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राजस्थान-बॉर्डर पर छुपा हुआ तीर्थ, जहां लाखों महिलाओं ने किया था जौहर…

गागरोन किला, जो राजस्थान-मध्यप्रदेश बॉर्डर पर स्थित है, भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों में से एक है। इस किले ने मध्य और पश्चिमी भारत की सांस्कृतिक झलक दिखाई है, जो इसकी वास्तुकला और इतिहास को महत्व देती है। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल यह किला अपने 12 युद्धों में से दो प्रमुख युद्धों और जौहर के लिए जाना जाता है, जिसमें राजा अचलदास खींची की शहादत और उनकी पत्नियों का जौहर शामिल है, जिसने हमलावर पर उनकी वीरता की कहानी को दर्शाया।

Nai Dunia के अनुसार9 अगस्त 2026 को 04:15 pm बजे
राजस्थान-बॉर्डर पर छुपा हुआ तीर्थ, जहां लाखों महिलाओं ने किया था जौहर…

सौजन्य से:- Nai Dunia

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By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari

Publish Date: Sun, 09 Aug 2026 12:14:57 PM (IST)Updated Date: Sun, 09 Aug 2026 12:14:57 PM (IST)

- राजस्थान-मध्यप्रदेश बॉर्डर पर गागरोन किला है

- गागरोन किला भारत का सबसे अलग वाटर फोर्ट है

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। राजस्थान के झालावाड़ जिले में कालीसिंध और आहू नदियों के पवित्र संगम पर स्थित गागरोन किला भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों में से एक है। कई लोगों को लगता है कि यह किला राजस्थान का हिस्सा है। लेकिन यह राजस्तान के बॉर्डर पर MP का छुपा हुआ तीर्थ है।

यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची में शामिल यह किला अपनी वास्तुकला, बिना नींव के पहाड़ी पर खड़े होने की खासियत, वीरता और आत्म बलिदान की गाथाओं के लिए जाना जाता है। इसमें मध्य और पश्चिमी भारत की सांस्कृतिक झलक देखने को मिलती है।

किले के निर्माण का प्रारंभिक इतिहास 7वीं शताब्दी से माना जाता है। लेकिन इसे वर्तमान भव्य स्वरूप 12वीं शताब्दी में परमार वंश के राजा बिजलदेव के शासनकाल में मिला। बाद में यह खींची चौहानों की राजधानी बना और राजा अचलदास खींची के समय किले की पहचान लोगों तक पहुंची।

कहा जाता है कि गागरोन किले ने अपने इतिहास में कुल 12 युद्ध देखे हैं, जिनमें दो ऐतिहासिक युद्ध और जौहर सबसे जरूरी है

- प्रथम जौहर (1423 ई.): मालवा के सुल्तान होशंग शाह ने जब गागरोन पर आक्रमण किया, तब राजा अचलदास खींची ने मैदान में वीरतापूर्वक लड़ते हुए वीरगति पाई। राजा की शहादत के बाद शत्रु के हाथों अपनी अस्मिता खोने के बजाय सैकड़ों वीरांगनाओं ने अग्नि कुंड में कूदकर जौहर कर लिया। राजा अचलदास की वीरता का होशंग शाह पर इतना गहरा प्रभाव पड़ा कि उसने वर्षों तक राजा के शयनकक्ष को छुआ तक नहीं था।

गागरोन किला चारों तरफ से नदियों के जल और विंध्याचल की पहाड़ियों से घिरा हुआ है, जो इसे भारत के सबसे बेहतरीन 'जल दुर्ग' (Water Fort) का दर्जा देता है।

शिव मंदिर और सावन का महत्व: किले परिसर में 12वीं शताब्दी का प्राचीन शिव मंदिर स्थित है, जो सीधे कालीसिंध नदी के तट पर बना है। मंदिर में स्थापित सुंदर शिवलिंग की नियमित पूजा होती है।

सावन में उमड़ती है भीड़: सावन के पावन महीने में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। भक्त नदी में पवित्र स्नान कर भगवान भोलेनाथ का दर्शन पूजन करते हैं। इससे पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो जाता है।

झालावाड़ शहर से लगभग 14 किलोमीटर दूर स्थित यह किला अपनी शांति और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। नदी के किनारे से होकर गुजरने वाला इसका मार्ग बेहद मनमोहक है। झालावाड़ से टैक्सी या स्थानीय बस के माध्यम से आसानी से यहाँ पहुँचा जा सकता है।

अद्भुत वास्तुकला, धार्मिक आस्था और वीरों की शहादत का यह प्रतीक स्थल देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में और भी अधिक पहचान पाने का हकदार है।

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