जयपुर: पाकिस्तान तक फेसबुक से बना कॉन्टेक्ट, कलमा पढ़कर बनी 'खदीजा', महिला स्लीपर सेल गिरफ्तार
जयपुर: पाकिस्तान तक फेसबुक से बना कॉन्टेक्ट, कलमा पढ़कर बनी 'खदीजा', महिला स्लीपर सेल गिरफ्तार Jaipur News In Hindi: गिरफ्तार महिला बबीता (37) मूल रूप से सवाई माधोपुर जिले की रहने वाली बताई जा रही है. उसे जयपुर में वाटिक…

सौजन्य से:- ABP News
जयपुर: पाकिस्तान तक फेसबुक से बना कॉन्टेक्ट, कलमा पढ़कर बनी 'खदीजा', महिला स्लीपर सेल गिरफ्तार
Jaipur News In Hindi: गिरफ्तार महिला बबीता (37) मूल रूप से सवाई माधोपुर जिले की रहने वाली बताई जा रही है. उसे जयपुर में वाटिका क्षेत्र से रविवार को हिरासत में लिया गया.
जयपुर में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की स्लीपर सेल महिला को राजस्थान एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) ने गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार महिला बबीता (37) मूल रूप से सवाई माधोपुर जिले की रहने वाली बताई जा रही है. उसे जयपुर में वाटिका क्षेत्र से रविवार को हिरासत में लिया गया. राजस्थान एटीएस की गिरफ्त में आई महिला स्लीपर सेल बबीता धाकड़ उर्फ़ खदीजा को लेकर जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं.
जानकारी में आया है कि बबीता ने ऑनलाइन कलमा पढ़कर अपना नाम बदलकर 'खदीजा' रख लिया था. बबीता प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के संपर्क में थी और उसे कट्टरपंथी बनाने की प्रक्रिया चल रही थी. जांच के दौरान बबीता के मोबाइल फोन से "दुनिया धोखेबाज" नाम का एक संदिग्ध फेसबुक अकाउंट मिला. इस अकाउंट की प्रोफाइल फोटो में हथियारों के साथ तस्वीरें लगी हुई थीं.
फेसबुक पर जुड़ें हैं पाकिस्तानी और विदेशी नागरिक
फेसबुक अकाउंट में करीब 370 फ्रेंड जुड़े हुए मिले, जिनमें अधिकांश पाकिस्तान और अन्य विदेशी देशों के नागरिक बताए जा रहे हैं. जांच में एक ऐसा अकाउंट भी मिला, जिस पर जैश-ए-मोहम्मद का झंडा प्रदर्शित था. इसके अलावा मोबाइल की जांच में पाकिस्तानी और अफगानिस्तानी नंबरों के साथ व्हाट्सएप चैट और कॉल के साक्ष्य भी मिले हैं.
पाकिस्तान में बैठे एक मौलवी ने फोन के माध्यम से उसका धर्म परिवर्तन कराया था और उसे पाकिस्तान बुलाने की योजना बनाई जा रही थी. मौलवी ने बबीता को बताया था कि अबू-उबैदाह नाम का व्यक्ति उससे शादी करना चाहता है. इसके लिए उसे नमाज, और कुरान पढ़ने तथा धार्मिक तौर-तरीकों का पालन करने के निर्देश दिए गए थे.
जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर के नेटवर्क से जुड़े नंबर मिले
बबीता के मोबाइल में जैश-ए-मोहम्मद कमांडर के नेटवर्क से जुड़े नंबर मिले हैं. पिछले कुछ महीनों से बबीता को प्रभावित कर उसका धर्म परिवर्तन कराने और उसके माध्यम से भारत में गतिविधियां संचालित करने की योजना बनाई जा रही थी.
समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो उसे पाकिस्तान भेजे जाने की साजिश को अंजाम दिया जा सकता था. फिलहाल एटीएस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियां पूरे नेटवर्क, विदेशी संपर्कों और संभावित स्लीपर सेल मॉड्यूल की गहन जांच में जुटी हुई हैं.
क्या है जमात-उल-मुमीनात संगठन?
दरअसल जमात-उल-मुमीनात पाकिस्तान आधारित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की महिलाओं के लिए बनाई गई एक शाखा बताई जाती है. जिसकी घोषणा साल 2025 में की गई थी और इसका नेतृत्व मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर को सौंपा गया.
इस विंग का उद्देश्य महिलाओं की भर्ती, वैचारिक कट्टरपंथीकरण (Radicalization) और संगठन के नेटवर्क को विस्तार देना बताया गया है.इस संगठन ने महिलाओं के लिए ऑनलाइन कोर्स और प्रचार अभियान चलाए गए ताकि अधिक से अधिक महिलाओं को जोड़ा जा सके.
गंभीरता से मामले में जुटी सुरक्षा एजेंसियां
राजस्थान ATS द्वारा गिरफ्तार बबीता उर्फ खदीजा के मामले में जमात-उल-मुमीनात का नाम सामने आने से सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क को बेहद गंभीरता से देख रही हैं. हालांकि जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष एजेंसियों द्वारा ही तय किए जाएंगे.
जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस तरह के नेटवर्क भारत में महिलाओं को ऑनलाइन प्रभावित कर स्लीपर सेल, लॉजिस्टिक सपोर्ट या प्रचार नेटवर्क के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश कर सकते हैं. कुछ मामलों में महिला सदस्यों की भर्ती और नेटवर्क विस्तार के प्रयासों की जांच की गई है.
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मामले में एटीएस SP ने क्या बताया?
एटीएस SP मनीष त्रिपाठी ने बताया कि बबीता ने गिरफ्तारी से पहले जांच में बाधा डालने के मकसद से अपना “ज्यादातर डिजिटल डेटा डिलीट कर दिया है.” उन्होंने कहा, “उसने अपना ज्यादातर डिजिटल डेटा डिलीट कर दिया है, लेकिन हम उसे रिकवर करने की कोशिश करेंगे.”
उन्होंने यह भी कहा कि फोरेंसिक एक्सपर्ट्स डिलीट की गई जानकारी को वापस पाने के लिए काम कर रहे हैं ताकि उसके नेटवर्क और काम करने के दायरे का पता लगाया जा सके. सूत्रों की माने तो बबीता ने कथित रूप से ऑनलाइन कट्टरपंथी सामग्री से प्रभावित होकर धर्म परिवर्तन किया.
ATS को उसके मोबाइल और ऑनलाइन संपर्कों की जांच में संदिग्ध नेटवर्क से जुड़े संपर्क मिलने के संकेत मिले.एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि वह केवल ऑनलाइन समर्थक थी या किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा.
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