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जयपुर के न्यू सांगानेर रोड पर जाम खत्म करने का ब्लूप्रिंट तैयार; 24 करोड़ होंगे खर्च

जयपुर के न्यू सांगानेर रोड पर जाम खत्म करने का ब्लूप्रिंट तैयार; 24 करोड़ होंगे खर्च शहर के ट्रैफिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परियोजना तय समय पर पूरी हो जाती है तो न्यू सांगानेर रोड पर जाम की समस्या में उल्लेखनीय कमी…

Live Hindustan के अनुसार24 जून 2026 को 10:06 am बजे
जयपुर के न्यू सांगानेर रोड पर जाम खत्म करने का ब्लूप्रिंट तैयार; 24 करोड़ होंगे खर्च

सौजन्य से:- Live Hindustan

जयपुर के न्यू सांगानेर रोड पर जाम खत्म करने का ब्लूप्रिंट तैयार; 24 करोड़ होंगे खर्च

शहर के ट्रैफिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परियोजना तय समय पर पूरी हो जाती है तो न्यू सांगानेर रोड पर जाम की समस्या में उल्लेखनीय कमी आएगी। लगातार चलते ट्रैफिक से वाहन चालकों का समय बचेगा, ईंधन की खपत घटेगी और प्रदूषण के स्तर में भी कमी आएगी।

जयपुर में अगर आपने कभी न्यू सांगानेर रोड पर सुबह ऑफिस जाते समय या शाम को घर लौटते वक्त लंबा ट्रैफिक जाम झेला है, तो यह खबर आपके लिए राहत की बड़ी उम्मीद लेकर आई है। शहर की सबसे व्यस्त सड़कों में शामिल न्यू सांगानेर रोड अब जल्द ही एक नए रूप में नजर आ सकती है। जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) ने ऐसा मास्टर प्लान तैयार किया है, जो न सिर्फ ट्रैफिक की रफ्तार बढ़ाएगा बल्कि रोजाना हजारों लोगों की जिंदगी को भी आसान बना देगा।

12 किलोमीटर का सफर, बिना रुकावट

कल्पना कीजिए, जयपुर एयरपोर्ट से कमला नेहरू नगर पुलिया तक करीब 12 किलोमीटर का सफर और बीच में एक भी रेड लाइट नहीं। न बार-बार ब्रेक लगाना, न चौराहों पर लंबी कतारें और न ही जाम में फंसकर समय बर्बाद होने की चिंता। JDA का नया “सिग्नल-फ्री कॉरिडोर” इसी सपने को हकीकत में बदलने की तैयारी है।

रोजाना लाखों लोगों की परेशानी का समाधान

यह सड़क केवल एक मार्ग नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों, विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और कारोबारियों की रोजमर्रा की जिंदगी की धुरी है। मानसरोवर, न्यू सांगानेर रोड और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोग वर्षों से बढ़ते ट्रैफिक दबाव से जूझ रहे हैं। सुबह के समय स्कूल बसों, कोचिंग जाने वाले छात्रों और ऑफिस कर्मचारियों की भीड़ सड़क पर उतरती है, जबकि शाम को यही रास्ता वाहनों के सैलाब में बदल जाता है।

24 करोड़ की परियोजना, 8 महीने में लक्ष्य

इसी चुनौती को देखते हुए JDA ने करीब 24.28 करोड़ रुपए की लागत से इस महत्वाकांक्षी परियोजना का खाका तैयार किया है। टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और जुलाई 2026 से जमीनी काम शुरू करने की तैयारी है। अधिकारियों का लक्ष्य है कि छह से आठ महीने के भीतर पूरा कॉरिडोर तैयार कर लिया जाए।

पहले फेज में बदलेंगे 8 बड़े चौराहे

इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि सड़क को केवल चौड़ा करने या फ्लाईओवर बनाने तक सीमित नहीं रखा गया है। ट्रैफिक इंजीनियरिंग के आधुनिक मॉडल पर आधारित यू-शेप टर्न कॉरिडोर तैयार किया जाएगा। पहले चरण में द्वारकादास पार्क से भृगु पथ तक नौ में से आठ प्रमुख चौराहों को सिंगल और डबल यू-टर्न सिस्टम में बदला जाएगा। इससे वाहनों को बार-बार सिग्नल पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी और ट्रैफिक का प्रवाह लगातार बना रहेगा।

बीटू बाईपास पर बनेगा क्लोवर लीफ फ्लाईओवर

दूसरे चरण में सबसे बड़ी चुनौती माने जाने वाले बीटू बाईपास जंक्शन पर काम होगा। यह वह स्थान है जहां दिनभर भारी ट्रैफिक दबाव बना रहता है। यहां सामान्य यू-टर्न की जगह क्लोवर लीफ फ्लाईओवर बनाया जाएगा, जिससे विभिन्न दिशाओं से आने वाले वाहन बिना टकराव के आसानी से गुजर सकेंगे। इसके अलावा गोपालपुरा बाईपास के दो और प्रमुख चौराहों को भी सिग्नल-फ्री बनाने की योजना है।

पैदल यात्रियों की सुरक्षा पर भी फोकस

अक्सर बड़े ट्रैफिक प्रोजेक्ट्स में पैदल यात्रियों की जरूरतें पीछे छूट जाती हैं, लेकिन इस बार JDA ने उस गलती को दोहराने से बचने की कोशिश की है। विजय पथ चौराहा और वीटी रोड पर आधुनिक पैदल यात्री अंडरपास बनाए जाएंगे। इससे सड़क पार करने वाले लोगों को तेज रफ्तार ट्रैफिक के बीच जोखिम उठाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

समय, ईंधन और प्रदूषण तीनों पर असर

शहर के ट्रैफिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परियोजना तय समय पर पूरी हो जाती है तो न्यू सांगानेर रोड पर जाम की समस्या में उल्लेखनीय कमी आएगी। लगातार चलते ट्रैफिक से वाहन चालकों का समय बचेगा, ईंधन की खपत घटेगी और प्रदूषण के स्तर में भी कमी आएगी। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि रोजाना हजारों लोग अपने परिवार के साथ ज्यादा समय बिता सकेंगे, जो आज ट्रैफिक में फंसकर बर्बाद हो जाता है।

भविष्य के जयपुर की तैयारी

जयपुर तेजी से बढ़ता शहर है और बढ़ती आबादी के साथ बेहतर यातायात व्यवस्था उसकी सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है। ऐसे में न्यू सांगानेर रोड का यह सिग्नल-फ्री कॉरिडोर केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि शहर की बदलती जरूरतों के अनुरूप भविष्य की तैयारी भी है। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ, तो आने वाले महीनों में जयपुर की सबसे व्यस्त सड़कें भी राहत की सांस लेती नजर आ सकती हैं।

लेखक के बारे में

Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)

सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

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