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राजस्थान को कचरे मुक्त करने के लिए 310 करोड़ का प्रोजेक्ट शुरू, जीरो डंपसाइट की शुरुआत

राजस्थान में 152 शहरों के लिए 310 करोड़ का 'जीरो डंपसाइट' प्रोजेक्ट शुरू हुआ है, जिसमें दशकों पुराने कचरे के पहाड़ वैज्ञानिक तरीके से साफ करने की कोशिश की जाएगी.

Navbharat Times के अनुसार13 जुलाई 2026 को 03:03 pm बजे
राजस्थान को कचरे मुक्त करने के लिए 310 करोड़ का प्रोजेक्ट शुरू, जीरो डंपसाइट की शुरुआत

सौजन्य से:- Navbharat Times

राजस्थान में 'स्वच्छ भारत मिशन 2.0' के तहत 152 शहरों को कचरा मुक्त करने के लिए 310 करोड़ का 'जीरो डंपसाइट' प्रोजेक्ट शुरू हुआ है। इसके जरिए वैज्ञानिक बायोमाइनिंग तकनीक से बरसों पुराना 75 लाख क्यूबिक मीटर कचरा साफ किया जाएगा।

जयपुर: राजस्थान को कचरे के पुराने ढेरों से पूरी तरह मुक्त कराने और शहरों को स्वच्छ-सुंदर बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ी पहल की है। केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के 'जीरो डंपसाइट' मिशन के तहत प्रदेश के 152 नगरीय निकायों में वर्षों से जमा करीब 75 लाख क्यूबिक मीटर 'लीगेसी वेस्ट' को वैज्ञानिक तरीके से साफ करने के लिए 310 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई है।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य उद्देश्य बायोमाइनिंग तकनीक के जरिए दशकों पुराने कचरे के पहाड़ों को खत्म करना है। इसके साथ ही, कचरा मुक्त होने वाली बेशकीमती शहरी जमीन पर आधुनिक वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किए जाएंगे, ताकि भविष्य में दोबारा वहां कचरे के ढेर न लग सकें।

सीएम भजनलाल शर्मा ने कहा- 'शहरों को बनाएंगे फ्यूचर-रेडी'

हमारी सरकार शहरों को साफ-सुथरा, पर्यावरण के अनुकूल और भविष्य के लिए तैयार बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। पुराने कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण और नए वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना से न केवल दशकों पुराने डंपिंग यार्ड खत्म होंगे, बल्कि दीर्घकालिक कचरा प्रबंधन भी मजबूत होगा।

सीएम भजनलाल शर्मा

रॉकेट स्पीड से जारी है काम

शहरी विकास और आवास विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। 30 नगरीय निकायों में 24 लाख क्यूबिक मीटर से अधिक लीगेसी वेस्ट को साफ करने के वर्क ऑर्डर जारी किए जा चुके हैं। वहीं, 40 अन्य निकायों के लिए 'लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस' जारी कर दिए गए हैं, जिसके तहत 35 लाख क्यूबिक मीटर से ज्यादा कचरा साफ किया जाएगा। शेष बचे 82 निकायों के लिए तकनीकी मूल्यांकन की प्रक्रिया चल रही है, जहां करीब 16 लाख क्यूबिक मीटर कचरे का निस्तारण होना बाकी है। अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले नवंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच 'डंपसाइट रेमेडीएशन एक्सीलेटर प्रोग्राम' के तहत करीब 24 लाख क्यूबिक मीटर पुराना कचरा पहले ही साफ किया जा चुका है।

क्या है बायोमाइनिंग तकनीक और इसके फायदे?

बायोमाइनिंग प्रक्रिया के तहत बरसों पुराने डंपिंग ग्राउंड की खुदाई की जाती है। इसके बाद कचरे में से रीसायकल होने वाले सामान को अलग किया जाता है। जलने योग्य कचरे को 'रिड्यूस डिराइव्ड फ्यूल' में बदला जाता है, जिसका इस्तेमाल सीमेंट प्लांटों में और ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जाता है। इस वैज्ञानिक तरीके से जहां शहरों में प्रदूषण और बीमारियों का खतरा कम होगा, वहीं डंपिंग यार्ड्स की अरबों रुपये की जमीन खाली होकर विकास कार्यों के काम आ सकेगी। सरकार का लक्ष्य अब शहरों को नए डंपिंग साइट बनाने के बजाय कचरे के शत-प्रतिशत सस्टेनेबल मैनेजमेंट की ओर ले जाना है।

लेखक के बारे मेंपुलकित सक्सेनापुलकित सक्सेना नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। वह साल 2022 नवंबर महीने से नवभारत टाइम्स की डिजिटल विंग से जुड़े। वर्तमान में राजस्थान के लिए काम करते हैं। 2019 में पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली के नेशनल टीवी चैनल में इनपुट डेस्क से की। बीते 7 सालों में टेलीविजन से लेकर सोशल मीडिया और अब डिजिटल मीडिया में काम कर रहे हैं। वर्तमान में नवभारत टाइम्स में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका में कार्यरत हैं।

राजस्थान की राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर्स और ऑफ बीट खबरों पर नजर रखना पुलकित सक्सेना की पहली प्राथमिकता रहती है।

विशेषज्ञता- राजनीति, क्राइम, एनलिसिस, सियासी उठा पटक को कवर करना।

पत्रकारिता अनुभव: 7 साल से कार्यरत

पुलकित सक्सेना ने साल 2017 में जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन पूरी की। साल 2019 में देश की प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी से दिल्ली में प्रथम श्रेणी से पोस्ट ग्रेजुएशन पत्रकारिता में किया। इसके बाद साल 2019 में दिल्ली से टीवी 100 न्यूज चैनल से पत्रकारिता की शुरुआत की। इसके बाद राजस्थान के यूट्यूब न्यूज चैनल में एंकरिंग, पैकेज क्रिएशन और सोशल मीडिया हैंडल के लिए सक्रियता से काम किया। साल 2022 के नवंबर महीने में वह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में जुड़े। वर्तमान में बीते तीन साल से वह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।... और पढ़ें

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