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राजस्थान निकाय चुनाव में सरकार और अफसरों ने कैसे बनाया दबाव? इलेक्शन कमिश्नर को कांग्रेस ने गिनाई ये शिकायतें

कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रदेश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त को ज्ञापन देकर उन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। 152 से ज्यादा मुकदमे परिवाद दर्…

Navbharat Times के अनुसार30 सितंबर 2026 को 11:05 am बजे
राजस्थान निकाय चुनाव में सरकार और अफसरों ने कैसे बनाया दबाव? इलेक्शन कमिश्नर को कांग्रेस ने गिनाई ये शिकायतें

सौजन्य से:- Navbharat Times

कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रदेश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त को ज्ञापन देकर उन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

152 से ज्यादा मुकदमे परिवाद दर्ज

कांग्रेस के नेताओं ने अपने ज्ञापन में कहा कि सरकारी तंत्र ने प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस के बल पर लोकतंत्र विरोधी घटनाओं को अंजाम दिया गया। सत्ताधारी दल ने पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाते हुए कांग्रेसी और निर्दलीय पार्षदों को धमकाया गया। इतना ही नहीं। अपहरण जैसी घटनाएं भी प्रदेश के अलग अलग इलाकों में हुई। अलग अलग जिलों में कुल डेढ सौ से ज्यादा मुकदमे और परिवाद अपहरण के दर्ज किए गए। कांग्रेस का आरोप है कि प्रलोभन, धमकी, अपहरण जैसी घटनाओं के माध्यम से तोड़फोड़ कर कई निकायों में चेयरमैन पद हथियाए गए हैं। ऐसे में निर्वाचन आयोग के स्तर पर निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करे।ये शिकायतें रखी आयोग के समक्ष

- तिजारा नगर परिषद (अलवर खैरथल कांग्रेस समर्थित लगभग 18 निर्दलीय पार्षदों को हिमाचल प्रदेश से लौटते समय हरियाणा पुलिस द्वारा रोका/हिरासत में लिया गया। भारी विरोध और हाईकोर्ट के दखल के बाद ही मतदान संभव हो सका।

- श्रीविजयनगर नगरपालिका (श्रीगंगानगर जिला) कई पार्षदों के अपहरण के आरोप लगे। गोलियां में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई।

- सूरतगढ़ नगरपालिका में चेयरमैन चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस की नवनिर्वाचित महिला पार्षद लापता हो गईं, जिससे राजनीतिक हलचल बढ़ गई।

- भरतपुर जो कि मुख्यमंत्री का गृह जिला है, में भाजपा के पार्षदों की संख्या कम होने के बावजूद निर्दलीय पार्षदों पर दबाव बनाकर भाजपा प्रत्याशी को निर्विरोध चेयरमैन बना दिया गया।

- अजमेर और पाली नगर निगम कांग्रेस के पार्षदों की संख्या अधिक होने के बावजूद प्रशासनिक दबाव और तोड़फोड़ के आरोपों के बीच भाजपा मेयर पद पर विजयी घोषित हुई।

- प्रदेश के कई अन्य स्थानों (सीकर, जालोर, बाड़मेर, जोधपुर आदि) में पार्षदों की बाड़ेबंदी, परिवारों को धमकी, अवैध निर्माण के नोटिस, पुलिस द्वारा घेराबंदी और बड़े आर्थिक प्रलोभन (1.5 से 2.5 करोड़ रुपये तक के आरोप) दिए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। कांग्रेस नेताओं की ओर से जिला प्रशासन को दर्जनों ज्ञापन दिए गए लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

- कुचेरा नगर पालिका के अध्यक्ष प्रत्याशी तेजपाल मिर्धा को गिरफ्तारी का एप्रि हेन्सन होने पर माननीय उच्च न्यायालय शरण में जाना पड़ा।

- केकड़ी नगर पालिका के अध्यक्ष प्रत्याशी अनिल मित्तल, श्रीविजयनगर नगरपालिका, मण्डावा क्षेत्र में स्थित नगर पालिका, सीकर क्षेत्र में स्थित नगर पालिका, मथानिया नगर पालिका, पाली क्षेत्र स्थित नगर पालिका, बीकानेर क्षेत्र, चूरू, गंगानगर, नागौर, अजमेर, उदयपुर, अलवर, भरतपुर आदि सभी जगहों पर पार्षदों के ट्रेनिंग कैम्पों पर पुलिस प्रशासन द्वारा दबिश दी गई ।

- पार्षदों को डराया और धमकाया गया। पुलिस की मनमानी और दबिश के वीडियो सोशल साइट पर भरे पड़े है जिससे ऐसा प्रकट हो रहा था जैसे परे प्रदेश में कानून व्यवस्था ताक पर रख दी गई है और लोकतंत्र को लूटने का काम सत्ताधारी दल सरकारी अफसरों के माध्यम से कर रहे थे।

ज्ञापन के जरिए रखी ये मांगें

1. निकाय प्रमुख चुनाव के दौरान हुई सभी घटनाओं की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए।2. संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों, रिटर्निंग अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा जाए और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जावे।

3. जहां पक्षपात, मत निरस्तीकरण या दबाव साबित हो, वहां परिणाम निरस्त कर पुर्नमतदान/पुनर्गणना के आदेश दिए जाएं।

4. दोषी अधिकारियों और व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

5. भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने हेतु सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

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