृतिक संसाधन नहीं है, बल्कि राजस्थान की सभ्यता, समृद्धि और भविष्य की नींव है, उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के लिए प्रत्येक नागरिक की सामूहिक भागीदारी की आवश्यकता है।
कॉन्क्लेव के दौरान शर्मा ने जल संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रहे संगठनों और विशेषज्ञों से बातचीत की और उनके अनुभवों, नवाचारों और सुझावों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण वर्तमान और भावी पीढ़ियों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है और उन्होंने स्थानीय जल चुनौतियों से निपटने के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवीन समाधानों के उपयोग का आह्वान किया।
सम्मेलन में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार, सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी तथा भूजल विभाग के प्रमुख सचिव हेमंत कुमार गेरा और कई जल संरक्षण विशेषज्ञ उपस्थित थे।
अस्वीकरण - उपरोक्त सामग्री गैर-संपादकीय है, और टीआईएल इसके संबंध में व्यक्त या निहित किसी भी और सभी वारंटी को अस्वीकार करता है, और किसी भी सामग्री की गारंटी, पुष्टि या आवश्यक रूप से समर्थन नहीं करता है।जयपुर में द इकोनॉमिक टाइम्स द्वारा आयोजित राजस्थान वॉटर कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने अपने कार्यकाल की शुरुआत से ही जल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने, सिंचाई का विस्तार करने और भूजल संरक्षण के लिए कई ऐतिहासिक पहल शुरू की गई हैं।
केंद्र की पहल पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कैच द रेन, नमामि गंगे, जल जीवन मिशन, अटल भूजल योजना, अमृत सरोवर, हर खेत को पानी और पर ड्रॉप मोर क्रॉप जैसे कार्यक्रमों ने देश में जल सुरक्षा को एक नई दिशा दी है।
जल संरक्षण को एक साझा जिम्मेदारी बताते हुए शर्मा ने संस्थानों, विशेषज्ञों और नागरिकों से तकनीकी नवाचार, वैज्ञानिक योजना और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से योगदान देने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए जल संरक्षण एक जन आंदोलन बनना चाहिए।
उन्होंने प्रमुख जल अवसंरचना परियोजनाओं में चल रहे निवेश पर भी प्रकाश डाला, जिसमें उदयपुर की पेयजल जरूरतों के लिए ₹1,691 करोड़ की देवास III और देवास IV परियोजनाएं, पश्चिमी राजस्थान में आईजीएनपी नहर प्रणाली को मजबूत करना, रानीवाड़ा और भीनमाल में नर्मदा का पानी लाने की योजना और परवन बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना शामिल है, जिस पर राज्य पहले ही ₹1,164 करोड़ खर्च कर चुका है।
शर्मा ने कहा कि कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान और वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान जैसी पहलों के माध्यम से सार्वजनिक भागीदारी सरकार की जल संरक्षण रणनीति के केंद्र में है, जो जल संचयन संरचनाओं, जल निकायों के कायाकल्प, वृक्षारोपण अभियान और जागरूकता अभियानों पर केंद्रित है।
शर्मा ने यह भी कहा कि राजस्थान अब किसानों को दिन के समय बिजली की आपूर्ति का विस्तार करते हुए अन्य राज्यों को बिजली की आपूर्ति कर रहा है, उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2027 तक सभी जिलों में किसानों को दिन के समय बिजली प्रदान करना है।
राज्य के निवेश अभियान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राइजिंग राजस्थान पहल के दौरान हस्ताक्षरित ₹35 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों में से ₹9 लाख करोड़ की परियोजनाएं पहले ही जमीन पर उतारी जा चुकी हैं।
कॉन्क्लेव के दौरान शर्मा ने जल संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रहे संगठनों और विशेषज्ञों से बातचीत की और उनके अनुभवों, नवाचारों और सुझावों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण वर्तमान और भावी पीढ़ियों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है और उन्होंने स्थानीय जल चुनौतियों से निपटने के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवीन समाधानों के उपयोग का आह्वान किया।
सम्मेलन में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार, सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी तथा भूजल विभाग के प्रमुख सचिव हेमंत कुमार गेरा और कई जल संरक्षण विशेषज्ञ उपस्थित थे।
अस्वीकरण - उपरोक्त सामग्री गैर-संपादकीय है, और टीआईएल इसके संबंध में व्यक्त या निहित किसी भी और सभी वारंटी को अस्वीकार करता है, और किसी भी सामग्री की गारंटी, पुष्टि या आवश्यक रूप से समर्थन नहीं करता है।
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