राजस्थान में सिजेरियन प्रसव के बाद प्रसूताओं की मौत: सरकार ने जारी की गाइडलाइन
राजस्थान में पांच जिलों में सिजेरियन प्रसव के बाद 20 प्रसूताओं की मौत और 10 की किडनी खराब होने के मामले सामने आने के बाद सरकार ने गर्भवती महिलाओं के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। सरकार ने गर्भवती महिलाओं के लिए स्वास्थ्य मानकों की निरंतर स्क्रीनिंग की सुनिश्चिती करने और अस्पतालों में जीवन रक्षक दवाओं और खून की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

सौजन्य से:- Jagran
राजस्थान में पांच प्रसूताओं ने मांगी इच्छा मृत्यु, चिकित्सा विभाग में मचा हडकंप, जारी की गाइडलाइन
राजस्थान के पांच जिलों में सिजेरियन प्रसव के बाद 20 प्रसूताओं की मौत और 10 की किडनी खराब होने से हड़कंप मच गया है। ...और पढ़ें
HighLights
- पांच जिलों में 20 प्रसूताओं की मौत, 10 की किडनी खराब।
- कोटा की चार प्रसूताओं ने इच्छामृत्यु की मांग की।
- सरकार ने गर्भवती महिलाओं के लिए नई गाइडलाइन जारी की।
जागरण संवाददाता, जयपुर। राजस्थान के पांच जिलों के सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव के बाद पिछले दो माह में 20 प्रसूताओं की मौत और दस प्रसूताओं की किड़नी खराब होने के मामलों ने जिलों से लेकर राजधानी जयपुर तक हडकंप मचा हुआ है।
इस बीच बुधवार को कोटा मेडिकल कालेज अस्पताल में भर्ती पांच प्रसूताओं में से चार रागिनी मीणा, आरती चौबदार, पिंकी और सुशीला ने अस्पताल से बाहर आकर मीडिया के समक्ष अपनी पीड़ा जताते हुए इच्छामृत्यु की मांगी की। सिजेरियन प्रसव के बाद इन प्रसूताओं की किडनी खराब हो गई थी। पांचों प्रसूता करीब दो माह से अस्पताल के नेफ्रोलॉजी वार्ड में भर्ती हैं, उनका लगातार डायलिसिस किया जा रहा है।
प्रसूताओं ने कहा, सरकार या तो किड़नी ट्रांसप्लांट करवाए नहीं तो हमें इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए। प्रसूताओं ने कहा, राष्ट्रपति के नाम बुधवार को भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है कि डायलिसिस के दौरान उन्हें भारी पीड़ा होती है।
पांचों प्रसूताओं ने डायलिसिस करवाने से इन्कार कर दिया। दो दिन पहले पहले प्रसूताओं के स्वजनों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन देकर सरकारी खर्च पर किडनी ट्रांसप्लांट करवाने की मांग की थी। स्वजन ने किडनी ट्रांसप्लांट नहीं करवाने की दशा में जहर का इंजेक्शन देने के लिए कहा गया था।
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उधर चिकित्सा मंत्री, चिकित्सा विभाग की प्रमुख सचिव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मंगलवार और बुधवार को उन जिलों में पहुंचे, जहां प्रसूताओं की मौत हुई है।
एक ओर अस्पतालों में प्रसूताओं की मौतों का सिलसिला जारी है, वहीं दूसरी ओर सरकार द्वारा गठित जांच कमेटी ने अब तक अपनी अंतिम रिपोर्ट नहीं सौंपी है। इस कारण सरकार पर जिम्मेदारों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के स्थान पर उन्हें बचाने के आरोप लग रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार,जांच कमेटी ने प्रारंभिक रिपोर्ट में कोटा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डा. नीलेश जैन के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी, लेकिन चिकित्सा विभाग ने केवल अस्पताल अधीक्षक को नोटिस देकर खानापूर्ति कर ली। बीकानेर मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. सुरेंद्र कुमार वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश भी दरकिनार कर दी गई।
अब जारी की गई गाइडलाइन
मई के अंतिम सप्ताह से लेकर 15 जुलाई तक सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत का सिलसिला जारी रहने के बाद सरकार ने गाइडलाइन तय की है। तय किया है कि प्रदेशभर में गर्भवती महिलाओं के लिए स्वास्थ्य मानकों की निरंतर स्क्रीनिंग होगी।
महिलाओं की प्रसव पूर्व स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जांच करने के साथ ही इनका रिकार्ड रखा जाएगा। रिकार्ड के आधार पर उनके स्वास्थ्य की निरंतर निगरानी रखने, हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की अलग से निगरानी की जाएगी।
अस्पतालों में जीवन रक्षक दवाओं और खून की उपलब्धता सुनिश्चित करने, ऑपरेशन थियेटर साफ रखने, अस्पताल को संक्रमण मुक्त रखने और आपेस्टिक आईसीयू बनाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने आदेश दिया है कि प्रत्येक गर्भवती महिला का गर्भधारण के प्रथम 12 सप्ताह के भीतर पंजीकरण सुनिश्चित करने के साथ ही सभी तरह की सूचनाएं पोर्टल पर अपलोड की जाए।
हाई रिस्क वाली गर्भवती महिलाओं की निगरानी के लिए चिकित्सकों की अलग टीम होगी। इसके अलावा, एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और पूर्व में प्रसव के दौरान अधिक रक्तस्त्राव का भी अलग से रिकार्ड रखना होगा। इससे पहले सरकार ने सिजेरियन प्रसव के दौरान काम आने वाले ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन और बुपीवाकेन एनेस्थीसिया दवा पर रोक लगाई है।
अधिक रक्तस्त्राव होने पर महिलाओं को ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन लगाया जाता था, लेकिन कोटा में हुई मौतों के बाद सामने आया कि इंजेक्शन में दवा की जगह पानी था। किस जिले में कितनी प्रसूताओं की मौतेंबीकानेर के पीबीएम अस्पताल में मंगलवार देर रात हृदय गति रूकने से एक प्रसूताओं की मौत हो गई। बीकानेर में अब तक सिजेरियन प्रसव के बाद चार प्रसूताओं की मौत होने और चार की किड़नी खराब हुई है।
इनमें जून के पहले सप्ताह में छह सिजेरियन प्रसूताओं की किड़नी खराब हुई थी, जिनमें से जून में तीन और मंगलवार देर रात एक प्रसूता की मौत हुई है। जुलाई में अब तक भीलवाड़ा के सरकारी अस्पताल में पांच और बांसवाड़ा में चार प्रसूताओं की मौत हुई है। मई के अंतिम सप्ताह में कोटा में पांच प्रसूताओं की मौत के साथ ही सात की किड़नी खराब हुई थी। जोधपुर में दो प्रसूताओं की मौत हुई है।
चिकित्सा मंत्री बोले, कई कारणों से हुई मौतें
चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा, प्रसूताओं की मौत के अलग-अलग कारण हैं। अब तक की जांच में सामने आया कि कुछ प्रसूताओं की मौत किडनी खराब होने, एनिमिया, प्रसव के बाद अधिक रक्तस्त्राव होने, न्यूट्रेशन सहित कई कारण रहे हैं।
मंगलवार देर रात बीकानेर में एक प्रसूता की मौत हृदय गति रूकने के कारण हुई है। खींवसर बुधवार को बांसवाड़ा के सरकारी अस्पताल में पहुंचे। इससे पहले उन्होंने मंगलवार को भीलवाड़ा अस्पताल का दौरा किया था।
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