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'Oxytocin' इंजेक्शन बनाने वाली कंपनी ने कोर्ट का खटखटाया दरवाजा, राजस्थान सरकार की रिपोर्ट को क्यों नकारा?

कोटा में प्रसूताओं की मौत के बाद राजस्थान सरकार की लैब रिपोर्ट में 'ऑक्सिटोसिन' इंजेक्शन पर कई सवाल उठे थे। निर्माता कंपनी जैकसन लैबोरेट्रीज ने इन निष्कर्षों को खारिज करते हुए कोटा कोर्ट में चुनौती दी है और री-टेस्टिंग क…

Navbharat Times के अनुसार29 जून 2026 को 09:26 am बजे
'Oxytocin' इंजेक्शन बनाने वाली कंपनी ने कोर्ट का खटखटाया दरवाजा, राजस्थान सरकार की रिपोर्ट को क्यों नकारा?

सौजन्य से:- Navbharat Times

कोटा में प्रसूताओं की मौत के बाद राजस्थान सरकार की लैब रिपोर्ट में 'ऑक्सिटोसिन' इंजेक्शन पर कई सवाल उठे थे। निर्माता कंपनी जैकसन लैबोरेट्रीज ने इन निष्कर्षों को खारिज करते हुए कोटा कोर्ट में चुनौती दी है और री-टेस्टिंग की मांग की है।

कोटा: कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज में मई महीने में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद हुई प्रसूताओं की मौत के मामले में नया कानूनी मोड़ आया है। 'टोसिन' ब्रांड नाम से ऑक्सिटोसिन इंजेक्शन बनाने वाली अमृतसर की कंपनी 'जैकसन लैबोरेट्रीज प्राइवेट लिमिटेड' ने राजस्थान स्वास्थ्य विभाग की लैब रिपोर्ट को कोटा की अदालत में चुनौती दी है। कंपनी ने अदालत से इस दवा बैच की दोबारा जांच कराने की मांग की है, जिसके बाद अब सैंपल को कोलकाता की सेंट्रल लैब भेजा गया है।

सरकारी लैब की रिपोर्ट: राजस्थान सरकार की पहली प्रयोगशाला रिपोर्ट में इस बैच को 'मानक स्तर का नहीं' और 'नकली' घोषित किया गया था, क्योंकि जांच में इसमें मुख्य तत्व यानी ऑक्सिटोसिन की मात्रा शून्य पाई गई थी।

कंपनी का पक्ष: दवा निर्माता कंपनी ने सरकारी लैब के इन दावों को खारिज करते हुए इसे अदालत में चुनौती दी है और दोबारा स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।

चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, ऑक्सिटोसिन इंजेक्शन का उपयोग प्रसव को प्रेरित करने और बच्चे के जन्म के बाद प्रसूता के अत्यधिक रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।

कोलकाता लैब की रिपोर्ट आने तक कार्रवाई पर रोक

कंपनी द्वारा कोर्ट का रुख करने के बाद, राजस्थान स्वास्थ्य विभाग ने ऑक्सिटोसिन इंजेक्शन के सैंपल दोबारा जांच के लिए कोलकाता स्थित ड्रग टेस्टिंग लेबोरेटरी भेज दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, जब तक कोलकाता लैब की नई रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती, तब तक कंपनी के खिलाफ प्रस्तावित कानूनी अभियोजन की प्रक्रिया को रोक कर रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि यह बैच दोबारा जांच में फेल होता है, तभी आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।

अब तक क्या नियामक कदम उठाए गए?

प्रारंभिक रिपोर्ट और निरीक्षणों के आधार पर विभिन्न अथॉरिटीज द्वारा निम्नलिखित कदम उठाए गए थे।

लाइसेंस संबंधी कार्रवाई: पंजाब लाइसेंसिंग अथॉरिटी ने निर्माण नियमों (GMP) के उल्लंघन के कारण अमृतसर स्थित इस यूनिट का लाइसेंस रद्द किया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने भी नियामक निरीक्षण के बाद हिमाचल प्रदेश में स्थित इस कंपनी की यूनिट्स के लाइसेंस रद्द कर दिए थे। कंपनी ने इन निष्कर्षों पर असहमति जताते हुए दवाओं को वापस मंगाने (Recall) की प्रक्रिया शुरू की थी।

राजस्थान में जब्ती: राजस्थान ड्रग कंट्रोल विभाग ने राज्यभर में अलर्ट जारी कर इस बैच के उपलब्ध 3,500 इंजेक्शन्स के स्टॉक को सीज कर दिया था और इसके इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। साथ ही, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड में विसंगतियां मिलने पर कोटा के वितरक 'राजस्थान मेडिकल हॉल' का लाइसेंस भी रद्द कर दिया गया था।

डब्ल्यूएचओ ने मांगी थी तथ्यात्मक जानकारी

इस मामले पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी वैश्विक फार्माकोविजिलेंस निगरानी के तहत भारत सरकार के माध्यम से जानकारी मांगी थी। राजस्थान सरकार ने ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया के जरिए प्रयोगशाला के निष्कर्षों, नियामक कार्रवाइयों और अस्पताल के रिकॉर्ड की पूरी तथ्यात्मक रिपोर्ट भेज दी थी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि डब्ल्यूएचओ की यह मांग केवल सूचना-एकत्रित करने के लिए थी और इससे मौतों का दवा से सीधा संबंध स्थापित नहीं होता है।

लेखक के बारे मेंपुलकित सक्सेनापुलकित सक्सेना नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। वह साल 2022 नवंबर महीने से नवभारत टाइम्स की डिजिटल विंग से जुड़े। वर्तमान में राजस्थान के लिए काम करते हैं। 2019 में पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली के नेशनल टीवी चैनल में इनपुट डेस्क से की। बीते 7 सालों में टेलीविजन से लेकर सोशल मीडिया और अब डिजिटल मीडिया में काम कर रहे हैं। वर्तमान में नवभारत टाइम्स में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका में कार्यरत हैं।

राजस्थान की राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर्स और ऑफ बीट खबरों पर नजर रखना पुलकित सक्सेना की पहली प्राथमिकता रहती है।

विशेषज्ञता- राजनीति, क्राइम, एनलिसिस, सियासी उठा पटक को कवर करना।

पत्रकारिता अनुभव: 7 साल से कार्यरत

पुलकित सक्सेना ने साल 2017 में जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन पूरी की। साल 2019 में देश की प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी से दिल्ली में प्रथम श्रेणी से पोस्ट ग्रेजुएशन पत्रकारिता में किया। इसके बाद साल 2019 में दिल्ली से टीवी 100 न्यूज चैनल से पत्रकारिता की शुरुआत की। इसके बाद राजस्थान के यूट्यूब न्यूज चैनल में एंकरिंग, पैकेज क्रिएशन और सोशल मीडिया हैंडल के लिए सक्रियता से काम किया। साल 2022 के नवंबर महीने में वह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में जुड़े। वर्तमान में बीते तीन साल से वह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।... और पढ़ें

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