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सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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जयपुर में चल रही थी मौत की फैक्ट्री:फायर डिपार्टमेंट से भी नहीं ली थी NOC; लोग बोले- पुलिस को सारी जानकारी थी
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जयपुर के खोह नागोरियान इलाके में 9 जून की सुबह हुआ भीषण अग्निकांड सरकारी महकमों और स्थानीय पुलिस की घोर लापरवाही का नतीजा है। अगर जिम्मेदार जरा भी गंभीर होते, तो शायद 8 बेगुनाह लोगों की जान नहीं जाती। करीम नगर-बी के महज 52 गज के रिहायशी मकान में बिना किसी वैध लाइसेंस और औपचारिकताओं के मौत का यह खेल पिछले 2 साल से धड़ल्ले से चल रहा था। हैरान करने वाली बात यह है कि घटनास्थल से खोह नागोरियान पुलिस थाना मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर है।
स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि पुलिस और बीट अधिकारियों को इस अवैध फैक्ट्री की पूरी जानकारी थी, लेकिन साठगांठ और शह के चलते कभी कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसी लापरवाही की वजह से फायर ब्रिगेड डिपार्टमेंट से NOC लेने की जरूरत तक नहीं समझी गई।
धमाका ऐसा लगा जैसे भूकंप आ गया
आसपास के निवासियों ने बताया कि सुबह करीब 11 बजे अचानक इतना तेज धमाका हुआ कि लगा जैसे भूकंप आ गया हो। जब लोग घरों से बाहर भागे तो देखा कि मकान नंबर-88 से बारूद के गुबार के बीच बुरी तरह झुलसे हुए मजदूर चीखते हुए बाहर निकल रहे थे।
पड़ोसियों ने बताया कि अंदर फिर से विस्फोट होने का डर था, इसके बावजूद उन्होंने अपनी जान दांव पर लगाकर झुलसे हुए लोगों को बाहर निकाला और हॉस्पिटल पहुंचाया।
2 साल से चल रही थी फैक्ट्री, पुलिस बोली- हमें पता ही नहीं था
स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस 52 गज के मकान में आसपास के लोग ही काम करते थे। सरकारी महकमों को सब मालूम था। हादसे के बाद बैकफुट पर आई पुलिस अब अपना पल्ला झाड़ते हुए अजीब तर्क दे रही है। पुलिस का कहना है कि उन्हें जानकारी ही नहीं थी कि रीको (RIICO) एरिया को छोड़कर पटाखा फैक्ट्री इस तरह रिहायशी इलाके में चल रही है।
SMS अस्पताल के बर्न वार्ड से खुला राज
इस पूरे अवैध कारोबार के तार देश की राजधानी दिल्ली से जुड़े हैं। हादसे में जान गंवाने वाले बिलाल के भाई राशिद खान ने एक बड़ा खुलासा किया है। राशिद ने बताया- मेरा भाई SMS हॉस्पिटल के बर्न वार्ड में भर्ती था।
उसके पास वाले बेड पर एक गंभीर झुलसा हुआ युवक था, जिसने अपना नाम नासिर (निवासी दिल्ली) बताया। नासिर ने अपने पिता का मोबाइल नंबर देकर मुझे कॉल करने को कहा। मैंने जब उस नंबर पर सूचना दी, तो उसके बाद से वह मोबाइल लगातार बंद आ रहा है।
पुलिस का प्राथमिक अनुमान है कि नासिर का पिता ही इस अवैध फैक्ट्री का मुख्य संचालक है। परिजनों के जयपुर पहुंचने के बाद ही इस मामले में और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
इवेंट के पटाखों की होती थी पैकिंग, मकान मालिक और संचालक फरार
यह भीषण आग 9 जून की सुबह करीब 11 बजे लगी थी, जिसमें एक बच्चे और दो भाइयों समेत कुल 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। यह मकान (नंबर- 88, करीम नगर-बी) याकूब पुत्र नजीर खान (निवासी- राक्ष्या की ढाणी, खोह नागोरियान) का है।
याकूब ने यह मकान दिल्ली के रहने वाले फिरोज नाम के शख्स को किराए पर दे रखा था। फिरोज इस तंग मकान में अवैध रूप से शादियों और अन्य इवेंट्स के लिए इस्तेमाल होने वाले भारी पटाखों की पैकिंग करवाता था।
हादसे के बाद से ही मकान मालिक याकूब और फैक्ट्री संचालक फिरोज फरार हैं। पुलिस की टीमें उनकी तलाश में दबिश दे रही हैं, लेकिन स्थानीय जनता में पुलिस की इस 'नाकाम' कार्यप्रणाली को लेकर भारी आक्रोश है।
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